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हाथरस : निजी बसों के अनुबंध के लिए नहीं आया कोई आवेदन
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
डग्गामारी पर रोक लगाने के लिए निजी बसों को अनुबंधित करने की परिवहन निगम की योजना फिलहाल परवान चढ़ती नहीं दिख रही। हाथरस डिपो ने बसों के अनुबंध के लिए आवेदन तो मांग रखे हैं, लेकिन कई माह बीतने के बाद भी इसके लिए एक भी आवेदन नहीं आया है। इस कारण निजी बसें निगम के बेड़े से नहीं जुड़ पाई हैं। मजबूरन यात्री लोकल रूटों पर खटारा बसों में सफर कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि हाथरस डिपो में वर्तमान में 77 बसें हैं। इनमें से एक दर्जन बसें सामान के अभाव में कार्यशाला से बाहर नहीं निकल पा रही हैं। डग्गामारी रोकने के लिए निगम स्तर से 75 प्रतिशत निजी बसों का अनुबंध करने की योजना तैयार की गई। इसके लिए रोडवेज बसस्टैंड पर फ्लैक्स लगाकर आवेदन भी मांगे गए।
शहर से लेकर गांव तक बसों के संचालन की तैयारी थी। खास बात यह है कि आज तक हाथरस डिपो में किसी भी निजी वाहन के स्वामी ने आवेदन नहीं किया है। इस कारण हाथरस डिपो के बेड़े में अनुबंधित बसें शामिल नहीं हो सकी हैं। बसों की कमी का खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (एआरएम) शशी रानी का कहना है कि निजी बसों के अनुबंध के लिए कोई भी आवेदन नहीं आया है। संवाद
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डग्गामारी पर रोक लगाने के लिए निजी बसों को अनुबंधित करने की परिवहन निगम की योजना फिलहाल परवान चढ़ती नहीं दिख रही। हाथरस डिपो ने बसों के अनुबंध के लिए आवेदन तो मांग रखे हैं, लेकिन कई माह बीतने के बाद भी इसके लिए एक भी आवेदन नहीं आया है। इस कारण निजी बसें निगम के बेड़े से नहीं जुड़ पाई हैं। मजबूरन यात्री लोकल रूटों पर खटारा बसों में सफर कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि हाथरस डिपो में वर्तमान में 77 बसें हैं। इनमें से एक दर्जन बसें सामान के अभाव में कार्यशाला से बाहर नहीं निकल पा रही हैं। डग्गामारी रोकने के लिए निगम स्तर से 75 प्रतिशत निजी बसों का अनुबंध करने की योजना तैयार की गई। इसके लिए रोडवेज बसस्टैंड पर फ्लैक्स लगाकर आवेदन भी मांगे गए।
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शहर से लेकर गांव तक बसों के संचालन की तैयारी थी। खास बात यह है कि आज तक हाथरस डिपो में किसी भी निजी वाहन के स्वामी ने आवेदन नहीं किया है। इस कारण हाथरस डिपो के बेड़े में अनुबंधित बसें शामिल नहीं हो सकी हैं। बसों की कमी का खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (एआरएम) शशी रानी का कहना है कि निजी बसों के अनुबंध के लिए कोई भी आवेदन नहीं आया है। संवाद
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