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हाथरस : बनने के बाद एक दिन भी नहीं खुला सार्वजनिक शौचालय
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हाथरस : ग्राम बहादुरपुर देवकरण में बंद पड़ा शौचालय। संवाद
- फोटो : SHAPHU
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहपऊ (हाथरस)
प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत ग्राम पंचायतों में बने सार्वजनिक शौचालय केवल शोपीस साबित हो रहे हैं। क्षेत्र की कुछेक पंचायतों को छोड़कर अधिकांश ग्राम पंचायतों में बने शौचालय बनने के बाद बंद ही पड़े हैं। पहले चली स्वच्छ भारत योजना के तहत हर परिवार में एक शौचालय बनवाया गया। इसके बाद गांव में होने वाली बैठक अथवा अन्य कार्यक्रमों में भाग लेने वाले लोगों को खुले में शौच जाने से रोकने के लिए दूसरे चरण में प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक सार्वजनिक शौचालय का निर्माण कराया गया।
जब इस योजना की घोषणा हुई तो उसके कुछ महीनों बाद ही त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की घोषणा होने वाली थी। इससे पहले ही प्रशासन ने धड़ाधड़ सार्वजनिक शौचालयों के टेंडर प्रकाशित कराकर उन पर काम करवाना शुरू कर दिया। हर ग्राम पंचायत के प्रधान एवं सचिव को चुनाव से पूर्व ही शौचालय का निर्माण कराने के लिए कहा गया। इसके तहत पंचायतों में शौचालय बनाए गए। चुनाव की घोषणा होते ही इनके निर्माण में लापरवाही सामने आने लगी।
परिणाम यह हुआ कि कई ग्राम पंचायतों में शौचालय का निर्माण अधूरा रह गया और अधिकतर गांवों में अभी तक शौचालयों की सफाई के लिए कर्मचारी की नियुक्ति भी नहीं हो सकी। निर्माण पूर्ण होने के बाद ग्राम प्रधान एवं पंचायत सचिवों ने नियमानुसार इन शौचालयों को गांव में बने समूह को सौंप दिया। अब इन शौचालयों की साफ-सफाई एवं रखरखाव और मरम्मत का जिम्मा इन समूहों का ही है। समूह ही इन शौचालयों पर सफाई कर्मी रखेंगे और शौच आदि करने आने वालों की संख्या का रिकॉर्ड रखेंगे। संवाद
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गांव में सार्वजनिक शौचालय को बने एक साल से अधिक समय हो गया है। पहले तो इसके बनने में ही अड़चन आ गई थी। पहले ठेकेदार ने इसके निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग किया था। शिकायत होने पर वह इसे पूरा करने से पहले ही छोड़कर भाग गया। इसके बाद दूसरे ठेकेेदार ने इसे तैयार करवाया। बनने के बाद से ही यह बंद है। किसी भी सफाई कर्मचारी की भी नियुक्ति नहीं हुई है।
-सूरज कुमार
शौचालय तो बन गया, लेकिन इसमें अभी तक किसी भी सफाई कर्मचारी की नियुक्ति नहीं हुई है। एक साल से अधिक समय से यह बंद ही है। पंचायत सचिव एवं प्रधान ने किस समूह को इसे सौंपा है, इसकी भी कोई जानकारी नहीं है। इस शौचालय को बने हुए एक साल से अधिक समय हो गया है। इसमें शौच करना तो दूर की बात है, हमने तो कभी इसे खुले हुए ही नहीं देखा है।
- मंगलेश यादव
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प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत ग्राम पंचायतों में बने सार्वजनिक शौचालय केवल शोपीस साबित हो रहे हैं। क्षेत्र की कुछेक पंचायतों को छोड़कर अधिकांश ग्राम पंचायतों में बने शौचालय बनने के बाद बंद ही पड़े हैं। पहले चली स्वच्छ भारत योजना के तहत हर परिवार में एक शौचालय बनवाया गया। इसके बाद गांव में होने वाली बैठक अथवा अन्य कार्यक्रमों में भाग लेने वाले लोगों को खुले में शौच जाने से रोकने के लिए दूसरे चरण में प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक सार्वजनिक शौचालय का निर्माण कराया गया।
जब इस योजना की घोषणा हुई तो उसके कुछ महीनों बाद ही त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की घोषणा होने वाली थी। इससे पहले ही प्रशासन ने धड़ाधड़ सार्वजनिक शौचालयों के टेंडर प्रकाशित कराकर उन पर काम करवाना शुरू कर दिया। हर ग्राम पंचायत के प्रधान एवं सचिव को चुनाव से पूर्व ही शौचालय का निर्माण कराने के लिए कहा गया। इसके तहत पंचायतों में शौचालय बनाए गए। चुनाव की घोषणा होते ही इनके निर्माण में लापरवाही सामने आने लगी।
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परिणाम यह हुआ कि कई ग्राम पंचायतों में शौचालय का निर्माण अधूरा रह गया और अधिकतर गांवों में अभी तक शौचालयों की सफाई के लिए कर्मचारी की नियुक्ति भी नहीं हो सकी। निर्माण पूर्ण होने के बाद ग्राम प्रधान एवं पंचायत सचिवों ने नियमानुसार इन शौचालयों को गांव में बने समूह को सौंप दिया। अब इन शौचालयों की साफ-सफाई एवं रखरखाव और मरम्मत का जिम्मा इन समूहों का ही है। समूह ही इन शौचालयों पर सफाई कर्मी रखेंगे और शौच आदि करने आने वालों की संख्या का रिकॉर्ड रखेंगे। संवाद
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गांव में सार्वजनिक शौचालय को बने एक साल से अधिक समय हो गया है। पहले तो इसके बनने में ही अड़चन आ गई थी। पहले ठेकेदार ने इसके निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग किया था। शिकायत होने पर वह इसे पूरा करने से पहले ही छोड़कर भाग गया। इसके बाद दूसरे ठेकेेदार ने इसे तैयार करवाया। बनने के बाद से ही यह बंद है। किसी भी सफाई कर्मचारी की भी नियुक्ति नहीं हुई है।
-सूरज कुमार
शौचालय तो बन गया, लेकिन इसमें अभी तक किसी भी सफाई कर्मचारी की नियुक्ति नहीं हुई है। एक साल से अधिक समय से यह बंद ही है। पंचायत सचिव एवं प्रधान ने किस समूह को इसे सौंपा है, इसकी भी कोई जानकारी नहीं है। इस शौचालय को बने हुए एक साल से अधिक समय हो गया है। इसमें शौच करना तो दूर की बात है, हमने तो कभी इसे खुले हुए ही नहीं देखा है।
- मंगलेश यादव