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हाथरस : कुपोषण को दूर करने के लिए व्यवहार में परिवर्तन जरूरी : डीके सिंह

Sun, 26 Sep 2021 11:08 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 26 Sep 2021 11:08 PM IST
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Hathras: Behavior change necessary to remove malnutrition: DK Singh
हाथरस : स्वास्थ्य संचार सुदृढ़ीकरण कार्यशाला में मंचासीन अतिथि। संवाद - फोटो : HATHRAS
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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कुपोषण को दूर करने के लिए व्यवहार में परिवर्तन सबसे जरूरी है। जब तक व्यवहार परिवर्तन नहीं होगा, तब तक समाज में बदलाव नहीं आएगा। यह जानकारी जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) डीके सिंह ने बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग (आईसीडीएस) के तत्वावधान में सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफार) के सहयोग से आयोजित मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला में दी।
रविवार को शहर के एक होटल में आयोजित कार्यशाला में डीपीओ डीके सिंह ने कहा आज भी लोग रुढ़िवादिता नहीं छोड़ पा रहे हैं। उन्होंने उदाहरण के रूप में बताया अब भी घरों में बच्चा पैदा होने पर उसे शहद चटाया जाता है। यह एकदम गलत है। बच्चे को जन्म के एक घंटे के भीतर मां का दूध पिलाना बहुत जरूरी है। मां का दूध पीने से बच्चे को वह सभी तत्व मिल जाते हैं, जो उसके विकास के लिए जरूरी हैं और इसी दूध से उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है।
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जानते सब हैं, पर अमल बहुत कम लोग करते हैं। उन्होंने जागरूकता लाने के मामले में मीडिया की भूमिका को बहुत अहम बताया। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का महत्व भी बताया। पोषण अभियान का मकसद बच्चों को कुपोषित न होने देना है। सीडीपीओ राहुल वर्मा, सीडीपीओ धर्मेंद्र कुलश्रेष्ठ, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रेनू रावत आदि ने भी विचार व्यक्त किए।
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छह माह से छोटे बच्चे को नहीं पिलाएं पानी
हाथरस। जिला महिला चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रूपेंद्र गोयल ने कहा कि छोटे बच्चे को पानी नहीं पिलाना चाहिए। अपने आसपास यह सुनिश्चित करें कि महिलाएं छह माह तक बच्चे को पानी न पिलायें। यह हमारा दायित्व है कि कम से कम अपने इलाके में तो इस बारे में लोगों को जागरूक करें।
कामकाजी महिलाओं के बच्चे भी होते हैं कुपोषित
हाथरस। जिला स्वास्थ्य शिक्षा सूचना अधिकारी डॉ. चतुर सिंह ने सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह संस्था स्वास्थ्य के क्षेत्र में सराहनीय कार्य कर रही है। मीडिया योजनाओं को घरों में पहुंचाने का अच्छा माध्यम है। उन्होंने बताया गांवों में ही नहीं, बल्कि कामकाजी महिलाओं के बच्चे भी कुपोषित होते हैं, क्योंकि वह काम के दबाव में सही समय पर बच्चे को स्तनपान नहीं करा पाती हैं। संवाद

स्वस्थ पीढ़ी के लिए स्वस्थ नारी होना आवश्यक
महिला कल्याण अधिकारी मोनिका गौतम ने कहा स्वस्थ पीढ़ी के लिए स्वस्थ नारी का होना आवश्यक है। उन्होंने स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारियों के लिए छोटी-छोटी कार्यशाला आयोजित किये जाने पर बल दिया। बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) धीरेंद्र ने कहा स्वास्थ्य का मतलब शारीरिक ही नहीं, मानसिक स्वास्थ्य भी है। संवाद
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