सत्संग हादसा: अनुमति 20 हजार, आए ढाई लाख, हाथरस डीएम-एसपी हाईकोर्ट में तलब
सिकंदराराऊ के 2 जुलाई 2024 को हुए सत्संग हादसे में हाथरस के डीएम और एसपी को हाईकोर्ट ने तलब किया है। अनुमति 20 हजार की दी गई थी, सत्संग में ढाई लाख की भीड़ जुटी थीं, व्यवस्था के लिए मात्र 69 पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी।
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सिकंदराराऊ में गतवर्ष दो जुलाई को भोले बाबा के सत्संग हादसे में भगदड़ के दौरान 121 मौतों के मामले में हर स्तर पर अफसरों की लापरवाही सामने आई थी। अनुमति 20 हजार की दी गई थी, सत्संग में ढाई लाख की भीड़ जुटी थीं, व्यवस्था के लिए मात्र 69 पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी। एसएचओ से लेकर एलआईयू तक ने अधिक भीड़ जुटने का अंदेशा जताया था। लेकिन इन रिपोर्ट को अफसरों ने देखा तक नहीं था।
अब हाईकोर्ट ने भी हाथरस के डीएम और एसपी को हलफनामे के साथ तलब किया है और पूछा है कि क्यों न हादसे और बदइंतजामी के लिए उनकी जिम्मेदारी तय की जाए। हादसे की एसआईटी जांच और न्यायिक आयोग की जांच में भी माना गया था कि भीड़ को देखते हुए पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए थे। भीड़ को लेकर भी अलग-अलग अनुमान लगाए गए थे। अनुमति 20 हजार लोगों के लिए दी गई थी। एलआईयू ने अपनी रिपोर्ट में 50 हजार से अधिक लोगों के पहुंचने की बात कही थी। इंस्पेक्टर सिकंदराराऊ ने भी 29 जून एक पत्र पुलिस अधीक्षक को लिखा था, जिसमें एक लाख से अधिक लोगों की भीड़ जुटने की आशंका जताई थी और उसी के अनुरूप पुलिस बल उपलब्ध कराने के लिए कहा गया था।
इसके बाद भी एक एसएचओ, चार इंस्पेक्टर, छह दरोगा, दो महिला दरोगा,चार ट्रैफिक पुलिस कर्मी और डेढ़ सेक्सन पीएसी सहित कुल 69 पुलिस कर्मी लगाए गए थे। उस समय अमर उजाला के साथ बातचीत में पूर्वी डीजीपी अरविंद कुमार जैन ने भी कहा था कि भीड़ को देखते हुए 600 से 700 पुलिस कर्मी लगाए जाने चाहिए थे। इस मामले में शुरू से ही पुलिस व्यवस्था पर्याप्त न होने को लेकर सवाल उठ रहे थे। यहां तक कि पुलिस प्रशासन ने अत्याधिक भीड़ होने का अनुमान भी सही तरीके से नहीं लगाया और न ही अफसरों ने पर्यवेक्षण किया। हादसे वाले दिन भी सुबह से ही भीड़ जुटती रही, इसके बाद भी गंभीरता नहीं दिखाई।
हर स्तर पर रही थी अफसरों की लापरवाही
-20 हजार की अनुमति, ढाई लाख की भीड़ जुटी। पुलिसकर्मी लगाए थे मात्र 69
-एलआईयू की तरफ से दी गई 50 हजार से ज्यादा की भीड़ जुटने की रिपोर्ट की भी अनदेखी हुई
-स्थानीय प्रभारी सहित चार इंस्पेक्टर ही मौजूद थे, दमकल भी नहीं लगाई गई थी
-सुबह से ही भीड़ जुड़ने लगी थी, फिर भी नहीं चेते पुलिस और प्रशासनिक अफसर
-एसआईटी व न्यायिक जांच में भी माना गया कि भीड़ को देखते हुए पर्याप्त नहीं थे इंतजाम
ऐसे हुआ था हादसा
गतवर्ष दो जुलाई को सिकंदराराऊ क्षेत्र के गांव फुलरई मुगलगढ़ी में भोले बाबा उफ साकार विश्व हरि का सत्संग समाप्त होने के बाद जैसे ही भीड़ ने निकलना शुरू किया, तभी भोले बाबा का काफिला निकलने लगा। इस दौरान सेवादारों ने भीड़ को डंडों से धकियाकर रोक दिया। कुछ लोग भोले बाबा की चरण रज लेने के लिए गैलरी में पहुंच गए। व्यवस्था बिगड़ गई और भगदड़ मच गई। इस भगदड़ में महिलाएं और बच्चे बुरी तरह कुचलते चले गए। मौके पर चीख-पुकार मच गई।
न्यायिक आयोग ने 500 लोगों के दर्ज किए थे बयान
इस मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी ने बदइंतजामी की रिपोर्ट दी थी। उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग की टीम को गठित किया। आयोग की टीम ने यहां मौके पर आकर घटना स्थल, जिला अस्पताल परिसर, सीएचसी सिकंदाराराऊ का निरीक्षण किया। यहां तक कि टीम के सदस्यों ने प्रत्यक्षदर्शियों के बयान लिए। इसके बाद करीब 500 लोगों को नोटिस देकर बयान देने के लिए तलब किया। एसआईटी रिपोर्ट के बाद ही तत्कालीन एसडीएम, सीओ, इंस्पेक्टर सहित कुछ अन्य पुलिस कर्मियों को निलंबित किया गया था।