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हाथरस : इस बार जिले की सियासत में कमाल दिखाने को बेताब सपा

Fri, 04 Feb 2022 12:00 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 04 Feb 2022 12:00 AM IST
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Hathras: This time the SP desperate to show wonders in the politics of the district
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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विधानसभा चुनाव में प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। सपा इस बार रालोद के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही है। गठबंधन से सपा के खाते में दो सीट और रालोद के खाते में एक सीट आई है। प्रदेश की सत्ता में कई बार काबिज रही सपा इस जिले में कोई खास कमाल नहीं दिखा पाई है। हाथरस विधानसभा सीट से तो सपा आज तक जीत ही हासिल नहीं कर सकी। सादाबाद और सिकंदराराऊ सीट से जरूर उसे एक-एक बार ही जीत हासिल हुई है।
इस बार सिकंदराराऊ सीट पर सपा ने पिछड़े वर्ग के व्यक्ति को मैदान में उतारा है और उसे जातीय समीकरण के सहारे जीत की उम्मीद है। वहीं हाथरस सीट पर ऐसे राजनेता को प्रत्याशी बनाया है, जो पिछली बार बसपा से चुनाव लड़कर दूसरे स्थान पर आया था। सपा को यह भी उम्मीद है कि उसे रालोद के गठबंधन का फायदा भी मिलेगा।
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जिले के चुनावी इतिहास पर निगाह डालें तो हाथरस विधानसभा सीट से सपा को आज तक कभी सफलता ही नहीं मिली। सपा ने कई बार अन्य दलों को भी समर्थन दिया लेकिन वह भी यहां से नहीं जीत सके। सिकंदराराऊ सीट से सपा-बसपा गठबंधन के प्रत्याशी अमर सिंह यादव ने जरूर 1993 में जीत हासिल की थी। इसके बाद सपा इस सीट से नहीं जीती। 2012 में सपा प्रत्याशी यशपाल सिंह ने बसपा प्रत्याशी रामवीर उपाध्याय को कड़ी टक्कर दी और वह 1,063 वोटों से चुनाव हार गए। पिछले चुनाव में इस सीट पर सपा तीसरे स्थान पर रही। सादाबाद सीट से सपा 2012 में चुनाव जीती।
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तब सपा के देवेंद्र अग्रवाल ने पहली बार इस सीट पर सपा का परचम लहराया। इसके अलावा इस सीट पर कभी सपा नहीं जीती। इस तरह सपा इस जिले की तीनों सीटों पर कोई खास कमाल नहीं दिखा सकी। इस बार सपा-रालोद से गठबंधन कर चुनाव लड़ रही है। पार्टी ने हाथरस सीट से ब्रजमोहन राही को मैदान में उतारा है। राही पिछली बार इसी सीट से बसपा से उम्मीदवार थे और दूसरे स्थान पर रहे थे। वहीं सिकंदराराऊ सीट से डॉॅ. ललित बघेल को प्रत्याशी बनाया है। सिकंदराराऊ सीट से सपा ने जातिगत आंकड़े के हिसाब से पिछड़े वर्ग के व्यक्ति को उम्मीदवार बनाया है तो हाथरस सीट पर उसने एक स्थानीय चेहरे पर दांव लगाया है। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस बार चुनाव में दोनो सीटों पर सपा कोई कमाल दिखा पाती है या नहीं। वह भी तब जबकि वह रालोद के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ रही है। संवाद
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