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हाथरस : आज 25 साल का हो गया अपना जिला, बुनियादी ढांचा अभी अधूरा

Mon, 02 May 2022 11:12 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 02 May 2022 11:12 PM IST
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Hathras: Its district turns 25 today, infrastructure still incomplete
हाथरस : जिला कारागार की भूमि। संवाद - फोटो : HATHRAS
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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हाथरस जिला मंगलवार को 25 साल का हो जाएगा। 25 साल पहले 3 मई 1997 को इस जिले का सृजन हुआ था। इस जिले ने वर्ष 2004 में सपा के शासनकाल ने जिला समाप्ति का दंश भी झेला। वैसे अभी विकास के नाम पर इस जिले संसाधनों की कमी है। इस जिले में अभी तक मेडिकल कॉलेज नहीं है। 25 साल बाद भी जिले में कारागार नहीं है। जिला न्यायालय का नया भवन आज तक यहां नहीं बना। जिला स्तरीय कई कार्यालय अभी भी जिले में नहीं हैं और इसके लिए हाथरस अलीगढ़ या मथुरा पर निर्भर है। शिक्षा के क्षेत्र में यह जिला अभी भी पिछड़ा है। परंपरागत उद्योग-धंधे आज तक यहां विकसित नहीं हो सके।
बात यदि हाथरस जिले के सृजन की करें तो तीन मई 1997 को हाथरस को महामायानगर के नाम से जिला घोषित किया गया। अलीगढ़ की हाथरस और सिकंदराराऊ और मथुरा की सादाबाद तहसील को इसमें शामिल किया गया। तब इस जिले में अलीगढ़ की इगलास तहसील भी शामिल थी, लेकिन बाद में इसे फिर से अलीगढ़ में शामिल कर लिया गया। वैसे हाथरस जिले का सजृन लंबे आंदोलनों के बाद हुआ। बसपा ने यह वादा किया था कि यदि वह सत्ता में आई तो हाथरस जिला बनेगा और अपने शासनकाल में वर्ष 1997 में बसपा ने हाथरस को जिला बनाया। इसका श्रेय पूर्व मंत्री उपाध्याय को मिला। हालांकि सपा जब सत्ता में आई तो वर्ष 2004 में हाथरस जिले को समाप्त भी कर दिया गया, लेकिन हाईकोर्ट के आदेश पर फिर यह जिला बहाल हुआ। संवाद
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नहीं बना मेडिकल कॉलेज, स्वास्थ्य सेवाएं बेहद लचर
हाथरस। प्रदेश के ज्यादातर जिलों में मेडिकल कॉलेज स्थापित हो चुके हैं, लेकिन इस जिले में अभी तक मेडिकल कॉलेज ही नहीं बना है। ऐसे में यहां की सरकारी स्वास्थ्य सेवा बेहद लचर है। थोड़ा बीमार होने पर ही मरीजों को अलीगढ़ या आगरा के लिए रेफर कर दिया जाता है। साथ ही जिला अस्पताल में भी पर्याप्त स्टाफ और संसाधन नहीं है। 28 के सापेक्ष जिला अस्पताल में महज आठ चिकित्सकों की तैनाती है। जिला अस्पताल में डायलिसिस, एमआरआई की सुविधा नहीं है।
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नहीं है जिला कारागार और नया न्यायालय भवन
जिले में अभी तक जिला कारागार नहीं है। कैदियों को अलीगढ़ जेल भेजा जाता है और वहां से पेशी के लिए यहां कोर्ट लाया जाता है। हालांकि इसके लिए भूमि अधिग्रहीत की जा चुकी है, लेकिन अभी तक भवन तैयार नहीं हुआ है। इसी तरह जिले में नया न्यायालय भवन नहीं है। इसके लिए भी भूमि अधिग्रहण हो चुका है, लेकिन भवन नहीं बना है। कोरोना की वजह से काम में देरी हुई है।
उद्योग-धंधों का नहीं हुआ अपेक्षित विकास
हाथरस। किसी समय हाथरस कानपुर के बाद प्रदेश का दूसरा औद्योगिक शहर माना जाता था। यहां तीन बडे़ कॉटन मिल थे। हाथरस शहर की पहचान रंग-गुलाल, हींग, दाल, रेडीमेड गारमेंट्स, हैंडीक्राफ्ट उद्योग से है। इसके अलावा हसायन का इत्र उद्योग, पुरदिलनगर का मूंगा मोती उद्योग, बिसावर में चांदी का काफी काम होता है। सासनी भी कांच उद्योग का बड़ा केंद्र था लेकिन यहां के कई उद्योग धंधे सरकारी प्रोत्साहन के अभाव में पिछड़ गए। ट्रांसपोर्टशन की सुुविधाओं का अभाव भी इसकी मुख्य वजह रहा। वैसे हींग और रेडीमेड गारमेंट्स उद्योग को एक जिला एक उत्पाद में शामिल कर सरकार ने इन्हें संजीवनी दी है। संवाद
व्यवसायिक शिक्षा में भी नहीं हुई तरक्की
हाथरस। हाथरस में उच्च शिक्षा की दशा भी दयनीय है। यहां करीब 50 साल पुराना एमजी पॉलीटेक्निक तो है, लेकिन इसे कभी तकनीकी कॉलेज बनाने की पहल नहीं हुई। सरकार ने यहां उच्च शिक्षा का कोई बड़ा संस्थान नहीं खुलवाया। ऐसे में तकनीकी शिक्षा के लिए यहां विद्यार्थियों को पढ़ने के लिए बाहर ही जाना पड़ता है। संवाद
सड़कों की हालत खराब
हाथरस। जिला बनने के बाद शहर में तालाब चौराहे पर ओवरब्रिज बना। कुछ और रेलवे फाटकों पर ओवब्रिज बने, लेकिन शहर की सड़कों की दशा अमृत योजना की वजह से खराब हो गई। शहर व देहात में काफी सड़कों की हालत जर्जर है। ग्रामीण इलाकों में सड़कों की दशा नहीं सुधरी। संवाद

जिले के नाम पर होती रही सियासत
हाथरस। जिले के नाम पर 25 साल में सियासत होती रही। तीन मई 1997 को जब इसे जिले का दर्जा दिया गया तो इसका नाम महामायानगर रखा गया। इसके बाद भाजपा सरकार ने इसका नाम बदलकर हाथरस कर दिया। फिर बसपा सत्ता में आई तो फिर इसका नाम बदलकर महामाया नगर कर दिया गया। तदुपरांत जब सपा सत्ता में आई तो इसका नाम फिर हाथरस कर दिया गया। तब से अब तक जिले का नाम हाथरस ही है। संवाद
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