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हाथरस: सैन्यकर्मी की हत्या में सभी आरोपियों की गैंगस्टर कोर्ट से जमानत खारिज, हाईकोर्ट से मिल चुकी है जमानत

Sun, 23 Aug 2026 09:32 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Sun, 23 Aug 2026 09:32 PM IST
सार

सैन्यकर्मी की हत्या में हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद केके गौतम, विक्रम, गब्बर, यतेंद्र, बौबी उर्फ विशाल, सौरभ, भोला उर्फ विष्णु, राजा उर्फ राहुल, आशीष, अंकित, हेमेंद्र व रवि उर्फ गट्टो ने गैंगस्टर एक्ट में जमानत अर्जी दाखिल की थी।

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Gangster court denies bail to all accused in army personnel murder case
कोर्ट (प्रतीकात्मक फोटो) - फोटो : एएनआई

विस्तार

हाथरस के एडीजे / विशेष जज (गैंगस्टर एक्ट) की अदालत ने सैन्यकर्मी की हत्या के मुख्य आरोपी केके पंडित उर्फ केके गौतम और विक्रम उर्फ भिक्को सहित 12 अभियुक्तों की गैंगस्टर एक्ट में जमानत याचिका खारिज की है। इन सभी को सैन्यकर्मी की हत्या में हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है। 

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पांच फरवरी को सैन्यकर्मी अखिलेश निवासी समदपुर कोतवाली सादाबाद की विक्रम उर्फ भिक्को गिरोह के सदस्यों ने दिनदहाड़े गोलियां मारकर हत्या कर दी थी। मृतक की बहन डॉली कुमारी ने 10 नामजद और तीन अज्ञात के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने मुठभेड़ में आरोपियों को एक-एक कर पकड़ना शुरू किया, जिसमें उनके पैरों में गोलियां लगीं।  पुलिस की गोली से बचने के लिए केके पंडित और विक्रम प्रदेश छोड़कर भाग गए थे, जिन्हें हरियाणा पुलिस ने पकड़ा था और बी-वारंट पर दोनों को यहां लाया गया। पुलिस ने इस गिरोह के 14 सदस्यों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी रिपोर्ट दर्ज की थी।  
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सैन्यकर्मी की हत्या में हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद केके गौतम, विक्रम, गब्बर, यतेंद्र, बौबी उर्फ विशाल, सौरभ, भोला उर्फ विष्णु, राजा उर्फ राहुल, आशीष, अंकित, हेमेंद्र व रवि उर्फ गट्टो ने गैंगस्टर एक्ट में जमानत अर्जी दाखिल की थी। विशेष सत्र न्यायालय ने याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रिया-कलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 की धारा 19(4) के प्रावधानों का हवाला दिया। 
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अदालत ने कहा कि इस विशेष कानून के तहत जमानत पर रिहाई के लिए यह संतुष्ट होना आवश्यक है कि अभियुक्त के दोषी न होने का युक्तियुक्त आधार हो और जमानत पर रहते हुए उसके द्वारा पुनः अपराध न करने की संभावना हो। कोर्ट ने पाया कि पत्रावली पर ऐसा कोई पर्याप्त आधार अथवा साक्ष्य मौजूद नहीं है, जिससे यह स्पष्ट हो सके। तदनुसार, अदालत ने सभी 12 आरोपियों के जमानत प्रार्थनापत्र निरस्त कर दिए।

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