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हाथरस: एक ही सड़क पर तीन बार इंटरलॉकिंग, प्रभारी मंत्री के सामने खुली पोल

Fri, 20 Mar 2020 12:09 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 20 Mar 2020 12:09 AM IST
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Hathras: Three times interlocking on the same road, open pole in front of the minister in charge
हाथरस: कलेक्ट्रेट में दिव्यांग की समस्या सुनते जिले के प्रभारी मंत्री। - फोटो : HATHRAS
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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जिला प्रशासन की ओर से जिले के विकास कार्यों के गुणगान के लिए छापी पुस्तिकाओं ने पंचायती राज विभाग मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी के सामने अफसरों की फजीहत करा दी। इस पुस्तिका में एक ही सडक़ के निर्माण को तीन बार अलग अलग धनराशि से कराए जाने का मामला सामने आया है। इस मामले के सामने आते ही जिले के प्रभारी मंत्री ने डीएम से पूरे मामले की जांच कराए जाने के निर्देश दिए हैं। हालांकि इस प्रकरण में विगत में अमर उजाला में यह खबर प्रकाशित की गई थी, विधायक व सांसद निधि के होने वाले कामों में बिना मौके पर जाए ही विभागीय जिम्मेदाराना अधिकारियों द्वारा धनराशि जारी की कर दी जाती है। फाइल में निर्माण के पहले व बाद की निरीक्षण आख्या के कोई फोटोग्राफ नहीं रखे जाते हैं।
शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन की ओर से जिले में कराए गए विकास कार्यों के लिए विधानसभा बार पुस्तिकाएं छपवाई गई। इन पुस्तिकाओं में विभिन्न विभागीय योजनाओं के तहत विधानसभा क्षेत्रों में हुए कार्यों का बखान किया गया। इस गुणगान के बीच ऐसा मामला सामने आया कि जिले के अफसरों ने चुप्पी साध ली और प्रभारी मंत्री के सामने फजीहत शुरू हो गई। जिले के हाथरस विधान सभा क्षेत्र के विकास कार्यों के छपी पुस्तिका में शहरी क्षेत्र में एक सडक़ पर तीन बार सांसद निधि से इंटरलॉकिंग कार्य किए जाने का मामला सामने आया।
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सांसद निधि से कराए गए कार्यों में सामने आया कि एलआईसी ऑफिस के पीछे एक सड़क पर तीन बार इंटरलॉकिंग की गई। पहली बार में 3.46 लाख रुपये, दूसरी बार में 4.09 लाख रुपये और तीसरी बार में 8.17 लाख रुपये खर्च कर इंटरलॉकिंग निर्माण कर दिया गया। अब इस मामले के सामने आने के बाद कई तरह के सवाल उठ खड़े हुए। विभागीय अफसरों ने चुप्पी साध ली। प्रभारी मंत्री के सामने जब यह मामला पहुंचा तो तत्काल प्रभारी मंत्री ने डीएम को पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए। इससे यह तो स्पष्ट हो गया कि डीआरडीए की तकनीकी टीम द्वारा निर्माण कार्यों के निधि जारी किए जाने से पहले मौके पर जाकर स्थलीय निरीक्षण नहीं किया जाता है और फाइलों में ही इतिश्री कर ली जाती है।
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