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हाथरसः स्वास्थ्य केंद्र कर्मियों पर बच्चा गायब करने का आरोप
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संवाद न्यूज एजेंसी, सासनी।
क्षेत्र के गांव लहौर्रा निवासी एक महिला ने एसडीएम को शिकायत देकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के कर्मचारियों पर बच्चे को गायब करने का आरोप लगाया है। शिकायत पर एसडीएम विजय कुमार शर्मा ने जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
गांव लहौर्रा निवासी गीता पुत्री ज्ञान सिंह ने कहा है कि पांच अगस्त को वह प्रसव पीड़ा से पीड़ित थीं। शाम करीब साढे़ पांच बजे आशा कार्यकर्ता रामलता स्वास्थ्य केंद्र से एंबुलेंस बुलाकर गीता की मां तुलसा देवी को साथ लेकर प्रसव कराने के लिए स्वास्थ्य केंद्र आईं। आरोप है कि रात करीब 11 बजे उसने एक पुत्र को जन्म दिया।
पीड़ा होने पर चिकित्सक की सलाह से एक गोली भी खाई। आरोप है कि इस दौरान स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारियों ने बच्चे को गायब कर दिया। इसके बाद सरकारी सहायता के रूप में 10 हजार रुपये देकर अस्पताल से छुट्टी देकर मां एवं आशा कार्यकर्ता के साथ घर भेज दिया। उस समय उसके पिता घर पर नहीं थे।
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इस कारण कोई कार्रवाई नहीं की। आशा कार्यकर्ता से साठगांठ कर मामले को दबाने का प्रयास किया गया। 11 अगस्त को शिकायत दर्ज कराने आए तो पुलिस ने तहसील के बाहर गेट से उठाकर बंद कर दिया। शिकायत में न्यायोचित कार्रवाई करने की मांग की गई है।
स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. एसपी सिंह का कहना है कि प्रसव पीड़िता को मरी हुई लड़की पैदा हुई थी। परिजनों ने स्वास्थ्य केंद्र कर्मचारियों से दफनाने के लिए कहा था, लेकिन मना कर दिया गया। सुपुर्दगीनामा लिखवाकर प्रसव पीड़िता को मां तुलसा देवी व आशा रामलता के साथ एंबुलेंस से घर भिजवाया गया। कर्मचारियों पर मिथ्या आरोप लगाया जा रहा है। आशा कार्यकर्ता रामलता ने भी प्रभारी के बयान की तस्दीक की है।
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क्षेत्र के गांव लहौर्रा निवासी एक महिला ने एसडीएम को शिकायत देकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के कर्मचारियों पर बच्चे को गायब करने का आरोप लगाया है। शिकायत पर एसडीएम विजय कुमार शर्मा ने जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
गांव लहौर्रा निवासी गीता पुत्री ज्ञान सिंह ने कहा है कि पांच अगस्त को वह प्रसव पीड़ा से पीड़ित थीं। शाम करीब साढे़ पांच बजे आशा कार्यकर्ता रामलता स्वास्थ्य केंद्र से एंबुलेंस बुलाकर गीता की मां तुलसा देवी को साथ लेकर प्रसव कराने के लिए स्वास्थ्य केंद्र आईं। आरोप है कि रात करीब 11 बजे उसने एक पुत्र को जन्म दिया।
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पीड़ा होने पर चिकित्सक की सलाह से एक गोली भी खाई। आरोप है कि इस दौरान स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारियों ने बच्चे को गायब कर दिया। इसके बाद सरकारी सहायता के रूप में 10 हजार रुपये देकर अस्पताल से छुट्टी देकर मां एवं आशा कार्यकर्ता के साथ घर भेज दिया। उस समय उसके पिता घर पर नहीं थे।
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इस कारण कोई कार्रवाई नहीं की। आशा कार्यकर्ता से साठगांठ कर मामले को दबाने का प्रयास किया गया। 11 अगस्त को शिकायत दर्ज कराने आए तो पुलिस ने तहसील के बाहर गेट से उठाकर बंद कर दिया। शिकायत में न्यायोचित कार्रवाई करने की मांग की गई है।
स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. एसपी सिंह का कहना है कि प्रसव पीड़िता को मरी हुई लड़की पैदा हुई थी। परिजनों ने स्वास्थ्य केंद्र कर्मचारियों से दफनाने के लिए कहा था, लेकिन मना कर दिया गया। सुपुर्दगीनामा लिखवाकर प्रसव पीड़िता को मां तुलसा देवी व आशा रामलता के साथ एंबुलेंस से घर भिजवाया गया। कर्मचारियों पर मिथ्या आरोप लगाया जा रहा है। आशा कार्यकर्ता रामलता ने भी प्रभारी के बयान की तस्दीक की है।