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बिजली की बढ़ी दरें वापस ले सरकार
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2- बिजली की दरों में वृद्धि को लेकर एसडीएम को ज्ञापन सौंपते भारतीय किसान यूनियन अरा. के पदाधिकारी।
- फोटो : SADABAD
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस (सादाबाद)।
बिजली दरों में की गई वृद्धि को लेकर सोमवार को भारतीय किसान यूनियन अरा. के पदाधिकारियों ने सीएम योगी आदित्यनाथ के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में किसान हित में बढ़ाई गई बिजली दरों को वापस लेने की मांग की गई।
ज्ञापन में संगठन के जिला प्रभारी लोकेश चौधरी ने कहा कि यूपी का किसान काफी समस्याओं से जूझ रहा है। उत्तर प्रदेश में प्रत्येक किसान परिवार की आमदनी लगभग चार हजार रुपये प्रति माह है। वर्तमान में उप्र सरकार द्वारा किसानों के बिजली के बिल में वृद्धि का निर्णय किसान हितों पर कुठाराघात है। चार हजार रुपये में एक परिवार का पालन करना बहुत ही असंभव कार्य है। उप्र के लघु एवं सीमांत किसान खेती छोड़ने के लिए तैयार हैं। उप्र में पिछले दो साल में बिजली के मूल्य में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। यह वृद्धि दो गुने से अधिक है। पिछले दो सालों में किसानों की गन्ना एवं दूसरी फसलों के अनुपात में किसानों की उत्पादन लागत बढ़ती है। बिजली बिल में वृद्धि के इस फैसले ने किसानों की कमर को तोड़ने का काम किया है। ज्ञापन में मांग की गई कि ग्रामीण क्षेत्र एवं निजी नलकूप की दरों में की गई वृद्धि को वापस लिया जाए। बिजली की दरों में कमी की जाए। देश के सात राज्यों के तर्ज पर उप्र के किसानों को बिजली सिंचाई के लिए नि:शुल्क प्रदान की जाए। सामान्य योजना के अंतर्गत निजी नलकूप के कनेक्शन में लाइन की लंबाई 300 मीटर से घटाकर 190 मीटर कर दी है, जिससे किसानों पर अत्यधिक भार बढ़ गया है। सामान्य योजना के अंतर्गत कनेक्शन पर दी जाने वाली सब्सिडी में वृद्धि की जाए। स्वीकृत सामान्य योजना के निजी नलकूप कनेक्शन का सामान दिया जाए। आलू की बिक्री 200 रुपये से लेकर 275 रुपये क्विंटल हो रही है, जिसमें किसान की लागत नहीं मिल पा रही है। एक हजार से 1200 रुपये प्रति क्विंटल का कोल्ड भाड़ा स्वयं सरकार वहन करे और आलू से संबंधित उद्योग लगाए जाएं, जिससे किसान खुशहाल रह सकें। इस मौके पर लोकेेश चौधरी, श्याम चौधरी, विजयशंकर सारस्वत, रामू चौधरी, भूपेंद्र सिंह, जमुना, चंद्रवीर प्रधान, नरेश, अनिल, कालूराम आदि मौजूद थे।
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बिजली दरों में की गई वृद्धि को लेकर सोमवार को भारतीय किसान यूनियन अरा. के पदाधिकारियों ने सीएम योगी आदित्यनाथ के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में किसान हित में बढ़ाई गई बिजली दरों को वापस लेने की मांग की गई।
ज्ञापन में संगठन के जिला प्रभारी लोकेश चौधरी ने कहा कि यूपी का किसान काफी समस्याओं से जूझ रहा है। उत्तर प्रदेश में प्रत्येक किसान परिवार की आमदनी लगभग चार हजार रुपये प्रति माह है। वर्तमान में उप्र सरकार द्वारा किसानों के बिजली के बिल में वृद्धि का निर्णय किसान हितों पर कुठाराघात है। चार हजार रुपये में एक परिवार का पालन करना बहुत ही असंभव कार्य है। उप्र के लघु एवं सीमांत किसान खेती छोड़ने के लिए तैयार हैं। उप्र में पिछले दो साल में बिजली के मूल्य में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। यह वृद्धि दो गुने से अधिक है। पिछले दो सालों में किसानों की गन्ना एवं दूसरी फसलों के अनुपात में किसानों की उत्पादन लागत बढ़ती है। बिजली बिल में वृद्धि के इस फैसले ने किसानों की कमर को तोड़ने का काम किया है। ज्ञापन में मांग की गई कि ग्रामीण क्षेत्र एवं निजी नलकूप की दरों में की गई वृद्धि को वापस लिया जाए। बिजली की दरों में कमी की जाए। देश के सात राज्यों के तर्ज पर उप्र के किसानों को बिजली सिंचाई के लिए नि:शुल्क प्रदान की जाए। सामान्य योजना के अंतर्गत निजी नलकूप के कनेक्शन में लाइन की लंबाई 300 मीटर से घटाकर 190 मीटर कर दी है, जिससे किसानों पर अत्यधिक भार बढ़ गया है। सामान्य योजना के अंतर्गत कनेक्शन पर दी जाने वाली सब्सिडी में वृद्धि की जाए। स्वीकृत सामान्य योजना के निजी नलकूप कनेक्शन का सामान दिया जाए। आलू की बिक्री 200 रुपये से लेकर 275 रुपये क्विंटल हो रही है, जिसमें किसान की लागत नहीं मिल पा रही है। एक हजार से 1200 रुपये प्रति क्विंटल का कोल्ड भाड़ा स्वयं सरकार वहन करे और आलू से संबंधित उद्योग लगाए जाएं, जिससे किसान खुशहाल रह सकें। इस मौके पर लोकेेश चौधरी, श्याम चौधरी, विजयशंकर सारस्वत, रामू चौधरी, भूपेंद्र सिंह, जमुना, चंद्रवीर प्रधान, नरेश, अनिल, कालूराम आदि मौजूद थे।
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