{"_id":"5f1b24ad8ebc3ea08c1eeaf9","slug":"hathras-details-about-various-grants-that-have-come-up-in-the-last-3-years-in-basic-schools-will-have-to-be-given-hathras-news-ali2395005152","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाथरस: बेसिक के स्कूलों में पिछले 3 साल में आई विभिन्न ग्रांटों के बारे में देना होगा ब्यौरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाथरस: बेसिक के स्कूलों में पिछले 3 साल में आई विभिन्न ग्रांटों के बारे में देना होगा ब्यौरा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
बेसिक शिक्षा विभाग अब प्रधानाध्यापकों से पिछले तीन साल तक स्कूल में खर्च हुई धनराशि का ब्योरा मांग रहा है। इसका भौतिक सत्यापन कर पूरी जानकारी प्रेरणा एप पर फीड करने के निर्देश दिए गए हैं। पिछले तीन साल में व्यय किए गए बजट का हिसाब विभागीय अधिकारियों को देना होगा। इसके लिए बीएसए की ओर से दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। हिसाब नहीं देने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
राज्य परियोजना निदेशक समग्र शिक्षा ने सभी बीएसए को पत्र जारी किया है, जिसमें परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय वर्ष 2017-18, 2018-19 और 2019-20 में बेसिक शिक्षा निदेशालय द्वारा उपलब्ध कराई गई धनराशि से कराए गए विद्युतीकरण, हैंडपंप, सबमर्सिबल पंप, फर्नीचर, बाउंड्रीवाल निर्माण, स्पोर्ट ग्रांट एवं लाइब्रेरी ग्रांट का भौतिक सत्यापन कर प्रेरणा एप पर सूचना फीड कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
जिले में 1513 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। इन विद्यालयों में हर साल लाखों रुपये का बजट शासन की ओर से जारी किया जाता है। बजट के जरिये ही मरम्मत कार्य सहित अन्य कामकाज कराए जाते हैं। इसके साथ खर्च की गई धनराशि का उपभोग प्रमाण पत्र हेडमास्टरों के द्वारा विभाग को दिया जाता है। हर साल जारी होने वाले बजट का पैसा तमाम विद्यालयों के खातों में पड़ा रहता है। अब किस विद्यालय में कितना पैसा बैंक खाते में पड़ा हुआ है। इसकी जानकारी करने के लिए उच्चाधिकारियों की ओर से बीएसए को निर्देश दिए गए हैं। पिछले तीन साल में खर्च बजट का ब्योरा मांगा है।
विज्ञापन
प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय वर्ष 2017-18, 2018-19 और 2019-20 में बेसिक शिक्षा निदेशालय द्वारा उपलब्ध कराई गई धनराशि का पूरा ब्योरा प्रेरणा एप पर फीड करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसमें विभिन्न मदों में कितना पैसा आया और कितना खर्च हुआ, इस संबंध में जानकारी देना आवश्यक है। इसमें लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
-मनोज कुमार मिश्र, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।
विज्ञापन
बेसिक शिक्षा विभाग अब प्रधानाध्यापकों से पिछले तीन साल तक स्कूल में खर्च हुई धनराशि का ब्योरा मांग रहा है। इसका भौतिक सत्यापन कर पूरी जानकारी प्रेरणा एप पर फीड करने के निर्देश दिए गए हैं। पिछले तीन साल में व्यय किए गए बजट का हिसाब विभागीय अधिकारियों को देना होगा। इसके लिए बीएसए की ओर से दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। हिसाब नहीं देने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
राज्य परियोजना निदेशक समग्र शिक्षा ने सभी बीएसए को पत्र जारी किया है, जिसमें परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय वर्ष 2017-18, 2018-19 और 2019-20 में बेसिक शिक्षा निदेशालय द्वारा उपलब्ध कराई गई धनराशि से कराए गए विद्युतीकरण, हैंडपंप, सबमर्सिबल पंप, फर्नीचर, बाउंड्रीवाल निर्माण, स्पोर्ट ग्रांट एवं लाइब्रेरी ग्रांट का भौतिक सत्यापन कर प्रेरणा एप पर सूचना फीड कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
विज्ञापन
जिले में 1513 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। इन विद्यालयों में हर साल लाखों रुपये का बजट शासन की ओर से जारी किया जाता है। बजट के जरिये ही मरम्मत कार्य सहित अन्य कामकाज कराए जाते हैं। इसके साथ खर्च की गई धनराशि का उपभोग प्रमाण पत्र हेडमास्टरों के द्वारा विभाग को दिया जाता है। हर साल जारी होने वाले बजट का पैसा तमाम विद्यालयों के खातों में पड़ा रहता है। अब किस विद्यालय में कितना पैसा बैंक खाते में पड़ा हुआ है। इसकी जानकारी करने के लिए उच्चाधिकारियों की ओर से बीएसए को निर्देश दिए गए हैं। पिछले तीन साल में खर्च बजट का ब्योरा मांगा है।
विज्ञापन
प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय वर्ष 2017-18, 2018-19 और 2019-20 में बेसिक शिक्षा निदेशालय द्वारा उपलब्ध कराई गई धनराशि का पूरा ब्योरा प्रेरणा एप पर फीड करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसमें विभिन्न मदों में कितना पैसा आया और कितना खर्च हुआ, इस संबंध में जानकारी देना आवश्यक है। इसमें लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
-मनोज कुमार मिश्र, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।