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हाथरस : बच्चों पर लुटा रहीं ममता और फर्ज को भी दे रहीं बखूबी अंजाम
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
पुराने समय में मां घर की देखभाल करती थी और अपने बच्चों का लालन-पालन करती थी। वर्तमान में काफी महिलाएं दोहरी भूमिका में हैं। वह अपने बच्चों पर ममता भी लुटा रही हैं और अपनी ड्यूटी को भी बखूबी अंजाम दे रही हैं। वह घर के साथ बाहर की भी जिम्मेदारी निभा रही हैं। कोरोना काल में इन महिलाओं की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। यह महिलाएं कोरोना योद्धा बनकर महामारी से निपटने में भी अहम भूमिका अदा कर रही हैं।
बेटे की परवरिश के साथ निभा रहीं योद्धा की जिम्मेदारी
तहसीलदार सासनी निधि भारद्वाज के बेटे की उम्र केवल दो साल की है। कोरोना काल में उनकी जिम्मेदारी और बढ़ गई है। वह लगातार अपनी ड्यूटी को भी अंजाम दे रही हैं और अपने दो साल के मासूम बच्चे की भी परवरिश भी कर रही हैं। वह मां होने के साथ कोरोना योद्धा भी हैं। व्यस्ततम समय में वह अपने मासूम बेटे पर भी ममता लुटा रही हैं और फर्ज और ड्यूटी दोनों को निभा रही हैं।
प्रतिमा सिंह को अपनी बेटी पर है गर्व
नगर पंचायत मेंडू की ईओ अनामिका सिंह भी कोरोना योद्धा की भूमिका में हैं। वह दिन-रात क्षेत्र में सफाई करा रही हैं और सैनिटाइजर का छिड़काव करा रही हैं। उनका कहना है कि उनकी मां प्रतिमा सिंह उनका बहुत ख्याल रखती हैं। रोजाना उनसे फोन पर उनका हाल-चाल पूछती हैं। वह आज जो कुछ भी हैं, अपनी मम्मी की बदौलत हैं। उनकी मम्मी न केवल उनकी मां हैं, बल्कि उनकी अच्छी सहेली भी हैं। वहीं अनामिका सिंह की मां को भी अपनी बेटी पर काफी गर्व है।
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डॉ. अलका बखूबी निभा रहीं दोहरी जिम्मेदारी
सासनी के सरकारी अस्पताल में तैनात डॉ. अलका सेंगर भी इस समय दोहरी भूमिका में हैं। वह सरकारी चिकित्सक हैं और साथ ही उनके दो जुड़वा बच्चे भी हैं। अलका सेंगर पर कोरोना काल में काफी अहम जिम्मेदारी है। वह अपनी व्यस्त नौकरी के बाद भी अपने बच्चों का पूरा ध्यान रखती हैं। इस समय डॉ. अलका सेंगर कोरोना योद्धा की भूमिका में हैं और बखूबी अपनी ड्यूटी को अंजाम दे रही हैं।
एसआई निशा रानी भी बखूबी निभा रहीं अपना फर्ज
मुरसान कोतवाली में तैनात एसआई निशा रानी अपने फर्ज को निभा रही हैं। वर्तमान में कोरोना संक्रमण बढ़ता जा रहा है और निशा रानी की ड्यूटी भी। ऐसे में उन्होंने अपनी बच्ची को फिलहाल ससुराल भेज दिया है। वह फोन से ही उसे दुलार करती हैं। निशा रानी भी इस समय कोरोना योद्धा की भूमिका में हैं और मां का फर्ज भी वह बखूबी निभा रही हैं।
स्टाफ नर्स सुनीता ड्यूटी के साथ कर रहीं बच्चों की परवरिश
बागला जिला अस्पताल में तैनात स्टाफ नर्स सुनीता प्रसाद इस समय इमरजेंसी वार्ड में ड्यूटी कर रही हैं। वहां इन-दिनों काफी मरीज आ रहे हैं। सुनीता प्रसाद तीन साल से चिकित्सकीय सेवा में हैं। उनके दो बच्चे हैं। एक की उम्र आठ साल है और दूसरे की चार साल। सुनीता अपने फर्ज को भी निभा रही हैं और साथ बच्चों पर भी अपनी ममता लुटा रही हैं। उनका कहना है कि दोनों काम जरूरी हैं।
बच्चों से सिर्फ फोन पर हो पा रही है बात
सहपऊ थाने में तैनात हेड कांस्टेबल अंजू कुमारी दो बच्चों की मां हैं। कोरोना काल में उनकी जिम्मेदारी और बढ़ गई है। अंजू कुमारी दोनों दायित्वों का निर्वहन कर रही हैं। वह टूंडला की रहने वाली हैं। बच्चे आगरा रहते हैं। अंजू कुमारी का कहना है कि ड्यूटी भी जरूरी है और बच्चों की देखभाल भी। पिछले कोरोना काल में भी वह काफी दिन तक अपने बच्चों से नहीं मिल पाई थीं। इस बार भी काफी दिन से बच्चों से मिलने नहीं गई हैं, लेकिन फोन पर रोजाना बात होती है और बच्चों का हाल-चाल लेती हैं।
बच्चे का लालन-पालन के साथ ड्यूटी भी जरूरी
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सहपऊ में एएनएम चंचल पाल भी अपना फर्ज और ड्यूटी दोनों निभा रही हैं। होली से दो दिन पहले ही वह मां बनी हैं। गर्भावस्था में भी उन्होंने कोई मातृत्व अवकाश नहीं लिया। बच्चा होने के बाद भी बखूबी ड्यूटी निभा रही हैं। वह कोरोना योद्धा की भूमिका में भी हैं। उनका कहना है कि बच्चा काफी छोटा है और उसकी भी चिंता रहती है, लेकिन साथ ही ड्यूटी भी निभानी है।
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पुराने समय में मां घर की देखभाल करती थी और अपने बच्चों का लालन-पालन करती थी। वर्तमान में काफी महिलाएं दोहरी भूमिका में हैं। वह अपने बच्चों पर ममता भी लुटा रही हैं और अपनी ड्यूटी को भी बखूबी अंजाम दे रही हैं। वह घर के साथ बाहर की भी जिम्मेदारी निभा रही हैं। कोरोना काल में इन महिलाओं की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। यह महिलाएं कोरोना योद्धा बनकर महामारी से निपटने में भी अहम भूमिका अदा कर रही हैं।
बेटे की परवरिश के साथ निभा रहीं योद्धा की जिम्मेदारी
तहसीलदार सासनी निधि भारद्वाज के बेटे की उम्र केवल दो साल की है। कोरोना काल में उनकी जिम्मेदारी और बढ़ गई है। वह लगातार अपनी ड्यूटी को भी अंजाम दे रही हैं और अपने दो साल के मासूम बच्चे की भी परवरिश भी कर रही हैं। वह मां होने के साथ कोरोना योद्धा भी हैं। व्यस्ततम समय में वह अपने मासूम बेटे पर भी ममता लुटा रही हैं और फर्ज और ड्यूटी दोनों को निभा रही हैं।
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प्रतिमा सिंह को अपनी बेटी पर है गर्व
नगर पंचायत मेंडू की ईओ अनामिका सिंह भी कोरोना योद्धा की भूमिका में हैं। वह दिन-रात क्षेत्र में सफाई करा रही हैं और सैनिटाइजर का छिड़काव करा रही हैं। उनका कहना है कि उनकी मां प्रतिमा सिंह उनका बहुत ख्याल रखती हैं। रोजाना उनसे फोन पर उनका हाल-चाल पूछती हैं। वह आज जो कुछ भी हैं, अपनी मम्मी की बदौलत हैं। उनकी मम्मी न केवल उनकी मां हैं, बल्कि उनकी अच्छी सहेली भी हैं। वहीं अनामिका सिंह की मां को भी अपनी बेटी पर काफी गर्व है।
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डॉ. अलका बखूबी निभा रहीं दोहरी जिम्मेदारी
सासनी के सरकारी अस्पताल में तैनात डॉ. अलका सेंगर भी इस समय दोहरी भूमिका में हैं। वह सरकारी चिकित्सक हैं और साथ ही उनके दो जुड़वा बच्चे भी हैं। अलका सेंगर पर कोरोना काल में काफी अहम जिम्मेदारी है। वह अपनी व्यस्त नौकरी के बाद भी अपने बच्चों का पूरा ध्यान रखती हैं। इस समय डॉ. अलका सेंगर कोरोना योद्धा की भूमिका में हैं और बखूबी अपनी ड्यूटी को अंजाम दे रही हैं।
एसआई निशा रानी भी बखूबी निभा रहीं अपना फर्ज
मुरसान कोतवाली में तैनात एसआई निशा रानी अपने फर्ज को निभा रही हैं। वर्तमान में कोरोना संक्रमण बढ़ता जा रहा है और निशा रानी की ड्यूटी भी। ऐसे में उन्होंने अपनी बच्ची को फिलहाल ससुराल भेज दिया है। वह फोन से ही उसे दुलार करती हैं। निशा रानी भी इस समय कोरोना योद्धा की भूमिका में हैं और मां का फर्ज भी वह बखूबी निभा रही हैं।
स्टाफ नर्स सुनीता ड्यूटी के साथ कर रहीं बच्चों की परवरिश
बागला जिला अस्पताल में तैनात स्टाफ नर्स सुनीता प्रसाद इस समय इमरजेंसी वार्ड में ड्यूटी कर रही हैं। वहां इन-दिनों काफी मरीज आ रहे हैं। सुनीता प्रसाद तीन साल से चिकित्सकीय सेवा में हैं। उनके दो बच्चे हैं। एक की उम्र आठ साल है और दूसरे की चार साल। सुनीता अपने फर्ज को भी निभा रही हैं और साथ बच्चों पर भी अपनी ममता लुटा रही हैं। उनका कहना है कि दोनों काम जरूरी हैं।
बच्चों से सिर्फ फोन पर हो पा रही है बात
सहपऊ थाने में तैनात हेड कांस्टेबल अंजू कुमारी दो बच्चों की मां हैं। कोरोना काल में उनकी जिम्मेदारी और बढ़ गई है। अंजू कुमारी दोनों दायित्वों का निर्वहन कर रही हैं। वह टूंडला की रहने वाली हैं। बच्चे आगरा रहते हैं। अंजू कुमारी का कहना है कि ड्यूटी भी जरूरी है और बच्चों की देखभाल भी। पिछले कोरोना काल में भी वह काफी दिन तक अपने बच्चों से नहीं मिल पाई थीं। इस बार भी काफी दिन से बच्चों से मिलने नहीं गई हैं, लेकिन फोन पर रोजाना बात होती है और बच्चों का हाल-चाल लेती हैं।
बच्चे का लालन-पालन के साथ ड्यूटी भी जरूरी
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सहपऊ में एएनएम चंचल पाल भी अपना फर्ज और ड्यूटी दोनों निभा रही हैं। होली से दो दिन पहले ही वह मां बनी हैं। गर्भावस्था में भी उन्होंने कोई मातृत्व अवकाश नहीं लिया। बच्चा होने के बाद भी बखूबी ड्यूटी निभा रही हैं। वह कोरोना योद्धा की भूमिका में भी हैं। उनका कहना है कि बच्चा काफी छोटा है और उसकी भी चिंता रहती है, लेकिन साथ ही ड्यूटी भी निभानी है।