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Hathras News: परख में टॉप फाइव में जगह नहीं बना सका हाथरस
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तमाम दावों के बीच एनसीईआरटी के परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण में जनपद की अलग ही तस्वीर सामने आई है। परख सर्वेक्षण में टाॅप फाइव में भी जनपद अपना स्थान नहीं बना सका है।
एनसीईआरटी की ओर से परख सर्वेक्षण का जो रिजल्ट जारी किया गया है, उसमें बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिन टॉप फाइव जिलों के नाम शामिल हैं, उनमें हाथरस जनपद का नाम शामिल नहीं है। परख सर्वेक्षण के किसी भी प्रदर्शन में हाथरस स्थान हासिल नहीं कर सका है।
निजी विद्यालयों की तुलना में सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षा और सुविधाओं के दावों के साथ विद्यार्थियों को लुभाने की कवायदें जारी हैं। शिक्षकों की भी कभी नहीं है, इसके बावजूद सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों के सीखने का स्तर अन्य जिलों की तुलना में काफी नीचे है, यह परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण की रिपोर्ट से साफ हो गया है।
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नई शिक्षा नीति के तहत कक्षा तीन, छह और कक्षा नौ में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का पिछले दिनों आकलन किया गया था। परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण का मकसद विद्यार्थियों के सीखने के स्तर को मापने और शिक्षा में सुधार के लिए जानकारी एकत्रित करने का है। इस सर्वेक्षण में परीक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों के शैक्षिक स्तर की जांच की गई।
ग्रामीण विद्यार्थियों ने रखी लाज
रिपोर्ट के अनुसार जहां जिले के विद्यालयों के विद्यार्थियों का ओवरऑल (कुल मिलाकर) प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा, वहीं संसाधनों के अभाव के बावजूद ग्रामीण विद्यार्थियों ने इस सर्वेक्षण में जिले की लाज बचाई है। ग्रामीण विद्यार्थियों के प्रदर्शन की श्रेणी में हाथरस जिले का नाम शामिल है। इसी तरह राज्य के सरकारी विद्यालयों के उच्च प्रदर्शन की सूची में भी जिले का नाम शामिल है।
जिन जिलों का नाम टॉप पांच में शामिल है, हो सकता है उन जिलों के विद्यार्थी हमारे जिले की तुलना में अधिक निपुण हों। हम बेहतर करने का प्रयास कर रहे हैं । - निशा अस्थाना, डाॅयट प्राचार्य, हाथरस।
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एनसीईआरटी की ओर से परख सर्वेक्षण का जो रिजल्ट जारी किया गया है, उसमें बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिन टॉप फाइव जिलों के नाम शामिल हैं, उनमें हाथरस जनपद का नाम शामिल नहीं है। परख सर्वेक्षण के किसी भी प्रदर्शन में हाथरस स्थान हासिल नहीं कर सका है।
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निजी विद्यालयों की तुलना में सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षा और सुविधाओं के दावों के साथ विद्यार्थियों को लुभाने की कवायदें जारी हैं। शिक्षकों की भी कभी नहीं है, इसके बावजूद सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों के सीखने का स्तर अन्य जिलों की तुलना में काफी नीचे है, यह परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण की रिपोर्ट से साफ हो गया है।
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नई शिक्षा नीति के तहत कक्षा तीन, छह और कक्षा नौ में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का पिछले दिनों आकलन किया गया था। परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण का मकसद विद्यार्थियों के सीखने के स्तर को मापने और शिक्षा में सुधार के लिए जानकारी एकत्रित करने का है। इस सर्वेक्षण में परीक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों के शैक्षिक स्तर की जांच की गई।
ग्रामीण विद्यार्थियों ने रखी लाज
रिपोर्ट के अनुसार जहां जिले के विद्यालयों के विद्यार्थियों का ओवरऑल (कुल मिलाकर) प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा, वहीं संसाधनों के अभाव के बावजूद ग्रामीण विद्यार्थियों ने इस सर्वेक्षण में जिले की लाज बचाई है। ग्रामीण विद्यार्थियों के प्रदर्शन की श्रेणी में हाथरस जिले का नाम शामिल है। इसी तरह राज्य के सरकारी विद्यालयों के उच्च प्रदर्शन की सूची में भी जिले का नाम शामिल है।
जिन जिलों का नाम टॉप पांच में शामिल है, हो सकता है उन जिलों के विद्यार्थी हमारे जिले की तुलना में अधिक निपुण हों। हम बेहतर करने का प्रयास कर रहे हैं । - निशा अस्थाना, डाॅयट प्राचार्य, हाथरस।