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हाथरस : बिना शीशे के दौड़ रहीं रोडवेज बसें, लू के थपेड़े झेल रहे यात्री
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हाथरस : रोडवेज बस का टूटा शीशा। संवाद
- फोटो : HATHRAS
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हाथरस डिपो में बसों का रखरखाव भगवान भरोसे हैं। खास बात यह है कि बसों में शीशे तक नहीं है। इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। बिना शीशे की बस में सफर के दौरान यात्री लू के थपेड़े खा रहे हैं। इस पर डिपो के अधिकारियों का ध्यान नहीं है।
उल्लेखनीय है कि हाथरस डिपो में वर्तमान में 77 बसें हैं। इनमें कई बसें निर्धारित किलोमीटर पूरे करने के साथ समय अवधि भी पूरी कर चुकी हैं। आमदनी के ग्राफ को बढ़ाने के लिए बसों का संचालन किया जा रहा है। आए-दिन बसें बीच रास्ते में यात्रियो का साथ छोड़ देती हैं।
रविवार को ग्रामीण अंचल में चलने वाली बस में पीछे का शीशा ही नही था। बस यात्रियों के साथ गंतव्य की दूरी तय कर रही है। बस में सवार यात्री लू के थपेड़ों के सहारे सफर करते हुए नजर आए। इससे डिपो के अधिकारी अनजान बने रहे। संवाद
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हाथरस डिपो में बसों का रखरखाव भगवान भरोसे हैं। खास बात यह है कि बसों में शीशे तक नहीं है। इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। बिना शीशे की बस में सफर के दौरान यात्री लू के थपेड़े खा रहे हैं। इस पर डिपो के अधिकारियों का ध्यान नहीं है।
उल्लेखनीय है कि हाथरस डिपो में वर्तमान में 77 बसें हैं। इनमें कई बसें निर्धारित किलोमीटर पूरे करने के साथ समय अवधि भी पूरी कर चुकी हैं। आमदनी के ग्राफ को बढ़ाने के लिए बसों का संचालन किया जा रहा है। आए-दिन बसें बीच रास्ते में यात्रियो का साथ छोड़ देती हैं।
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रविवार को ग्रामीण अंचल में चलने वाली बस में पीछे का शीशा ही नही था। बस यात्रियों के साथ गंतव्य की दूरी तय कर रही है। बस में सवार यात्री लू के थपेड़ों के सहारे सफर करते हुए नजर आए। इससे डिपो के अधिकारी अनजान बने रहे। संवाद
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