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हाथरस: पितृपक्ष पर कोरोना का साया, एक ब्राह्मण को ही बुलाकर कराएं भोजन
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हाथरस: सीपूजी महाराज।
- फोटो : HATHRAS
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
कोरोना महामारी का असर पितृपक्ष पर भी पड़ेगा। श्राद्ध पक्ष में ज्यादातर लोग कई ब्राह्मणों को बुलाकर भोजन कराते हैं और फिर दक्षिणा देते हैं। धार्मिक विद्वानों का कहना है कि इस बार केवल एक ब्राह्मण को बुलाया जाए या फिर ब्राह्मण के घर पर ही कच्चा राशन भिजवाएं। शहर के विद्वानों ने इस तरह की लोगों से अपील करते हुए गाइड लाइन का पालन करने की अपील की है।
उल्लेखनीय है कि श्राद्ध पक्ष दो सितंबर से शुरू हो रहे हैं। लोग अपने पूर्वजों का श्राद्ध करते हैं। जिनकी तिथि याद नहीं होती है, उनका अंतिम दिन यानि अमावस्या को श्राद्ध किया जाता है। शहर के विद्वानों का मनाना है कि वह एक ब्राह्मण का बुलाकर ही भोजन कराएं, ताकि सोशल डिस्टेंसिंग का पूरी तरह पालन हो सके।
पकवानों की बजाय दूध, फल ग्रहण करें ब्राह्मण
शहर के विद्वानों का कहना है कि कोरोना की वजह से ब्राह्मणों को सफाई और सोशल डिस्टेंसिंग का विशेष ध्यान रखना होगा, इसलिए ब्राह्मण दूध व फल ग्रहण करें। इससे यजमान को भी कोई आपत्ति नहीं होगी। विद्वानों का कहना है ब्राह्मण अपने को सुरक्षित रखें। बाकी कार्यक्रम हर साल की तरह ही होंगे।
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श्राद्ध खंड में ऐसा लिखा है कि श्राद्ध को विस्तार से नहीं करना चाहिए। भोजन बनाकर एक ब्राह्मण को कराएं या फिर गाय को दें। इसके अलावा कच्चा राशन तिथि वाले दिन ब्राह्मण को दें। इसके अलावा दक्षिण दिशा की ओर दो आंसू डाल दें। उसी से पूर्वज खुश हो जाते हैं।
-आचार्य बल्लभ जी महाराज
ब्राह्मण को तिथि वाले दिन सूखा राशन दें। पितृ तर्पण कर पूर्वजों से प्रार्थना कर लें। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते यदि जरूरी हो तो एक ब्राह्मण को भोजन कराएं। इस समय कोरोना काल चल रहा है। सरकार की गाइडलाइन का अनिवार्य रूप से पालन करें।
-सीपूजी महाराज।
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कोरोना महामारी का असर पितृपक्ष पर भी पड़ेगा। श्राद्ध पक्ष में ज्यादातर लोग कई ब्राह्मणों को बुलाकर भोजन कराते हैं और फिर दक्षिणा देते हैं। धार्मिक विद्वानों का कहना है कि इस बार केवल एक ब्राह्मण को बुलाया जाए या फिर ब्राह्मण के घर पर ही कच्चा राशन भिजवाएं। शहर के विद्वानों ने इस तरह की लोगों से अपील करते हुए गाइड लाइन का पालन करने की अपील की है।
उल्लेखनीय है कि श्राद्ध पक्ष दो सितंबर से शुरू हो रहे हैं। लोग अपने पूर्वजों का श्राद्ध करते हैं। जिनकी तिथि याद नहीं होती है, उनका अंतिम दिन यानि अमावस्या को श्राद्ध किया जाता है। शहर के विद्वानों का मनाना है कि वह एक ब्राह्मण का बुलाकर ही भोजन कराएं, ताकि सोशल डिस्टेंसिंग का पूरी तरह पालन हो सके।
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पकवानों की बजाय दूध, फल ग्रहण करें ब्राह्मण
शहर के विद्वानों का कहना है कि कोरोना की वजह से ब्राह्मणों को सफाई और सोशल डिस्टेंसिंग का विशेष ध्यान रखना होगा, इसलिए ब्राह्मण दूध व फल ग्रहण करें। इससे यजमान को भी कोई आपत्ति नहीं होगी। विद्वानों का कहना है ब्राह्मण अपने को सुरक्षित रखें। बाकी कार्यक्रम हर साल की तरह ही होंगे।
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श्राद्ध खंड में ऐसा लिखा है कि श्राद्ध को विस्तार से नहीं करना चाहिए। भोजन बनाकर एक ब्राह्मण को कराएं या फिर गाय को दें। इसके अलावा कच्चा राशन तिथि वाले दिन ब्राह्मण को दें। इसके अलावा दक्षिण दिशा की ओर दो आंसू डाल दें। उसी से पूर्वज खुश हो जाते हैं।
-आचार्य बल्लभ जी महाराज
ब्राह्मण को तिथि वाले दिन सूखा राशन दें। पितृ तर्पण कर पूर्वजों से प्रार्थना कर लें। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते यदि जरूरी हो तो एक ब्राह्मण को भोजन कराएं। इस समय कोरोना काल चल रहा है। सरकार की गाइडलाइन का अनिवार्य रूप से पालन करें।
-सीपूजी महाराज।

हाथरस: बल्लभ जी महाराज।- फोटो : HATHRAS