फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hathras News ›   Hathras: The glass industry of Sasni has been shattered piece by piece

हाथरस : टुकड़ा-टुकड़ा होकर बिखर चुका है सासनी का कांच उद्योग

Sun, 08 May 2022 12:10 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 08 May 2022 12:10 AM IST
विज्ञापन
Hathras: The glass industry of Sasni has been shattered piece by piece
हाथरस : सासनी में बंद पड़ी कांच की फैक्टरी। संवाद - फोटो : SASNI
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सासनी (हाथरस)
विज्ञापन

उद्योग जगत में अपना लोहा मनवा चुकी औद्योगिक नगरी सासनी बुरे दौर से गुजर रही है। यहां चलने वाली सौ से ज्यादा पंजीकृत कांच की इकाइयां टुकड़ा-टुकड़ा होकर बिखर चुकी हैं। पिछले करीब ढाई दशक से इनकी चिमनियों से धूआं नहीं निकला है। करीब तीस साल पहले स्थापित फाउंड्री भी दम तोड़ चुकी है। श्वेत क्रांति का सपना दिखाने वाली पराग डेयरी भी कर्ज के बोझ से दब कर खत्म हो चुकी है। प्रोत्साहन व संसाधनों के अभाव में ये उद्योग बंद होते चले गए। यही कारण है कि करीब 160 साल पहले टाउन एरिया का दर्जा हासिल करने वाली सासनी विकास का सही मुकाम तय नहीं कर पाई है।
वर्ष 1942 में सासनी के एक उद्योगपति ने कांच का कारखाना खोल कर इस क्षेत्र के विकास का सपना संयोजा था। इसके बाद यहां लगातार कांच उत्पाद बनाने वाले कारखाने खुलते चले गए। यहां चलने वाली फैक्टरियों में कांच की शीशियां, जार, गिलास, गुलदस्ता, पेपर वेट, गोली सोडा बोतल, कप प्लेट से लेकर रेल गाड़ी की हेड लाइट तक बनती थी। कांच उद्योग से जुड़े लोग बताते हैं कि इस उद्योग के पिछड़ेपन का कारण बाजार में प्लास्टिक के सामान की मांग बढ़ना रही, जिससे कांच के आइटमों की खपत पर बुरा असर पड़ा।
विज्ञापन

शासन-प्रशासन ने भी इस उद्योग के लिए गैस सप्लाई जैसी कोई सुविधा दिलाने की पहल नहीं की । केरोसिन की आपूर्ति भी पर्याप्त नहीं हुई। इस कारण बाजार में कांच का उत्पादन महंगा होने लगा और लाभ कम होने लगा। नतीजा कांच उद्योग टुकड़ा टुकड़ा होकर बिखर गया। हजारों हाथों को काम देने वाले कारखाने भी धीरे धीरे बंद होते चले गए। मजदूरों का निवाला छिन गया। इस उद्योग से जुड़े मजदूर चाय, पान की दुकान करने पर मजबूर हो गए। लेकिन शासन-प्रशासन एवं जन प्रतिनिधियों ने इस उद्योग को बचाने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन

कांच उद्योग की ये थी जरूरतें
सस्ती दर पर केरोसिन, गैस व बिजली की सप्लाई, सस्ता कर्ज, यातायात की सुविधा इस उद्योग की प्रमुख जरूरत थी। लेकिन इन्हें सुलभ करने के लिए कोई पहल नहीं हुई। नतीजा उद्योगपतियों ने इस उद्योग से अपने हाथ पीछे खींच लिए।
क्या कहती है सासनी की जनता
संसाधनों के अभाव में यहां के उद्योग धंधे चौपट हो गए। पूंजीपतियों ने निवेश करना बंद कर दिया। शासन-प्रशासन की उदासीनता एवं क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले लोग बाहरी होने के कारण उन्होंने विकास की बात को नहीं उठाया। यही कारण है कि लोग क्षेत्र के विकास के लिए तरस गए हैं।
दीपेश भार्गव
सुविधाएं उपलब्ध न होने के कारण कारखाना संचालकों को कारखाने बंद करने पर मजबूर होना पड़ा। बाजार में कांच के आइटम मंहगे होने लगे। इनकी खपत कम हो गई। मजदूरों को मुनासिब मजदूरी भी नहीं मिल पाती थी। इस कारण मजदूरों का गुजारा भी नहीं हो पाता था।

प्रकाश चंद्र शर्मा
कांच उद्योग की जरूरतें पूरी न होने के कारण धीरे धीरे कांच की इकाइयां बंद होती चली गईं। बाजार में प्लास्टिक के आइटम आ गए। कांच का उत्पादन मंहगा हो गया। संसाधन के अभाव में पूंजीपति बाहर पलायन कर गए। मजदूर बेरोजगार हो गए। इस कारण क्षेत्र का विकास ठप रहा।
सुधीर अग्रवाल
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed