फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hathras News ›   Hathras: PHC itself ill, how will patients be treated here

हाथरस : पीएचसी खुद बीमार, यहां कैसे होगा मरीजों का उपचार

Thu, 21 Jul 2022 09:12 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 21 Jul 2022 09:12 PM IST
विज्ञापन
Hathras: PHC itself ill, how will patients be treated here
सीएचसी में कबाड़ में पड़े बेड। संवाद - फोटो : SADABAD
संवाद न्यूज एजेंसी, सादाबाद।
विज्ञापन

क्षेत्र के गांव मई स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) को खुद उपचार की जरूरत है। यहां आने वाले हर मर्ज से पीड़ित मरीजों के इलाज का पूरा दारोमदार एकमात्र चिकित्सक पर है। मरीजों और उनके तीमारदारों का कहना है कि यहां दवाएं तो मिल जाती हैं, लेकिन वह भी बेअसर रहती हैं। दुर्घटना में घायलों को यहां से प्राथमिक उपचार के बाद सादाबाद भेज दिया जाता है। पीएचसी सिर्फ दवा वितरण केंद्र बनकर रह गया है।
पीएचसी पर प्रतिदिन दो दर्जन से ज्यादा मरीज उपचार या दवा लेने आते हैं। मरीजों को दवा तो मिल जाती है, लेकिन अन्य कोई सुविधा यहां उपलब्ध नहीं है। जब कभी दुर्घटना का कोई मामला आता है तो उसे प्राथमिक उपचार के बाद सादाबाद भेज दिया जाता है। पीने की पानी की व्यवस्था नहीं है, इसलिए लोग सबमर्सिबल के पानी से काम चलाते हैं।
विज्ञापन

दो साल से किसी सफाई कर्मचारी की तैनाती नहीं है। यहां के चिकित्सकीय स्टाफ को निजी कर्मचारी बुलाकर सफाई करनी पड़ती है। पहले कुछ अन्य चिकित्सक यहां तैनात थे, लेकिन स्थानांतरण के बाद नये चिकित्सकों की तैनाती नहीं हो पाई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

यहां तैनात फार्मासिस्ट तीन जगह ड्यूटी देता है, इसलिए केवल दो दिन ही वह पीएचसी पर सेवा दे पाता है। दवाओं की उपलब्धता से केवल मरीज यहां संतुष्ट रहते हैं। यहां तैनात डॉ. राकेश बाबू ने बताया कि वह एलोपैथिक चिकित्सक है और सभी मरीजों को वही देखते हैं। अन्य चिकित्सकों का तबादला हो जाने के बाद स्टाफ की कमी है, इसलिए थोड़ी बहुत असुविधा मरीजों को होती है।
मरीजों का दर्द
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में दवाएं तो मिल जाती हैं, लेकिन उनसे फायदा नहीं होता, इसलिए बाहर से दवा लेनी पड़ती है। ऐसे पीएचसी का क्या फायदा है, जिस पर सुविधाएं ही नहीं मिल पा रहीं।
-विपिन
- दवाएं तो मिल जाती हैं और दवा अच्छी मिलती है, लेकिन यहां कुत्ता काटे वाले इंजेक्शन नहीं मिल पाते, इसलिए सादाबाद भागना पड़ता है। यह सुविधा और मिल जाए तो फिर कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
-अर्जुन सिंह
- छह महीने पहले दवा लेने गया था, तभी कोरोनारोधी टीके की खुराक लगवाई थी। इस दौरान अधिक बीमार होने के कारण आगरा गया। यहां दवा तो मिलती है, लेकिन उसका असर नहीं होता।

-दामोदर
- यहां दवा तो मिलती है, लेकिन उससे जलन होती है, इसलिए बाहर से दवा लेते हैं। सभी रोगों में एक जैसी दवाएं मिलती हैं, इसलिए असर नहीं करती, इसलिए हम तो बाहर से दवा लेते हैं।
- योगेश
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed