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हाथरस : 1950 में अहेरिया जाति थी एससी में शामिल, उसके बाद नहीं किया सूचीबद्ध
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
रेलवे ट्रैक जाम करने वाले प्रदर्शनकारियों का यह कहना था कि वह लगातार अधिकारियों और नेताओं से अपनी इस मांग को रख रहे हैं, लेकिन किसी ने उनकी इस मांग को पूरा नहीं किया।
उनका कहना था कि कई राज्यों में वह अनुसूचित जाति में शामिल हैं, लेकिन प्रदेश में उन्हें किसी श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है। उनके हाथों में लगे बैनर में लिखा था कि 15 अप्रैल 1950 के शासनादेश में उत्तर प्रदेश राज्य की अनुसूचित जाति की सूची में नंबर दो पर अहेरिया जाति का नाम था। 11 अगस्त 1950 के शासनादेश में उत्तर प्रदेश की अहेरिया, खटीक, कोरी, थारू जाति को बिना संवैधानिक संसोधन व आदेश के निकाल दिया गया था।
25 सितंबर 1956 को फिर शासनादेश आया। इसमें प्रदेश की अनुसूचित जाति में खटीक व कोरी जाति को फिर सूचीबद्ध कर दिया गया। 24 जून 1967 के शासनादेश में प्रदेश की अनुसूचित जनजाति की सूची में थारू जाति को सूचीबद्ध कर लिया गया, लेकिन अहेरिया जाति को आज तक सूचीबद्ध नहीं किया गया। किसी भी सूची में यह जाति शामिल नहीं है, इसलिए उनकी जाति को सूचीबद्ध किया जाए। संवाद
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रेलवे ट्रैक जाम करने वाले प्रदर्शनकारियों का यह कहना था कि वह लगातार अधिकारियों और नेताओं से अपनी इस मांग को रख रहे हैं, लेकिन किसी ने उनकी इस मांग को पूरा नहीं किया।
उनका कहना था कि कई राज्यों में वह अनुसूचित जाति में शामिल हैं, लेकिन प्रदेश में उन्हें किसी श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है। उनके हाथों में लगे बैनर में लिखा था कि 15 अप्रैल 1950 के शासनादेश में उत्तर प्रदेश राज्य की अनुसूचित जाति की सूची में नंबर दो पर अहेरिया जाति का नाम था। 11 अगस्त 1950 के शासनादेश में उत्तर प्रदेश की अहेरिया, खटीक, कोरी, थारू जाति को बिना संवैधानिक संसोधन व आदेश के निकाल दिया गया था।
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25 सितंबर 1956 को फिर शासनादेश आया। इसमें प्रदेश की अनुसूचित जाति में खटीक व कोरी जाति को फिर सूचीबद्ध कर दिया गया। 24 जून 1967 के शासनादेश में प्रदेश की अनुसूचित जनजाति की सूची में थारू जाति को सूचीबद्ध कर लिया गया, लेकिन अहेरिया जाति को आज तक सूचीबद्ध नहीं किया गया। किसी भी सूची में यह जाति शामिल नहीं है, इसलिए उनकी जाति को सूचीबद्ध किया जाए। संवाद
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