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Hathras News: एमडीआर की दहशत, निजी खातों में भुगतान ले रहे दुकानदार
Thu, 17 Sep 2026 02:46 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Thu, 17 Sep 2026 02:46 AM IST
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शहर की एक दुकान पर लगा यूपीआई का बार कोड। संवाद
- फोटो : samvad
डिजिटल लेनदेन पर नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के 15 अक्तूबर से लागू होने वाले नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) फ्रेमवर्क ने स्थानीय बाजार में हलचल पैदा कर दी है। स्थिति यह है कि करीब 70 फीसदी छोटे व मध्यम दुकानदार व्यावसायिक के बजाय अपने व्यक्तिगत बचत खातों से जुड़े क्यूआर कोड से ही भुगतान स्वीकार कर रहे हैं।
हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि एक लाख रुपये मासिक टर्नओवर वाले छोटे व्यापारियों, व्यक्तिगत बचत खातों और आम ग्राहकों पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। इसके बावजूद कारोबारियों के भीतर यह डर घर कर गया है कि आने वाले दिनों में इसका दायरा और सख्त हो सकता है।
व्यापारियों में चिंता यह है कि फिलहाल मिली छूट जैसे कि 2,000 रुपये तक के लेनदेन पर शून्य शुल्क, महीने में एक लाख रुपये तक की टर्नओवर सीमा और केवल मर्चेंट खातों पर लागू होने का नियम आदि कहीं अगले चरण में सीमित या खत्म न कर दिया जाए।
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दूसरी ओर, बड़े कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स और सराफा कारोबारियों का गणित अलग है। उनका मानना है कि दो हजार रुपये से ऊपर के मर्चेंट लेनदेन पर लगने वाला 0.4 फीसद शुल्क बहुत भारी नहीं पड़ेगा। यदि 10 हजार रुपये के माल की खरीद पर 40 रुपये का अतिरिक्त खर्च आता भी है, तो उसे मार्जिन या बिलिंग में थोड़ा सा समायोजित किया जा सकता है, जिससे न तो ग्राहक पर बड़ा असर पड़ेगा और न ही बिक्री प्रभावित होगी।
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छोटे कारोबारियों की जुबानी-क्या है जमीनी हकीकत?
चिंता इस बात की है कि यदि सरकार ने एक लाख रुपये की छूट खत्म कर दी या बचत खातों के लेनदेन पर पाबंदी लगा दी, तो हम जैसे छोटे दुकानदारों का मुनाफा पहले से ही कम है, उस पर 0.4 फीसदी का चार्ज भी जेब से भरना पड़ेगा।
-सूरजभान, दुकानदार।
हम ग्राहकों से अतिरिक्त पैसे मांग नहीं सकते, क्योंकि इससे वे दूसरी दुकान का रुख कर लेंगे। छोटे-छोटे भुगतान हैं। किस पर क्या बढ़ाकर ले पाएंगे, लेकिन वाकई ये कारोबार के लिए खतरे की घंटी की तरह है।
-प्रदीप कुमार, दुकानदार।
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हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि एक लाख रुपये मासिक टर्नओवर वाले छोटे व्यापारियों, व्यक्तिगत बचत खातों और आम ग्राहकों पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। इसके बावजूद कारोबारियों के भीतर यह डर घर कर गया है कि आने वाले दिनों में इसका दायरा और सख्त हो सकता है।
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व्यापारियों में चिंता यह है कि फिलहाल मिली छूट जैसे कि 2,000 रुपये तक के लेनदेन पर शून्य शुल्क, महीने में एक लाख रुपये तक की टर्नओवर सीमा और केवल मर्चेंट खातों पर लागू होने का नियम आदि कहीं अगले चरण में सीमित या खत्म न कर दिया जाए।
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दूसरी ओर, बड़े कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स और सराफा कारोबारियों का गणित अलग है। उनका मानना है कि दो हजार रुपये से ऊपर के मर्चेंट लेनदेन पर लगने वाला 0.4 फीसद शुल्क बहुत भारी नहीं पड़ेगा। यदि 10 हजार रुपये के माल की खरीद पर 40 रुपये का अतिरिक्त खर्च आता भी है, तो उसे मार्जिन या बिलिंग में थोड़ा सा समायोजित किया जा सकता है, जिससे न तो ग्राहक पर बड़ा असर पड़ेगा और न ही बिक्री प्रभावित होगी।
छोटे कारोबारियों की जुबानी-क्या है जमीनी हकीकत?
चिंता इस बात की है कि यदि सरकार ने एक लाख रुपये की छूट खत्म कर दी या बचत खातों के लेनदेन पर पाबंदी लगा दी, तो हम जैसे छोटे दुकानदारों का मुनाफा पहले से ही कम है, उस पर 0.4 फीसदी का चार्ज भी जेब से भरना पड़ेगा।
-सूरजभान, दुकानदार।
हम ग्राहकों से अतिरिक्त पैसे मांग नहीं सकते, क्योंकि इससे वे दूसरी दुकान का रुख कर लेंगे। छोटे-छोटे भुगतान हैं। किस पर क्या बढ़ाकर ले पाएंगे, लेकिन वाकई ये कारोबार के लिए खतरे की घंटी की तरह है।
-प्रदीप कुमार, दुकानदार।