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हाथरस : बजने लगा बैंड-बाजा, घोड़ी चढे़ दूल्हे राजा
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हाथरस : देवोत्थान एकादशी पर होती बरात की चढ़त और घोड़ों पर सवार दूल्हे। संवाद
- फोटो : HATHRAS
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
देवोत्थान एकादशी के साथ ही मांगलिक कार्यों पर लगी रोक भी हट गई। शुक्रवार को सहालग के पहले दिन शहर में शादियों की धूम रही। जगह-जगह बैंड-बाजों की गूंज सुनाई दी। सड़कों पर नाचते बरातियों के साथ दूल्हे राजा घोड़ी पर चढ़कर दुल्हन लाने के लिए जाते दिखाई दिए। पहले दिन सैकड़ों की संख्या में नवयुगल दांपत्य सूत्र में बंधे। विवाह स्थल दुल्हन की तरह सजे नजर आए। बरातों की चढ़त से सड़कों पर जाम की स्थिति रही। रोडवेज बसों और ट्रेनों में भी जबर्दस्त भीड़ नजर आई।
देवों के शयन के साथ पिछले चार महीने से मांगलिक कार्यों पर विराम लगा हुआ था। देवोत्थान एकादशी का मुहूर्त ऐसा होता है, जिसमें उन नवयुगलों की शादी भी की जा सकती है, जिनके लिए साल भर शादी का मुहूर्त नहीं है। इस कारण बड़ी संख्या में शादियां हुईं। जिलेभर में 200 से अधिक नवयुगलों ने सात फेरे लिए। शाम होते ही बैंड बाजों की आवाज जगह जगह सुनाई देने लगीं। घोड़ी पर सजे दूल्हे और नाचते झूमते बराती दिखाई दे रहे थे। जमकर आतिशबाजी की जा रही थी।
शहर व आसपास के सभी गेस्ट हाउस आदि सजे हुए थे। शनिवार के दिन अधिकतर लोग सहालग के चलते व्यस्त दिखे। शहर में जगह-जगह जाम की स्थिति बनी रही। अगले 14 विशेष मुहूर्त वाले दिनों में ज्यादा भीड़ दिखाई देगी। दिसंबर की 13 तारीख से सूर्य अस्त हो जाएगा। इस कारण फिर मकर संक्रांति के बाद विवाह की शुरुआत होगी। संवाद
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देवोत्थान एकादशी के साथ ही मांगलिक कार्यों पर लगी रोक भी हट गई। शुक्रवार को सहालग के पहले दिन शहर में शादियों की धूम रही। जगह-जगह बैंड-बाजों की गूंज सुनाई दी। सड़कों पर नाचते बरातियों के साथ दूल्हे राजा घोड़ी पर चढ़कर दुल्हन लाने के लिए जाते दिखाई दिए। पहले दिन सैकड़ों की संख्या में नवयुगल दांपत्य सूत्र में बंधे। विवाह स्थल दुल्हन की तरह सजे नजर आए। बरातों की चढ़त से सड़कों पर जाम की स्थिति रही। रोडवेज बसों और ट्रेनों में भी जबर्दस्त भीड़ नजर आई।
देवों के शयन के साथ पिछले चार महीने से मांगलिक कार्यों पर विराम लगा हुआ था। देवोत्थान एकादशी का मुहूर्त ऐसा होता है, जिसमें उन नवयुगलों की शादी भी की जा सकती है, जिनके लिए साल भर शादी का मुहूर्त नहीं है। इस कारण बड़ी संख्या में शादियां हुईं। जिलेभर में 200 से अधिक नवयुगलों ने सात फेरे लिए। शाम होते ही बैंड बाजों की आवाज जगह जगह सुनाई देने लगीं। घोड़ी पर सजे दूल्हे और नाचते झूमते बराती दिखाई दे रहे थे। जमकर आतिशबाजी की जा रही थी।
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शहर व आसपास के सभी गेस्ट हाउस आदि सजे हुए थे। शनिवार के दिन अधिकतर लोग सहालग के चलते व्यस्त दिखे। शहर में जगह-जगह जाम की स्थिति बनी रही। अगले 14 विशेष मुहूर्त वाले दिनों में ज्यादा भीड़ दिखाई देगी। दिसंबर की 13 तारीख से सूर्य अस्त हो जाएगा। इस कारण फिर मकर संक्रांति के बाद विवाह की शुरुआत होगी। संवाद
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