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हाथरस : कहीं मोदी और योगी भारी तो कहीं महंगाई-बेरोजगारी रहे मुद्दे

Mon, 21 Feb 2022 12:53 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 21 Feb 2022 12:53 AM IST
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Hathras: Somewhere Modi and Yogi are heavy and inflation-unemployment issues
हाथरस : सुरजोबाई बालिका इंटर कॉलेज मतदान केंद्र पर मतदाताओं की लगी लाइन। संवाद - फोटो : HATHRAS
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों ने ऐन वक्त तक अपनी रणनीति के आधार पर चुनाव मांगे। भाजपा ने जहां हिदुत्व के आधार पर जीत के लिए पूरा जोर लगाया तो वहीं सपा और बसपा ने जातीय समीकरणों के हिसाब से विजय पाने का भरसक प्रयास किया। भाजपा ने जहां सुरक्षा और विकास को मुख्य मुद्दा बनाया तो विपक्षी दलों ने महंगाई और बेरोजगारी को मुद्दा बनाकर सरकार को घेरा और भाजपा को वोट न देने की अपील की। मतदान अब पूरा हो चुका है और अब सभी को 10 मार्च को मतगणना होने का इंतजार है। वैसे कुछ दलों को उनका परंपरागत वोट बड़ी संख्या में मिला तो कुछ का वोट छिटक भी गया।
रविवार को तीसरे चरण में हाथरस जिले की तीनों सीटों पर भी मतदान था। पोलिंग बूथों पर मतदाताओं की लंबी लाइनें लगी रहीं। काफी मतदाताओं ने योगी और मोदी के नाम पर वोट दिया। हिंदुत्व के नाम पर भी वोटरों ने मतदान किया। दूसरी ओर बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी की वजह से वोटर ने भाजपा की अपेक्षा सपा और बसपा को वोट दिया। कुछ मतदाताओं ने प्रत्याशी की जाति के नाम पर वोट किया। रघनियां के सुशील उपाध्याय ने बताया कि वह अपना वोट मोदी-योगी के नाम पर दे रहे हैं। रघ्जनहित में भाजपा की छवि को ध्यान में रखकर वोट दिया है। वहीं विवेकानंद नगर के रहने वाले विशेष शर्मा ने बताया कि भाजपा ने महंगाई और बेरोजगारी बढ़ा दी है, इसलिए परिवर्तन जरूरी है।
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उम्मीदवार के विरोध का जनता पर असर नहीं
हाथरस। हाथरस विधानसभा क्षेत्र से वर्तमान विधायक हरीशंकर माहौर की जगह भाजपा ने अंजुला माहौर को टिकट दिया। शुरू में भाजपा में स्थानीय नेताओं ने अंजुला माहौर के बाहरी होने का आरोप लगाकर खूब विरोध किया, लेकिन मतदान के दौरान इसका कोई असर नहीं दिखा। भाजपा का परंपरागत वोट पार्टी को खूब मिला। लोग मोदी-योगी और योजनाओं के नाम पर भाजपा के पक्ष में वोट करने की कहते-सुनते दिखाई दिए। संवाद
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कहीं ध्रुवीकरण तो कहीं जातीय समीकरणों का दिखा असर
हाथरस। गांव-देहात में इन घोषणाओं का कोई खास असर नजर नहीं आया। कहीं ध्रुवीकरण तो कहीं जातीय समीकरणों का असर मतदान के दौरान दिखाई दिया। इसी को लेकर जीत-हार के कयास लगाए जाते रहे। सपा ने अपने घोषणा पत्र में गरीबों को एक लीटर मुफ्त पेट्रोल, 300 यूनिट मुफ्त बिजली, किसानों को ब्याजमुक्त ऋण, सांड़ के हमले से मरने वालों को मुआवजा जैसे जनमानस से जुड़े वादे किए। कांग्रेस ने किसानों की कर्जा माफी, बिजली बिल आधा करने, लड़कियों को स्कूटी व स्मार्टफोन देने, हर तीन साल में दो गैस सिलिंडर मुफ्त देने जैसे वादे किए थे। ग्रामीण अंचल में इन घोषणाओं का असर नजर आया। संवाद
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