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हाथरस सत्संग हादसा: गवाह एसआई व महिला आरक्षी के बयान दर्ज, बोले- लोग एक-दूसरे पर गिरते चले गए
Thu, 24 Sep 2026 05:49 PM IST
Chaman Kumar Sharma
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
Published by: Chaman Kumar Sharma
Updated Thu, 24 Sep 2026 05:49 PM IST
सार
हाथरस सत्संग हादसा केस में बृहस्पतिवार को एडीजे कोर्ट में दो गवाहों के बयान। महिला आरक्षी क्षमा सैनी ने कहा- मंच के सामने ड्यूटी थी, सेवादारों ने लाठी-डंडों से रोका, कहा व्यवस्था हम देखेंगे।
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कोर्ट (प्रतीकात्मक फोटो)
- फोटो : एएनआई
विस्तार
हाथरस के सिकंदराराऊ में 2 जुलाई 2024 को भोले बाबा के सत्संग के दौरान भगदड़ के मामले में एडीजे कोर्ट संख्या एक की अदालत में सुनवाई जारी है। बृहस्पतिवार को 40वें गवाह एसआई मनीष कुमार और 41वें गवाह महिला आरक्षी क्षमा सैनी ने अपने बयान दर्ज कराए।
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कोर्ट में महिला आरक्षी ने बताया कि घटना वाले दिन उनकी ड्यूटी मंच के सामने लगी थी। जब पुलिस कर्मी वहां पहुंचे तो लाठी-डंडों से लैस सेवादारों और आयोजकों ने उन्हें यह कहकर रोक दिया कि वे अपनी व्यवस्था खुद देखते हैं। वे लोग यहां क्यों आए हैं? महिला आरक्षी के अनुसार दोपहर लगभग 12:30 बजे बाबा पहुंचे और 1:30 बजे प्रवचन समाप्त होने के बाद जब बाबा अपनी गाड़ी से निकलने लगे तभी श्रद्धालु चरणरज लेने के लिए उमड़ पड़े।
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इसी दौरान काले कपड़ों में मौजूद बाबा के कमांडो और सेवादारों ने भीड़ को धक्का दिया, जिससे लोग ढालनुमा गड्ढे में गिरने लगे और भगदड़ मच गई। सेवादारों ने पुलिस कर्मियों के साथ भी धक्का-मुक्की की, जिससे पुलिस कर्मी गिरकर चुटहिल हो गए। जब सेवादारों ने देखा कि लोग मर रहे हैं, तो वे अपनी वर्दी उतारकर वहां से भाग गए।
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जिरह के दौरान बचाव पक्ष के सवालों पर महिला आरक्षी ने स्वीकार किया कि उस दिन काफी गर्मी और उमस थी तथा फायर टेंडर से पानी का छिड़काव कराया गया था। उन्होंने यह भी माना कि बाबा के जाने के बाद भीड़ के निकलने के दौरान सड़क किनारे पानी के गड्ढे में फिसलने के कारण लोग एक-दूसरे पर गिरते चले गए।
अलीगढ़ की मोर्चरी में पहुंचे थे 38 शव
गवाह एसआई मनीष कुमार ने अदालत को बताया कि घटना के बाद मलखान सिंह जिला अस्पताल अलीगढ़ की मोर्चरी में लगभग 38 शव पोस्टमार्टम के लिए पहुंचे थे। उन्होंने मृतका मीना देवी के शव का परिजन से शिनाख्त करवाया और पंचायतनामा सहित अन्य कानूनी कार्रवाई पूरी की थी। जिरह में उपनिरीक्षक ने स्पष्ट किया कि पंचायतनामा भरने के दौरान लोगों की राय के अनुसार मृत्यु का कारण भगदड़ में भीड़ के नीचे दबने से आई चोटें थीं।