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हाथरस : ट्रांसपोर्ट कारोबारियों में हड़ताल की सुगबुगाहट
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
कोरोना संक्रमण की मार से ट्रांसपोर्ट कारोबार भी अछूता नहीं रहा है। सरकार की ओर से इस कारोबार को कोई सहूलियत नहीं दी जा रही है। डीजल के दाम बढ़कर 87 रुपये प्रति लीटर पहुंच गए हैं। एक साल के भीतर ट्रांसपोर्ट परिवहन का खर्चा करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ गया है। टोल टैक्स सहित अन्य खर्चे भी बढ़ गए हैं, लेकिन माल भाड़े में कोई वृद्धि नहीं की गई है।
यहां तक कि सरकार की ओर से ट्रांसपोर्टरों को किस्त और टैक्स जमा करने में भी कोई छूट नहीं दी जा रही है। कोरोना के चलते माल की आवाजाही सामान्य नहीं हो पा रही है। इस कारण करीब 40 प्रतिशत वाहन खड़े हैं, जिससे ट्रांसपोर्ट कारोबारी और ट्रकों के चालक-परिचालक भी खासे परेशान हैं। अब ट्रांसपोर्ट कारोबारियों में हड़ताल की सुगबुगाहट चल रही है।
कोरोना काल में माल की आपूर्ति कम होने से कारोबार को काफी घाटा हो रहा है। इस कारण वाहन स्वामियों को वाहनों को खड़ा करना पड़ रहा है। जो भी भाड़ा वाहन स्वामियों को मिलता है, वह टोल और डीजल में खर्च हो रहा है। लिहाजा सरकार को डीजल के दाम घटाने चाहिए और एआरटीओ से छह माह का टैक्स माफ कराना चाहिए।
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-किशनलाल शर्मा, पश्चिमी यूपी प्रभारी मोटर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन
इन-दिनों डीजल के दाम 87 रुपये प्रति लीटर पहुंच गए हैं। कोरोना के चलते माल की मांग कम है। इस कारण करीब 40 प्रतिशत वाहन खड़े हो रहे हैं। एक साल में करीब 30 प्रतिशत खर्चे में बढ़ोतरी हुई है। ट्रांसपोर्ट कारोबार बिल्कुल खत्म हो जा रहा है, क्योंकि वाहन स्वामी गाड़ियों की किस्त तक नहीं दे पा रहे हैं। हड़ताल की चर्चा चल रही है।
-राजीव वार्ष्णेय, ट्रांसपोर्ट कारोबारी
डीजल के दाम बढ़ने के कारण छोटे ट्रांसपोर्टर किस्त नहीं निकाल पा रहे हैं। सरकार को इस सेक्टर पर ध्यान देना चाहिए। माल भाड़ा बढ़ेगा तो महंगाई भी बढ़ेगी, इसलिए किस्त जमा करने की समय सीमा को बढ़ा देना चाहिए, ताकि यह कारोबार फिर पटरी पर लौट सके। हालांकि अनलॉक में सामान की आवाजाही बढ़ेगी तो इससे घाटा भी पूरा हो जाएगा।
-अजय गौड़, ट्रांसपोर्ट कारोबारी
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कोरोना संक्रमण की मार से ट्रांसपोर्ट कारोबार भी अछूता नहीं रहा है। सरकार की ओर से इस कारोबार को कोई सहूलियत नहीं दी जा रही है। डीजल के दाम बढ़कर 87 रुपये प्रति लीटर पहुंच गए हैं। एक साल के भीतर ट्रांसपोर्ट परिवहन का खर्चा करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ गया है। टोल टैक्स सहित अन्य खर्चे भी बढ़ गए हैं, लेकिन माल भाड़े में कोई वृद्धि नहीं की गई है।
यहां तक कि सरकार की ओर से ट्रांसपोर्टरों को किस्त और टैक्स जमा करने में भी कोई छूट नहीं दी जा रही है। कोरोना के चलते माल की आवाजाही सामान्य नहीं हो पा रही है। इस कारण करीब 40 प्रतिशत वाहन खड़े हैं, जिससे ट्रांसपोर्ट कारोबारी और ट्रकों के चालक-परिचालक भी खासे परेशान हैं। अब ट्रांसपोर्ट कारोबारियों में हड़ताल की सुगबुगाहट चल रही है।
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कोरोना काल में माल की आपूर्ति कम होने से कारोबार को काफी घाटा हो रहा है। इस कारण वाहन स्वामियों को वाहनों को खड़ा करना पड़ रहा है। जो भी भाड़ा वाहन स्वामियों को मिलता है, वह टोल और डीजल में खर्च हो रहा है। लिहाजा सरकार को डीजल के दाम घटाने चाहिए और एआरटीओ से छह माह का टैक्स माफ कराना चाहिए।
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-किशनलाल शर्मा, पश्चिमी यूपी प्रभारी मोटर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन
इन-दिनों डीजल के दाम 87 रुपये प्रति लीटर पहुंच गए हैं। कोरोना के चलते माल की मांग कम है। इस कारण करीब 40 प्रतिशत वाहन खड़े हो रहे हैं। एक साल में करीब 30 प्रतिशत खर्चे में बढ़ोतरी हुई है। ट्रांसपोर्ट कारोबार बिल्कुल खत्म हो जा रहा है, क्योंकि वाहन स्वामी गाड़ियों की किस्त तक नहीं दे पा रहे हैं। हड़ताल की चर्चा चल रही है।
-राजीव वार्ष्णेय, ट्रांसपोर्ट कारोबारी
डीजल के दाम बढ़ने के कारण छोटे ट्रांसपोर्टर किस्त नहीं निकाल पा रहे हैं। सरकार को इस सेक्टर पर ध्यान देना चाहिए। माल भाड़ा बढ़ेगा तो महंगाई भी बढ़ेगी, इसलिए किस्त जमा करने की समय सीमा को बढ़ा देना चाहिए, ताकि यह कारोबार फिर पटरी पर लौट सके। हालांकि अनलॉक में सामान की आवाजाही बढ़ेगी तो इससे घाटा भी पूरा हो जाएगा।
-अजय गौड़, ट्रांसपोर्ट कारोबारी