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हाथरस: कंपनी का एजेंट बनकर दस लाख रुपये की दवा का किया हेर-फेर
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
कोतवाली हाथरस गेट में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया है। विट्ठल फार्मास्युटिकल दवा कंपनी के स्वामी ने एक एजेंट पर दस लाख रुपये की दवा का हेरफेर करने का आरोप लगाया है। इस व्यक्ति पर मेडिकल स्टोर संचालकों व चिकित्सकों को दवा बेचकर उस धनराशि को कंपनी को नहीं देने का आरोप है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की छानबीन शुरू कर दी है।
गौरव पचौरी पुत्र मुकेश पचौरी निवासी राधाकृष्ण मंदिर साकेत कॉलोनी की अलीगढ़ रोड दयानतपुर में विट्ठल फार्मास्युटिकल्स के नाम से आयुर्वेदिक दवाओं की कंपनी है। गौरव पचौरी का आरोप है कि कैलाशचंद्र पुत्र प्यारेलाल निवासी सुनाना थाना जवां जिला अलीगढ़ ने उनके साथ धोखाधड़ी की है। पचौरी का कहना है कि उन्होंने कैलाशचंद्र को दस हजार रुपये मासिक और खाना व खर्चा पर रखा था, जबकि कैलाशचंद्र ने कमीशन पर काम करने का प्रस्ताव रखा था। इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया गया। कंपनी से करीब दस लाख रुपये की दवा लगभग 60 फर्म व चिकित्सकों को बेच दी।
बीच-बीच में भी यहां से दवा मंगवाकर अलीगढ़ में आपूर्ति करता रहा, लेकिन बेची हुई दवा की धनराशि जमा नहीं कराई। भुगतान की बात आती तो कोरोना की बात कहकर पेमेंट नहीं होने की बात कह देता, लेकिन जब संबंधित फर्मों से जानकारी गई तो पता चला कि सभी से कैलाशचंद्र ने भुगतान ले लिया है। डाक भेजकर जानकारी की गई तो कुछ फर्मों के नाम व चिकित्सकों के पते फर्जी निकले। आरोप है कि कैलाशचंद्र दस लाख रुपये हड़प कर गया है। कोतवाली हाथरस गेट में विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।
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कोतवाली हाथरस गेट में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया है। विट्ठल फार्मास्युटिकल दवा कंपनी के स्वामी ने एक एजेंट पर दस लाख रुपये की दवा का हेरफेर करने का आरोप लगाया है। इस व्यक्ति पर मेडिकल स्टोर संचालकों व चिकित्सकों को दवा बेचकर उस धनराशि को कंपनी को नहीं देने का आरोप है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की छानबीन शुरू कर दी है।
गौरव पचौरी पुत्र मुकेश पचौरी निवासी राधाकृष्ण मंदिर साकेत कॉलोनी की अलीगढ़ रोड दयानतपुर में विट्ठल फार्मास्युटिकल्स के नाम से आयुर्वेदिक दवाओं की कंपनी है। गौरव पचौरी का आरोप है कि कैलाशचंद्र पुत्र प्यारेलाल निवासी सुनाना थाना जवां जिला अलीगढ़ ने उनके साथ धोखाधड़ी की है। पचौरी का कहना है कि उन्होंने कैलाशचंद्र को दस हजार रुपये मासिक और खाना व खर्चा पर रखा था, जबकि कैलाशचंद्र ने कमीशन पर काम करने का प्रस्ताव रखा था। इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया गया। कंपनी से करीब दस लाख रुपये की दवा लगभग 60 फर्म व चिकित्सकों को बेच दी।
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बीच-बीच में भी यहां से दवा मंगवाकर अलीगढ़ में आपूर्ति करता रहा, लेकिन बेची हुई दवा की धनराशि जमा नहीं कराई। भुगतान की बात आती तो कोरोना की बात कहकर पेमेंट नहीं होने की बात कह देता, लेकिन जब संबंधित फर्मों से जानकारी गई तो पता चला कि सभी से कैलाशचंद्र ने भुगतान ले लिया है। डाक भेजकर जानकारी की गई तो कुछ फर्मों के नाम व चिकित्सकों के पते फर्जी निकले। आरोप है कि कैलाशचंद्र दस लाख रुपये हड़प कर गया है। कोतवाली हाथरस गेट में विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।
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