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हाथरस : भाजपा में शामिल हुए रामवीर उपाध्याय
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सादाबाद विधायक रामवीर उपाध्याय के भाजपा में सम्मिलित होने पर जिपं अध्यक्ष सीमा उपाध्याय को गुलद
- फोटो : SADABAD
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संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
प्रदेश के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय ने शनिवार को आगरा में अपने निवास पर भाजपा की सदस्यता ले ली है। विधानसभा चुनाव के मौके पर रामवीर को पार्टी में शामिल कर भाजपा ने एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश की है। पार्टी के रणनीतिकार मान रहे हैं कि इससे सादाबाद सीट पर पार्टी की जीत की राह आसान हो जाएगी।
साथ ही रामवीर के प्रभाव का इस्तेमाल वह हाथरस सहित आसपास के कई जिलों की सीटों पर जीत हासिल कर सकेगी। जिस तरह से हाल में ही भाजपा के कई मंत्री व विधायक पार्टी से बगावत कर सपा में शामिल हुए हैं, ऐसे में रामवीर को अपनी पार्टी में शामिल कर भाजपा आलाकमान ने उन लोगों को अपनी ताकत का अहसास कराया है।
पार्टी के रणनीतिकार यह भी मान रहे हैं कि जिस तरह से विरोधी उस पर ब्राह्मण विरोधी होने का आरोप लगाते रहे हैं, ऐसे में प्रदेश में एक बड़ा ब्राह्मण नेता पार्टी में शा मिल कर वह ब्राह्मण समाज के वोटरों को साध सकेगी। पूर्व मंत्री व सादाबाद विधायक रामवीर उपाध्याय को शनिवार को आगरा में उनके निवास पर भाजपा के ब्रज क्षेत्र के अध्यक्ष रजनीकांत माहेश्वरी ने सदस्यता दिलाई।
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रामवीर उपाध्याय के समर्थकों को डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा ने लाइव संबोधित भी किया। रामवीर उपाध्याय को भाजपा में लाने की कसरत काफी महीने से चल रही थी लेकिन उनका खराब स्वास्थ्य इसमें आड़े आ रहा था। हालांकि अभी भी वह पूरी तरह से स्वस्थ नहीं हैं लेकिन परिजनों का कहना है कि उनके स्वास्थ्य में लगातार सुधार हो रहा है। वैसे उनका परिवार पहले ही भाजपा में शा मिल हो चुका है।
रामवीर की गिनती प्रदेश के कद्दावर नेताओं में होती है। वह हाथरस की तीनों सीटों से पांच बार विधायक रहे हैं। वह पिछला चुनाव सादाबाद सीट से बसपा से जीते थे। उनकी पत्नी सीमा उपाध्याय अभी भी भाजपा के समर्थन से जिला पंचायत अध्यक्ष हैं। वह वर्ष 2009 में फतेहपुर सीकरी से बसपा से सांसद भी रह चुकी हैं।
रामवीर उपाध्याय के भाई मुकुल उपाध्याय भी बसपा से विधायक और एमलसी रह चुके हैं। उनके दूसरे भाई विनोद उपाध्याय भी जिला पंचायत अध्यक्ष रहे हैं। उनके छोटे भाई रामेश्वर उपाध्यय अभी भी मुरसान से ब्लॉक प्रमुख हैं। ऐसे में रामवीर उपाध्याय की गिनती प्रदेश के बड़े कद्दावर नेताओं में होती है और उन्हें प्रदेश में ब्राह्मणों में बड़ा राजनीतिक चेहरा माना जाता है। अब बसपा से अपना 25 साल पुराना नाता तोड़कर रामवीर भी भाजपा में शामिल हो गए है।
राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी हैं रामवीर
रामवीर राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी हैं। उन्होंने पिछली बार भाजपा की सुनामी में भी सादाबाद की सीट बसपा की झोली में डाल दी थी। ऐसे में भाजपा यह मान रही है कि सादाबाद सीट तो अब रामवीर के सहारे वह आसानी से जीत जाएगी। पिछली बार भाजपा यहां मुख्य मुकाबले में भी नहीं थी।
साथ ही वह रामवीर के प्रभाव का इस्तेमाल हाथरस, आगरा, अलीगढ़ सहित आसपास की सीटों पर भी करना चाह रही है। पार्टी का मानना है कि रामवीर के भाजपा में शामिल होने से उसकी पूरे इलाके में और पकड़ मजबूत होगी। वहीं जिस तरह से भाजपा में बगावत के सुर उठ रहे हैं और कई मंत्रियों व विधायकों ने पार्टी छोड़ दी है।
ऐसे में पार्टी ने रामवीर उपाध्याय को भाजपा में शामिल कर डैमेज कंट्रोल का प्रयास किया है और बागियों को अपनी ताकत का अहसास कराया है। सबसे अहम बात यह भी है कि भाजपा के विरोधी दल लगातार पार्टी पर ब्राह्मण विरोधी होने का आरोप लगा रहे हैं। कई उदाहरण भी इसे लेकर प्रस्तुत कर रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक अब भाजपा के रणनीतिकार मान रहे हैं कि रामवीर के सहारे उन्हें इस क्षेत्र में ब्राह्मण मतदाताओं को साधने में मदद मिलेगी और यदि ब्राह्मण समाज की कोई नाराजगी पार्टी से है भी तो वह भी शांत हो सकेगी।
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प्रदेश के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय ने शनिवार को आगरा में अपने निवास पर भाजपा की सदस्यता ले ली है। विधानसभा चुनाव के मौके पर रामवीर को पार्टी में शामिल कर भाजपा ने एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश की है। पार्टी के रणनीतिकार मान रहे हैं कि इससे सादाबाद सीट पर पार्टी की जीत की राह आसान हो जाएगी।
साथ ही रामवीर के प्रभाव का इस्तेमाल वह हाथरस सहित आसपास के कई जिलों की सीटों पर जीत हासिल कर सकेगी। जिस तरह से हाल में ही भाजपा के कई मंत्री व विधायक पार्टी से बगावत कर सपा में शामिल हुए हैं, ऐसे में रामवीर को अपनी पार्टी में शामिल कर भाजपा आलाकमान ने उन लोगों को अपनी ताकत का अहसास कराया है।
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पार्टी के रणनीतिकार यह भी मान रहे हैं कि जिस तरह से विरोधी उस पर ब्राह्मण विरोधी होने का आरोप लगाते रहे हैं, ऐसे में प्रदेश में एक बड़ा ब्राह्मण नेता पार्टी में शा मिल कर वह ब्राह्मण समाज के वोटरों को साध सकेगी। पूर्व मंत्री व सादाबाद विधायक रामवीर उपाध्याय को शनिवार को आगरा में उनके निवास पर भाजपा के ब्रज क्षेत्र के अध्यक्ष रजनीकांत माहेश्वरी ने सदस्यता दिलाई।
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रामवीर उपाध्याय के समर्थकों को डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा ने लाइव संबोधित भी किया। रामवीर उपाध्याय को भाजपा में लाने की कसरत काफी महीने से चल रही थी लेकिन उनका खराब स्वास्थ्य इसमें आड़े आ रहा था। हालांकि अभी भी वह पूरी तरह से स्वस्थ नहीं हैं लेकिन परिजनों का कहना है कि उनके स्वास्थ्य में लगातार सुधार हो रहा है। वैसे उनका परिवार पहले ही भाजपा में शा मिल हो चुका है।
रामवीर की गिनती प्रदेश के कद्दावर नेताओं में होती है। वह हाथरस की तीनों सीटों से पांच बार विधायक रहे हैं। वह पिछला चुनाव सादाबाद सीट से बसपा से जीते थे। उनकी पत्नी सीमा उपाध्याय अभी भी भाजपा के समर्थन से जिला पंचायत अध्यक्ष हैं। वह वर्ष 2009 में फतेहपुर सीकरी से बसपा से सांसद भी रह चुकी हैं।
रामवीर उपाध्याय के भाई मुकुल उपाध्याय भी बसपा से विधायक और एमलसी रह चुके हैं। उनके दूसरे भाई विनोद उपाध्याय भी जिला पंचायत अध्यक्ष रहे हैं। उनके छोटे भाई रामेश्वर उपाध्यय अभी भी मुरसान से ब्लॉक प्रमुख हैं। ऐसे में रामवीर उपाध्याय की गिनती प्रदेश के बड़े कद्दावर नेताओं में होती है और उन्हें प्रदेश में ब्राह्मणों में बड़ा राजनीतिक चेहरा माना जाता है। अब बसपा से अपना 25 साल पुराना नाता तोड़कर रामवीर भी भाजपा में शामिल हो गए है।
राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी हैं रामवीर
रामवीर राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी हैं। उन्होंने पिछली बार भाजपा की सुनामी में भी सादाबाद की सीट बसपा की झोली में डाल दी थी। ऐसे में भाजपा यह मान रही है कि सादाबाद सीट तो अब रामवीर के सहारे वह आसानी से जीत जाएगी। पिछली बार भाजपा यहां मुख्य मुकाबले में भी नहीं थी।
साथ ही वह रामवीर के प्रभाव का इस्तेमाल हाथरस, आगरा, अलीगढ़ सहित आसपास की सीटों पर भी करना चाह रही है। पार्टी का मानना है कि रामवीर के भाजपा में शामिल होने से उसकी पूरे इलाके में और पकड़ मजबूत होगी। वहीं जिस तरह से भाजपा में बगावत के सुर उठ रहे हैं और कई मंत्रियों व विधायकों ने पार्टी छोड़ दी है।
ऐसे में पार्टी ने रामवीर उपाध्याय को भाजपा में शामिल कर डैमेज कंट्रोल का प्रयास किया है और बागियों को अपनी ताकत का अहसास कराया है। सबसे अहम बात यह भी है कि भाजपा के विरोधी दल लगातार पार्टी पर ब्राह्मण विरोधी होने का आरोप लगा रहे हैं। कई उदाहरण भी इसे लेकर प्रस्तुत कर रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक अब भाजपा के रणनीतिकार मान रहे हैं कि रामवीर के सहारे उन्हें इस क्षेत्र में ब्राह्मण मतदाताओं को साधने में मदद मिलेगी और यदि ब्राह्मण समाज की कोई नाराजगी पार्टी से है भी तो वह भी शांत हो सकेगी।