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हाथरस : जिले में पिछले 37 साल से जीत के लिए तरस रही कांग्रेस

Sat, 13 Nov 2021 12:24 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 13 Nov 2021 12:24 AM IST
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Hathras: Congress yearning for victory in the district for the last 37 years
हाथरस : पूर्व मंत्री पं. प्रेमचंद शर्मा का फाइल फोटो। संवाद - फोटो : HATHRAS
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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विधानसभा चुनाव में पिछले 37 साल से इस जिले में कांग्रेस जीत के लिए तरस गई है। वर्ष 1985 के बाद अभी तक जिले में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को जीत हासिल नहीं हो पाई है। हाथरस, सिकंदराराऊ और सादाबाद तीनों सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार पिछले कई विधानसभा चुनाव में मुख्य मुकाबले से भी बाहर रहे हैं। अब कांग्रेस इस जिले में विस चुनाव में जीत हासिल करने के लिए छटपटा रही है।
प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस कभी एकछत्र राज होता था। इस जिले में भी कमोबेश ऐसी ही स्थिति रही। कांग्रेस का टिकट लाने वाले उस समय आसानी से विधानसभा पहुंच जाते थे, लेकिन पिछले 37 साल से कांग्रेस यहां जीत के लिए तरस गई है। यदि हाथरस विधानसभा सीट पर नजर डालें तो यहां कांग्रेस ने सर्वाधिक छह बार जीत हासिल की। यहां से नंद कुमार देव वशिष्ठ तीन बार कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने। दो बार नारायण हरि शर्मा विधायक चुने गए तो एक बार पं. प्रेमचंद शर्मा कांग्रेस के टिकट पर विधायक निर्वाचित हुए।
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1985 में आखिरी बार कांग्रेस के नारायण हरी शर्मा हाथरस विधानसभा सीट से जीतकर विधायक बने। तब से लेकर अब तक पार्टी इस सीट को जीत नहीं सकी है। वर्ष 1989 में जनता दल के रामसरन सिंह ने कांग्रेस के हरीबाबू शर्मा को करीब 22 हजार वोटों से परास्त किया था। इसके बाद वर्ष 1991 से लेकर अब तक कांग्रेस इस सीट पर मुख्य मुकाबले में भी नहीं रही।
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बात यदि सादाबाद विधानसभा सीट की करें तो आजादी के बाद से लेकर अब तक के चुनाव में कांग्रेस ने इस सीट पर पांच बार अपना परचम लहराया। चार बार यहां कांग्रेस के कुं.अशरफ अली ने चुनाव जीता और उसके बाद उनके पुत्र कु. जावेद अली खां भी चुनाव जीते। जावेद अली खां आखिरी बार वर्ष 1980 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते। इसके बाद यहां से कांग्रेस अभी तक चुनाव नहीं जीत सकी है। यह भी तथ्य उल्लेखनीय है कि कांग्रेस की सरकारों में अशरफ अली और जावेद अली दोनों ही मंत्री भी रहे।
पिछले कई चुनाव से इस सीट से भी कांग्रेस मुख्य मुकाबलों से बाहर है। सिकंदराराऊ विधानसभा सीट के इतिहास को देखें तो इस सीट पर वर्ष 1952 और वर्ष 1957 के चुनाव कांग्रेस के टिकट पर पं. नेकराम शर्मा जीते। इसके बाद कांग्रेस को वर्ष 1980 में जीत नसीब हुई। तब कांग्रेस की पुष्पा चौहान ने यह सीट जीती। तब से लेकर अब तक कांग्रेस इस सीट पर जीत हासिल नहीं कर पाई है। पिछले कई चुनाव में तो कांग्रेस मुख्य मुकाबले में भी शामिल नहीं रही है।
प्रेमचंद शर्मा, अशरफ अली, जावेद अली बने थे मंत्री
हाथरस। विधानसभा चुनाव में जीतकर यहां के कई नेता कांग्रेस की सरकारों में मंत्री बने। हाथरस सीट पर वर्ष 1969 में कांग्रेस के पं. प्रेमचंद शर्मा चुनाव जीते तो वह प्रदेश में स्वास्थ्य राज्य मंत्री भी बने। इसी तरह से सादाबाद विस सीट पर चार बार जीत हासिल करने वाले कुं.अशरफ अली खां भी 1970 में प्रदेश सरकार में मंत्री बने और उनके बेटे जावेद अली खां भी 1980 में कांग्रेस की सरकार प्रदेश मेें मंत्री बने। संवाद

पार्टी पूरी तैयारी के साथ विधानसभा चुनाव लड़ेगी। जिले की तीनों सीटों पर योग्य प्रत्याशी उतारेगी और तीनों सीटों को जीतेगी। इसके लिए कड़ी मेहनत कार्यकर्ताओं द्वारा की जा रही है।
-चंद्रगुप्त विक्रमादित्य, जिलाध्यक्ष कांग्रेस

हाथरस : पूर्व मंत्री कुं. जावेद अली खां का फाइल फोटो।  संवाद

हाथरस : पूर्व मंत्री कुं. जावेद अली खां का फाइल फोटो। संवाद- फोटो : HATHRAS

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