फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hathras News ›   Hathras: No fodder and water arrangement for cows, no shade to sit

हाथरस : गोवंश के लिए न चारे-पानी का इंतजाम, न बैठने के लिए छाया

Sun, 01 May 2022 11:57 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 01 May 2022 11:57 PM IST
विज्ञापन
Hathras: No fodder and water arrangement for cows, no shade to sit
हाथरस : गांव उधैना की अस्थायी गोशाला में टिन शेड के अंदर और बाहर बैठे गोवंश। संवाद - फोटो : SHAPHU
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहपऊ (हाथरस)
विज्ञापन

प्रदेश सरकार के आदेश पर ग्रामीण अंचल में बनाई गईं अस्थायी गोशालाओं में गोवंश को तो पहुंचा दिया गया, लेकिन आज तक इनके खाने-पीने और इलाज के मुकम्मल इंतजाम नहीं किए गए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि गायों के चारे-पानी और उनकी देखभाल के लिए सरकार से मिलने वाला बजट आखिर जा कहां रहा है। ग्राम पंचायत उधैना में क्षेत्र की तीन ग्राम पंचायतों की 55 एकड़ भूमि में गोवंश के लिए बनाई गई गोशाला में गायों की संख्या दो हजार से ज्यादा है। गोवंश के चारे-पानी की धनराशि में गोलमाल की शिकायत पूर्व सपा विधायक देवेंद्र अग्रवाल भी शासन से कर चुके हैं, लेकिन लगता है कि उनकी शिकायत ठंडे बस्ते में डाल दी गई। तभी तो इस पर कार्रवाई नहीं हो सकी है।
चारे-पानी की कमी और बेहतर इलाज के अभाव में आए-दिन हो रही गोवंश की मौत से आसपास के किसान काफी दुखी और आक्रोशित हैं। जब लोगों ने इसके शिकायत की। तब प्रशासन की आंखें खुलीं और गायों के चारे-पानी का इंतजाम किया गया, लेकिन यह इंतजाम नाकाफी साबित हुआ। क्षेत्र के कुछ समाजसेवी इस कार्य कार्य के लिए आगे आए तो गायों के लिए भूसे का इंतजाम किया गया। अब उनके पीन के लिए पानी की कमी है। गोशाला में केवल एक छोटी सबमर्सिबल लगी है, जिससे गोवंश के लिए पानी की कमी पूरी करना मुश्किल होता है। पास के किसानों ने अपनी सबमर्सिबल से पाइप लाइन डलवाकर गोशाला में पानी के लिए बनाए गए तालाब को भरवा दिया है, लेकिन भीषण गर्मी में यह तालाब भी गोवंश की पानी की जरूरत पूरी नहीं कर पा रहा।
विज्ञापन

गोवंश की संख्या को देखते हुए गोशाला में टीन शेड भी नाकाफी है। गोशाला में तीन टीन शेड हैं, जिनमें उनके खाने के लिए हौदियां बनी हैं। काफी बड़े क्षेत्रफल में फैली गोशाला में गोवंश के बैठने के लिए छायादार स्थान की कमी है। गोशाला में काम कर रहे एक मजदूर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस गोशाला में सांड़ों के हमले में हर रोज गायें मर जाती हैं। इसकी पुष्टि पास के एक किसान ने भी की है। किसानों का कहना है कि वह हर रोज मरे गोवंश को हुए गोवंश को दफनाने के लिए गड्ढे की खोदाई होते हुए देखते हैं। किसानों का कहना है कि नजदीक गोशाला बनने से उनकी मुश्किल बढ़ गई हे। उनकी पूरी फसल इन गोवंश ने नष्ट कर दी है। उनको दिन-रात खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

गोशाला बनने से हम लोगों को काफी परेशानी हो रही है। गोशाला के बाहर बनी तार की बेरिकेडिंग सांड़ों को रोकने में नाकाफी हो रही है, वह उसको तोड़कर खेतों में घुस आते है और पूरी फसल खा जाते हैं।
- रमेशचंद्र, किसान गांव नगरिया
गोशाला में हर रोज गोवंश भूख-प्यास और इलाज के अभाव में दम तोड़ रहे हैं। गोशाला से निकलकर गोवंश हमारे खेतों में खड़ी फसल को नष्ट कर देते हैं। प्रशासन इनकी रोकथाम का इंतजाम करे।
-रामेश्वर सिंह, किसान गांव नगरिया
गायें तो एक बारगी रुक सकती हैं, लेकिन सांड़ बेकाबू हो जाते हैं और बेेरिकेडिंग तोड़कर बाहर आ जाते हैं। वह फसल को नष्ट देते हैं और किसानों पर भी हमलाव कर देते हैं, जिससे कई किसान घायल हो चुके हैं।
- शंकर सिंह, किसान नगला बेनी
सरकार ने आवारा गोवंश से किसानों की फसल को नष्ट होने से बचाने के लिए गोशाला तो बनवा दी, लेकिन अब प्रशासन को गोशाला के चारों ओर चारदीवारी बनवानी चाहिए, जिससे गोवंश बाहर न निकल सकें।

- शिवकुमार, किसान गांव उधैना
बेरिकेडिंग के जो तार उखड़ गए हैं, उनकी मरम्मत करा दी जाएगी। अगर एक सबमर्सिबल से पानी की पूर्ति नहीं हो रही है तो प्रधान से कहकर दूसरी सबमर्सिबल का इंतजाम करा दिया जाएगा।
-शिव सिंह, उपजिलाधिकारी सादाबाद
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed