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हाथरस : महाशिवरात्रि पर दुर्लभ पंच योग होगा विशेष फलदायी
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। इस बार यह पर्व एक मार्च को है। पंच योग, चतुर्दशी, मंगलवार, धनिष्ठा नक्षत्र और शिवयोग का दुर्लभ संयोग होने से आचार्य इसे विशेष फलदायी बता रहे हैं। ज्योतिषाचार्य इसे चुनावी बेला से जोड़कर भी देख रहे हैं। शिव योग को जीत के लिए विशेष बता रहे हैं।
आचार्य सुरेंद्रनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि एक मार्च को महाशिवरात्रि के मौके पर मंगलवार, धनिष्ठा नक्षत्र व शिव योग की युति बन रही है। यह महादुर्लभ संयोग विगत कई वर्षों से प्राप्त नहीं हुआ है। शिव पुराण के मुताबिक इस दिन पूजन-अर्चना करने से सभी कामनाओं पूरी होती है। यह संयोग प्रत्येक कार्य में जीत दिलाने वाला है। भगवान शंकर के नाम से पूजन प्रतिद्वंद्वी को मात देने वाला होगा।
पांच ग्रहों की पुनरावृत्ति भी
हाथरस। आचार्य वल्लभ जी महाराज ने बताया कि शिवरात्रि पर पांच ग्रहों की पुनरावृत्ति भी होगी। मकर राशि में पंच ग्रही योग रहेगा। मंगल, शुक्र और बुध और शनि के साथ चंद्र हैं। कुंभ राशि में सूर्य और गुरु की युति रहेगी। राहु वृषभ में और केतु वृश्चिक राशि में रहेगा। संवाद
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चार प्रहर की पूजा का समय
हाथरस। विद्वानों का कहना है कि शिवरात्रि एक मार्च को सुबह तीन बजकर 20 मिनट से शुरू होगी। चार प्रहर का समय शाम को शुरू होगा। प्रथम प्रहर शाम सात बजकर 10 मिनट से, द्वितीय प्रहर रात नौ बजकर 15 मिनट से, तीसरा प्रहर मध्य रात्रि 12 बजे से चौथ प्रहर तीन बजकर 25 मिनट से शुरू होगा। निशिथ काल पूजा का समय रात 11 बजकर 55 मिनट से 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। संवाद
इस तरह करें पूजा
विद्वानों ने बताया कि काले तिलों से शिवलिंग को स्नान कराने के बाद रात्रि में विधिवत शिव पूजन करना चाहिए। शिवजी को सबसे प्रिय पुष्प कनेर, बेलपत्र, तुलसी, मंजरी, और मौलसरी अर्पित करने चाहिए। पका आम चढ़ाने से विशेष फल प्राप्त होता है। शिवलिंग पर चढ़ाया गया पुष्प फल और जल ग्रहण नहीं करना चाहिए। संवाद
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महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। इस बार यह पर्व एक मार्च को है। पंच योग, चतुर्दशी, मंगलवार, धनिष्ठा नक्षत्र और शिवयोग का दुर्लभ संयोग होने से आचार्य इसे विशेष फलदायी बता रहे हैं। ज्योतिषाचार्य इसे चुनावी बेला से जोड़कर भी देख रहे हैं। शिव योग को जीत के लिए विशेष बता रहे हैं।
आचार्य सुरेंद्रनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि एक मार्च को महाशिवरात्रि के मौके पर मंगलवार, धनिष्ठा नक्षत्र व शिव योग की युति बन रही है। यह महादुर्लभ संयोग विगत कई वर्षों से प्राप्त नहीं हुआ है। शिव पुराण के मुताबिक इस दिन पूजन-अर्चना करने से सभी कामनाओं पूरी होती है। यह संयोग प्रत्येक कार्य में जीत दिलाने वाला है। भगवान शंकर के नाम से पूजन प्रतिद्वंद्वी को मात देने वाला होगा।
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पांच ग्रहों की पुनरावृत्ति भी
हाथरस। आचार्य वल्लभ जी महाराज ने बताया कि शिवरात्रि पर पांच ग्रहों की पुनरावृत्ति भी होगी। मकर राशि में पंच ग्रही योग रहेगा। मंगल, शुक्र और बुध और शनि के साथ चंद्र हैं। कुंभ राशि में सूर्य और गुरु की युति रहेगी। राहु वृषभ में और केतु वृश्चिक राशि में रहेगा। संवाद
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चार प्रहर की पूजा का समय
हाथरस। विद्वानों का कहना है कि शिवरात्रि एक मार्च को सुबह तीन बजकर 20 मिनट से शुरू होगी। चार प्रहर का समय शाम को शुरू होगा। प्रथम प्रहर शाम सात बजकर 10 मिनट से, द्वितीय प्रहर रात नौ बजकर 15 मिनट से, तीसरा प्रहर मध्य रात्रि 12 बजे से चौथ प्रहर तीन बजकर 25 मिनट से शुरू होगा। निशिथ काल पूजा का समय रात 11 बजकर 55 मिनट से 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। संवाद
इस तरह करें पूजा
विद्वानों ने बताया कि काले तिलों से शिवलिंग को स्नान कराने के बाद रात्रि में विधिवत शिव पूजन करना चाहिए। शिवजी को सबसे प्रिय पुष्प कनेर, बेलपत्र, तुलसी, मंजरी, और मौलसरी अर्पित करने चाहिए। पका आम चढ़ाने से विशेष फल प्राप्त होता है। शिवलिंग पर चढ़ाया गया पुष्प फल और जल ग्रहण नहीं करना चाहिए। संवाद