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हाथरस : प्रदेश के बजट में हाथरस के लिए नहीं निकला कुछ खास
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हाथरस : योगी सरकार का बजट देखते लोग। संवाद
- फोटो : HATHRAS
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
प्रदेश सरकार के इस बजट में खासतौर पर हाथरस के लिए इस साल कुछ नहीं हैं। बजट में हाथरस के लिए कोई बड़ी परियोजना नहीं है। यहां के लिए कोई खास पैकेज नहीं दिया गया है। वैसे अन्य जिलों को जो बजट में दिया गया है, उसका लाभ हाथरस को भी मिलेगा। वैसे एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) में पूर्व में चयनित उद्योगों को जरूर इस बार भी लाभ मिलता रहेगा। अन्य परंपरागत उद्योग-धंधों के प्रोत्साहन के लिए कोई खास योजना इस बजट में नहीं है। यहां ट्रांसपोर्ट नगर की मांग को इस बार भी बजट में अनदेखा किया गया है।
हाथरस जिला हींग, मूंगामोती, मेटल कारोबार, रंग-गुलाल कारोबार, रेडीमेड गारमेंट्स, हैंडलूम, दाल मिल, बिसावर का चांदी के घुंघरू के उद्योग, हसायन के इत्र उद्योग के सहारे अपनी पहचान बनाए हुए है। वर्ष 2018 में योगी सरकार ने एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) में यहां के हींग उद्योग को शामिल कर लिया। तदुपरांत यहां के रेडीमेड गारमेंट्स उद्योग को भी इस योजना में शामिल कर दिया गया था। इस बार बजट में खासतौर पर हाथरस के लिए कोई विशेष प्राविधान नहीं है। हालांकि उद्यमी इस बात से खुश हैं कि अन्य जिलों की तरह यहां के उद्योगों के लिए भी भूमि मिलेगी और एकल विंडो सिस्टम से उद्योगों को काफी लाभ मिलेगा। साथ ही जिले के ओडीओपी में चयनित हींग व रेडीमेड गारमेंट्स उद्योगों को पूर्व की भांति इस योजना का लाभ मिलता रहेगा। हींग के लिए यहां प्रयोगशाला भी स्थापित होगी।
हाथरस के बड़े उद्योगों पर एक नजर
दाल उद्योग
50 छोटी-बड़ी दाल मिलें।
एक हजार कुंतल प्रतिदिन दालों का उत्पादन।
200 करोड़ रुपये सालाना टर्नओवर।
हींग कारोबार
50 बड़ी हींग निर्माता फैक्टरी
100 छोटी हींग फैक्टरियां।
25 करोड़ रुपये सालाना टर्नओवर।
रंग गुलाल करोबार
करीब 17 रंग-गुलाल के कारखाने हैं।
करीब 30 करोड़ रुपये सालाना टर्नओवर है।
रेडीमेड गारमेंट्स कारोबार
250 रेडीमेड गारमेंट इकाइयां।
140 करीब पंजीकृत इकाइयां।
110 गैर पंजीकृत इकाइयां।।
आचार मुरब्बा उद्योग
22 से 25 करोड़ रुपये सालाना टर्नओवर
15 पंजीकृत फैक्टरियां।
12 लगभग गैर पंजीकृत फैक्टरियां हैं।
मेटल कारोबार
125 करीब पंजीकृत मेटल यूनिट।
100 से ज्यादा गैर पंजीकृत यूनिटें।
20 से 25 लाख रुपये प्रति यूनिट वार्षिक टर्नओवर
50 से 60 करोड़ प्रतिवर्ष का कारोबार।
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प्रदेश सरकार के इस बजट में खासतौर पर हाथरस के लिए इस साल कुछ नहीं हैं। बजट में हाथरस के लिए कोई बड़ी परियोजना नहीं है। यहां के लिए कोई खास पैकेज नहीं दिया गया है। वैसे अन्य जिलों को जो बजट में दिया गया है, उसका लाभ हाथरस को भी मिलेगा। वैसे एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) में पूर्व में चयनित उद्योगों को जरूर इस बार भी लाभ मिलता रहेगा। अन्य परंपरागत उद्योग-धंधों के प्रोत्साहन के लिए कोई खास योजना इस बजट में नहीं है। यहां ट्रांसपोर्ट नगर की मांग को इस बार भी बजट में अनदेखा किया गया है।
हाथरस जिला हींग, मूंगामोती, मेटल कारोबार, रंग-गुलाल कारोबार, रेडीमेड गारमेंट्स, हैंडलूम, दाल मिल, बिसावर का चांदी के घुंघरू के उद्योग, हसायन के इत्र उद्योग के सहारे अपनी पहचान बनाए हुए है। वर्ष 2018 में योगी सरकार ने एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) में यहां के हींग उद्योग को शामिल कर लिया। तदुपरांत यहां के रेडीमेड गारमेंट्स उद्योग को भी इस योजना में शामिल कर दिया गया था। इस बार बजट में खासतौर पर हाथरस के लिए कोई विशेष प्राविधान नहीं है। हालांकि उद्यमी इस बात से खुश हैं कि अन्य जिलों की तरह यहां के उद्योगों के लिए भी भूमि मिलेगी और एकल विंडो सिस्टम से उद्योगों को काफी लाभ मिलेगा। साथ ही जिले के ओडीओपी में चयनित हींग व रेडीमेड गारमेंट्स उद्योगों को पूर्व की भांति इस योजना का लाभ मिलता रहेगा। हींग के लिए यहां प्रयोगशाला भी स्थापित होगी।
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हाथरस के बड़े उद्योगों पर एक नजर
दाल उद्योग
50 छोटी-बड़ी दाल मिलें।
एक हजार कुंतल प्रतिदिन दालों का उत्पादन।
200 करोड़ रुपये सालाना टर्नओवर।
हींग कारोबार
50 बड़ी हींग निर्माता फैक्टरी
100 छोटी हींग फैक्टरियां।
25 करोड़ रुपये सालाना टर्नओवर।
रंग गुलाल करोबार
करीब 17 रंग-गुलाल के कारखाने हैं।
करीब 30 करोड़ रुपये सालाना टर्नओवर है।
रेडीमेड गारमेंट्स कारोबार
250 रेडीमेड गारमेंट इकाइयां।
140 करीब पंजीकृत इकाइयां।
110 गैर पंजीकृत इकाइयां।।
आचार मुरब्बा उद्योग
22 से 25 करोड़ रुपये सालाना टर्नओवर
15 पंजीकृत फैक्टरियां।
12 लगभग गैर पंजीकृत फैक्टरियां हैं।
मेटल कारोबार
125 करीब पंजीकृत मेटल यूनिट।
100 से ज्यादा गैर पंजीकृत यूनिटें।
20 से 25 लाख रुपये प्रति यूनिट वार्षिक टर्नओवर
50 से 60 करोड़ प्रतिवर्ष का कारोबार।