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Hathras News: झूलों के संचालन में लगा एनओसी का अड़ंगा
Thu, 17 Sep 2026 02:48 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Thu, 17 Sep 2026 02:48 AM IST
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मेला श्री दाऊजी महाराज परिसर में लगे अधूरे झूले। संवाद
- फोटो : samvad
मेला श्रीदाऊजी महाराज के उद्घाटन के दिन भी बृहस्पतिवार को भी बड़े झूलों का संचालन लटक गया है। सुरक्षा को देखते हुए लोक निर्माण विभाग की ओर से अभी तक किसी भी झूले को अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया है।
लोनिवि के अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा जांच में खरा उतरे बिना और विधिवत एनओसी के मेले में किसी भी झूले को संचालित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। नियमों के अनुसार मेले में लगने वाले सभी विशालकाय झूलों जैसे आसमानी झूला, ब्रेक डांस, नाव, ड्रैगन ट्रेन आदि के संचालन से पहले लोक निर्माण विभाग के तकनीकी इंजीनियरों की टीम द्वारा स्थलीय व तकनीकी निरीक्षण किया जाता है। सभी मानकों पर खरा उतरने के बाद ही फिटनेस प्रमाणपत्र और एनओसी दी जाती है।
निरीक्षण के लिए तैयार ही नहीं मिले झूले
बलदेव छठ की पूर्व संध्या पर जब विभागीय तकनीकी टीम मेला परिसर में झूलों की जांच करने पहुंची, तो वहां की स्थिति देखकर हैरान रह गई। मौके पर एक भी बड़ा झूला ऐसा नहीं था, जो पूरी तरह फिट होकर ट्रायल या निरीक्षण के लिए तैयार हो। अधिकांश झूलों के लोहे के ढांचे कसने, वायरिंग जोड़ने और ग्रीसिंग का काम अधूरा मिला।
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सुरक्षा पर कोई जोखिम नहीं लेगा प्रशासन
अधिशासी अभियंता संजीव कुमार वर्मा ने बताया कि लोनिवि की तकनीकी टीम द्वारा यह जांच की जाती है। उनका कहना है कि झूलों में रोजाना हजारों की संख्या में बच्चे, महिलाएं और युवा बैठते हैं। ऐसे में हल्की सी तकनीकी लापरवाही या ढीलापन किसी बड़े हादसे का सबब बन सकता है।
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लोनिवि के अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा जांच में खरा उतरे बिना और विधिवत एनओसी के मेले में किसी भी झूले को संचालित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। नियमों के अनुसार मेले में लगने वाले सभी विशालकाय झूलों जैसे आसमानी झूला, ब्रेक डांस, नाव, ड्रैगन ट्रेन आदि के संचालन से पहले लोक निर्माण विभाग के तकनीकी इंजीनियरों की टीम द्वारा स्थलीय व तकनीकी निरीक्षण किया जाता है। सभी मानकों पर खरा उतरने के बाद ही फिटनेस प्रमाणपत्र और एनओसी दी जाती है।
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निरीक्षण के लिए तैयार ही नहीं मिले झूले
बलदेव छठ की पूर्व संध्या पर जब विभागीय तकनीकी टीम मेला परिसर में झूलों की जांच करने पहुंची, तो वहां की स्थिति देखकर हैरान रह गई। मौके पर एक भी बड़ा झूला ऐसा नहीं था, जो पूरी तरह फिट होकर ट्रायल या निरीक्षण के लिए तैयार हो। अधिकांश झूलों के लोहे के ढांचे कसने, वायरिंग जोड़ने और ग्रीसिंग का काम अधूरा मिला।
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सुरक्षा पर कोई जोखिम नहीं लेगा प्रशासन
अधिशासी अभियंता संजीव कुमार वर्मा ने बताया कि लोनिवि की तकनीकी टीम द्वारा यह जांच की जाती है। उनका कहना है कि झूलों में रोजाना हजारों की संख्या में बच्चे, महिलाएं और युवा बैठते हैं। ऐसे में हल्की सी तकनीकी लापरवाही या ढीलापन किसी बड़े हादसे का सबब बन सकता है।