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हाथरस : पीयूष के गांव के रास्ते बदहाल, खारे पानी की समस्या से जूझ रहे लोग

Fri, 06 Aug 2021 11:25 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 06 Aug 2021 11:25 PM IST
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Hathras: Piyush's way to the village is bad, people struggling with the problem of salt water
हाथरस : भारतीय पुरुष हॉकी टीम के कोच पीयूष दुबे के गांव रसमई से बरी चौराहे को जाने वाली मुख्य सड़क ? - फोटो : SADABAD
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अशोक वार्ष्णेय
भारतीय हॉकी टीम को टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जिताकर देश में सादाबाद तहसील और हाथरस जिले का नाम रोशन करने वाले भारतीय हॉकी टीम के कोच पीयूष दुबे तक के घर तक पहुंचने का रास्ता बदहाल है तो वहीं सादाबाद राया मार्ग पर बरी चौराहे से गांव रसमई नसीरपुर के लिए जाने वाली और तीन गांव को जोड़ने वाली मुख्य सड़क का भी हाल बेहाल है। पीयूष के घर तक जाने वाले करीब 900 मीटर के रास्ते पर पक्की सड़क तक नहीं है, मात्र ईंटों का खड़ंजा है, वो भी पिछले करीब 10 साल से ऊबड़-खाबड़ स्थिति में पड़ा है।
रास्ते में जगह-जगह जलभराव हो रहा है। यही हाल बरी चौराहे से गांव रसमई जाने वाली मुख्य सड़क है, जिसका निर्माण पिछले कई वर्षों से हुआ ही नहीं है। सड़क से निकली गिट्टी हादसे का सबब बनी हुई है। लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पूरे गांव का पानी खारा है।
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गांव में कहीं भी कोई मीठे पानी की सुविधा नहीं है। लोगों को शुद्ध पेयजल के लिए दूसरे गांव का रुख करना पड़ता है। गांव में कोई भी खेल का मैदान नहीं है, जिससे यहां की खेल प्रतिभाएं भी दम तोड़ रही हैं। कई बार यहां के ग्रामीण बदहाल रास्तों को लेकर अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन आज तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है। संवाद
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ये बोले ग्रामीण
-मेरे घर के सामने का रास्ता पिछले कई साल से बदहाल पड़ा है। पक्की सड़क तक नहीं है, ईंटों का खड़ंजा है, वो भी इतना खराब है कि आए-दिन लोग गिरकर घायल हो जाते हैं। रास्ते पर पानी भरने के बाद तो स्थिति और भी अधिक खराब हो जाती है। पूरे गांव में खारे पानी की समस्या है, लोग पेयजल के लिए काफी परेशान हैं।
-लखन दुबे, पीयूष दुबे के चाचा
- बरी चौराहे से लेकर रसमई गांव के अंदर आने वाली मुख्य सड़क का हाल बेहाल है। गिट्टियां निकल आई हैं। गांव में कोई खेल मैदान नहीं है। खारे पानी की वजह से लोगों को बाहर से पानी खरीदकर पीना पड़ता है। गांव में मीठे पानी की सुविधा तो होनी चाहिए।
-केंद्र प्रताप सिंह, ग्रामीण
- अगर गांव में खेल का मैदान हो तो पीयूष जैसे कई युवा अपनी प्रतिभा को तराश सकते हैं, लेकिन अफसोस की गांव में न तो खेल का मैदान है और न ही अच्छी सड़कें। पीयूष के घर तक का खड़ंजा भी पिछले कई वर्षों से खराब पड़ा है। शिकायत के बाद भी कोई ध्यान नहीं है।

-ललित गोपाल, ग्रामीण
- चूंकि पीयूष ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है तो उसके गांव का विकास भी होना चाहिए। गांव रसमई में कई मूलभूत सुविधाओं की कमी है। यहां खारे पानी, खराब सड़क की समस्या दूर होनी चाहिए।
-नरेंद्र सिंह, ग्रामीण
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