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हाथरस : अनिश्चितकालीन हड़ताल ने थामी स्वयं सहायता समूह के गठन की प्रक्रिया
सार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस जिले में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के बैनर तले जिला और ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों व कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के चलते जिले में स्वयं सहायता समूहों के गठन की प्रक्रिया पूरी तरह थम गई है।इसे लेकर लंबे समय से विकास भवन परिसर में कर्मचारियों का धरना जारी है।
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विस्तार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
जिले में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के बैनर तले जिला और ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों व कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के चलते जिले में स्वयं सहायता समूहों के गठन की प्रक्रिया पूरी तरह थम गई है। यहां तक कि स्वयं सहायता समूहों के संचालन में भी रुकावट आ रही है। कर्मचारियों की मांग है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक ब्लॉक व जिला स्तरीय कर्मचारी काम पर वापस नहीं आएंगे। इसे लेकर लंबे समय से विकास भवन परिसर में कर्मचारियों का धरना जारी है।
जिले में लंबे समय से आउटसोर्सिंग कर्मचारी एसोसिएशन के बैनर तले राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के सभी जनपद एवं ब्लॉक स्तरीय कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार पर चल रहे हैं। इन कर्मचारियों का कहना है कि शासन-प्रशासन के अधिकारियों द्वारा अनैतिक दबाव बनाया जा रहा है। उन्हें 12वीं और 18वीं शासकीय निकाय की बैठक में एनआरएलएम एचआर पॉलिसी में अनुमन्य सुविधाओं को प्रदान किया जाए।
कार्मिकों को एचआर पॉलिसी के तहत सात प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि, स्वास्थ्य एवं दुर्घटना बीमा, प्रोफेशनल्स को शिक्षा भत्ता, लैपटाप भत्ता, मोबाइल भत्ता एवं सेल्फ लर्निंग भत्ता दिया जाए। कर्मचारियों का आउटसोर्सिंग समाप्त कर उनका नियमितीकरण (विभागीय संविदा) किया जाए, जिससे आउटसोर्सिंग कंपनियों को सुविधा शुल्क के नाम पर दिए जा रहे प्रति वर्ष करोड़ों रुपयों की बचत कर राजकोषीय घाटे की प्रतिपूर्ति की जा सकें।
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कर्मियों ने उनको मूल निवास के नजदीक तैनात किए जाने के लिए ट्रांसफर पॉलिसी तैयार किए जाने, योजना में कार्यरत महिला दीदियों को आईपीआरपी, समूह सखी, आजीविका सखी, एफएलसीआरपी, एफएनएचडब्ल्यू आईसीआरपी, कृषि सखी, पशु सखी, आईसीआरपी, बैंक सखी के मानदेय में वृद्धि की जाए। इन मांगों को लेकर चल रही अनिश्चितकालीन हड़ताल के चलते जिले में स्वयं सहायता समूहों के गठन की प्रक्रिया थमी हुई है। इस कारण नये समूहों का गठन नहीं हो पा रहा है और महिलाओं को भी रोजगार मुहैया नहीं मिल रहा है। वहीं समूहों के कार्य में भी तेजी नहीं आ पा रही है। संवाद
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जिले में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के बैनर तले जिला और ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों व कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के चलते जिले में स्वयं सहायता समूहों के गठन की प्रक्रिया पूरी तरह थम गई है। यहां तक कि स्वयं सहायता समूहों के संचालन में भी रुकावट आ रही है। कर्मचारियों की मांग है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक ब्लॉक व जिला स्तरीय कर्मचारी काम पर वापस नहीं आएंगे। इसे लेकर लंबे समय से विकास भवन परिसर में कर्मचारियों का धरना जारी है।
जिले में लंबे समय से आउटसोर्सिंग कर्मचारी एसोसिएशन के बैनर तले राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के सभी जनपद एवं ब्लॉक स्तरीय कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार पर चल रहे हैं। इन कर्मचारियों का कहना है कि शासन-प्रशासन के अधिकारियों द्वारा अनैतिक दबाव बनाया जा रहा है। उन्हें 12वीं और 18वीं शासकीय निकाय की बैठक में एनआरएलएम एचआर पॉलिसी में अनुमन्य सुविधाओं को प्रदान किया जाए।
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कार्मिकों को एचआर पॉलिसी के तहत सात प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि, स्वास्थ्य एवं दुर्घटना बीमा, प्रोफेशनल्स को शिक्षा भत्ता, लैपटाप भत्ता, मोबाइल भत्ता एवं सेल्फ लर्निंग भत्ता दिया जाए। कर्मचारियों का आउटसोर्सिंग समाप्त कर उनका नियमितीकरण (विभागीय संविदा) किया जाए, जिससे आउटसोर्सिंग कंपनियों को सुविधा शुल्क के नाम पर दिए जा रहे प्रति वर्ष करोड़ों रुपयों की बचत कर राजकोषीय घाटे की प्रतिपूर्ति की जा सकें।
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कर्मियों ने उनको मूल निवास के नजदीक तैनात किए जाने के लिए ट्रांसफर पॉलिसी तैयार किए जाने, योजना में कार्यरत महिला दीदियों को आईपीआरपी, समूह सखी, आजीविका सखी, एफएलसीआरपी, एफएनएचडब्ल्यू आईसीआरपी, कृषि सखी, पशु सखी, आईसीआरपी, बैंक सखी के मानदेय में वृद्धि की जाए। इन मांगों को लेकर चल रही अनिश्चितकालीन हड़ताल के चलते जिले में स्वयं सहायता समूहों के गठन की प्रक्रिया थमी हुई है। इस कारण नये समूहों का गठन नहीं हो पा रहा है और महिलाओं को भी रोजगार मुहैया नहीं मिल रहा है। वहीं समूहों के कार्य में भी तेजी नहीं आ पा रही है। संवाद