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Hathras News: प्लॉट बने पोखर... मलिन बस्तियों में आफत बनी बारिश, मंडराया डेंगू-मलेरिया का खतरा

Tue, 08 Sep 2026 02:45 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस Updated Tue, 08 Sep 2026 02:45 AM IST
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Plots turn into ponds
शहर के मोहल्ला श्रीनगर नई बस्ती में खाली प्लाट में जलभराव।संवाद - फोटो : samvad
शहर के चमकदार मुख्य चौराहों से महज कुछ मीटर की दूरी पर बसी मलिन बस्तियों में इस वक्त जिंदगी बदहाली के घूंट पी रही है। बारिश बंद हुए भले ही समय बीत गया हो, लेकिन इन बस्तियों के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। खाली पड़े प्लॉट, गहरे गड्ढे और मोहल्ले की पोखरें अब जलभराव के कारण बीमारी के जलजले में तब्दील हो चुके हैं।
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खाली प्लॉट बने मच्छर जनन केंद्र
रमनपुर नई बस्ती में सड़ांध मारती हवा और भिनभिनाते मच्छरों के झुंड शरहवासियों को परेशान कर रहीं हैं। स्थानीय निवासियों के मुताबिक, खाली पड़े प्लॉटों में हफ्तों से बारिश का पानी रुका हुआ है। पानी का रंग हरा और काला पड़ चुका है और उस पर पनपते मक्खी व मच्छर साफ देखे जा सकते हैं। शाम ढलते ही स्थिति इतनी भयावह हो जाती हैं कि लोग घरों के दरवाजे बंद करने को मजबूर हैं। यह हालत श्रीनगर व कैलाश नगर के कुछ क्षेत्रों की है।
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पोखरों में तैरती गंदगी, दावों की हवा निकली
बस्तियों के बीच स्थित पोखरें (तालाब) जो कभी जल निकासी का जरिया हुआ करते थे, आज कचरे के ढेर और ठहरे हुए गंदे पानी से लबालब हैं। नगर पालिका परिषद हाथरस और स्थानीय प्रशासन के जल निकासी व नियमित सफाई के तमाम दावे इन बस्तियों की चौखट पर दम तोड़ते नजर आ रहे हैं।
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35 प्रतिशत मरीज इन इलाकों में
खाली प्लॉटों में जलभराव की समस्या सबसे अधिक रमनपुर नई बस्ती, श्रीनगर नई बस्ती, कैलाश नगर, लाला का नगला व नाई का नगला के पिछले इलाके, करबला-कोटा रोड, खोंडा हजारी व नगला अलगर्जी रोड आदि क्षेत्रों में है। जिला अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार 35 प्रतिशत मरीज इन्हीं इलाकों के हैं। इन इलाकों में तेज बुखार, उल्टी व शरीर पर चकत्ते पड़ने के मामले सामने आ रहे हैं। रोजना 400 से 500 लोग गंदगी में रहने के कारण बीमार पड़ रहे हैं।



लोगों की पीढ़ा
इंटरलॉकिंग सड़क बन चुकी है। सीवर लाइन भी डली हुई है, जो चालू है। पर नाली के पानी की निकासी नहीं है। इसी कारण हमारे सामने के प्लॉटों में हर समय पानी भरा रहता है। मकान के बगल व पीछे भी यही स्थिति है। कई दिन से मैं बुखार से पीड़ित हूं। - नित्यानंद, रमनपुर नई बस्ती

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प्रशासनिक अमला सिर्फ मुख्य सड़कों पर फॉगिंग और दवा का छिड़काव करके इतिश्री कर लेता है। हमारी बस्तियों में न तो आज तक एंटी-लार्वा का छिड़काव हुआ है और न ही चूना डाला गया है। - दिलीप, रमनपुर




यह जगह कभी ईंट भट्टा की रही है। इसलिए आसपास के क्षेत्र से जमीन गड्ढे में है। अब यहां बस्ती बस गयी है। प्लॉट पांच-पांच फुट नीचे हैं, जिनमें पानी भरा हुआ है। गलियों के मार्ग पानी में डूब गए हैं। - पंकज, श्रीनगर नई बस्ती



सालों से गंदे पानी के बीच नारकीय जीवन जी रह रहे हैं। यहां जमीन से मिल रहे पीने के पानी की शुद्धता की गारंटी नहीं। बस्ती के लोग सरकारी नलों पर निर्भर हैं। मोहल्ले में ही चार लोगों को बुखार की शिकायत है।

हरिओम शर्मा, कैलाश नगर



इनका कहना है
संचारी रोग अभियान के दौरान सफाई करायी गई थी तथा फॉगिंग भी हुई थी। आम दिनों में भी सड़कों व नालियों की सफाई कराई जाती है। रमनपुर व श्रीनगर के पीछे के इलाकों में प्लाॅट काफी नीचे हैं, जहां पानी भर जाता है। सार्वजनिक जगहों से पंप लगाकर पानी निकाला जाता है। - रोहित सिंह, ईओ, नगर पालिका परिषद हाथरस
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