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हाथरस : अधिक बारिश से इस बार अमरूद की पैदावार में गिरावट

Wed, 09 Feb 2022 12:24 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 09 Feb 2022 12:24 AM IST
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Hathras: This time due to more rain, there is a decline in the yield of guava
हाथरस : अमरूद के बाग में खड़े बागवान। संवाद - फोटो : SASNI
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सासनी (हाथरस)
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मौसम में हो रहे बदलाव का असर बागवानी पर भी दिखने लगा है। पिछले वर्ष अधिक बारिश होने के कारण इस बार शीतकालीन अमरूद की फसल में भारी गिरावट आई है। बारिश की वजह से पेड़ों में अंकुर नहीं फूटने से अमरूद का पैदावार प्रभावित हुआ है। फसल कम होने पर बाग की रखवाली करने बाग छोड़कर चले गए हैं। इससे आढ़तियों को पैसा डूबने का डर सताने लगा है।
दरअसल, पिछले साल बारिश अधिक होने के कारण अमरूद के पेड़ों में अंकुर नहीं फूट सका। कम पैदावार होने से बाग मालिकों के साथ व्यापारियों की भी चिंताएं बढ़ गई है। रखवाली करने वाले बाग छोड़ कर चले गए है। जिससे किसान की चिंता और भी बढ़ गई है। दूसरी तरफ आढ़तियों का पैसा भी डूब गया है।
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बता दें कि, जाड़े के मौसम में कस्बे की सब्जी मंडी में शाम को प्रतिदिन करीब दस लाख का व्यापार होता था। जो आज घट कर दो लाख रुपये से भी कम हो गया है। अमरूद का व्यापार भी ठप हो गया है। दूर दराज क्षेत्र में अमरूद का निर्यात बंद हो गया है।
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छोटे लाल कुशवाहा कहते है कि मौसम में बदलाव होने के कारण इस बार अमरूद के पेड़ पर कल्ले नहीं आए हैं। इस कारण पैदावार में गिरावट आई है। मजबूरी में बाग छोड़ना पड़ा। सुभाष चंद्र पालीवाल कहते है कि करीब 100 बीघा खेत में अमरूद का बाग था। अधिकांश पेड़ों पर अमरूद आया ही नहीं है। इस कारण बाग रखाने वाले बाग छोड़ कर चले गए है। क्योंकि उनके घर का खर्चा भी नहीं निकल पा रहा था। अमरूद की पैदावार पर मौसम का बहुत बुरा प्रभाव पड़ा है।

आढ़ती सतीश चंद्र गुप्ता कहते हैं कि गत वर्षों में देर रात तक मंडी में अमरूद का व्यापार होता था। इस वर्ष सभी आढ़त की दुकान शाम को बंद रहती है। सुबह छिटपुट आढ़तों के पास ही अमरूद दिखाई देता है। बाग रखाने वालों को व्यापार के उद्देश्य से जो पैसा दिया था वह डूब गया है। जलवायु परिवर्तन के कारण अमरूद की पैदावार नहीं हुई है। ऐसा पहली बार देखा गया है।
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