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Hathras News: गैंगवार..सामने आया जमीन और वर्चस्व की जंग का खूनी चेहरा
Sun, 21 Jun 2026 01:33 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Sun, 21 Jun 2026 01:33 AM IST
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प्रतीकात्मक चित्र।
- फोटो : Archive
हतीसा बाईपास स्थित कैलाश ढाबे के पास बृहस्पतिवार की शाम को हुई सनसनीखेज गैंगवार ने न केवल इलाके को दहला दिया है, बल्कि पुलिस और खुफिया एजेंसियों को भी नए सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया है। इस घटना से प्रॉपर्टी विवाद और वर्चस्व की जंग का खूनी चेहरा उजागर हो गया है।
इधर, पुलिस अधीक्षक के कड़े रुख के बाद पुलिस की आधा दर्जन टीमें आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए रातभर दबिश देती रहीं, लेकिन कोई आरोपी हत्थे नहीं चढ़ा है। इस गैंगवार ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश और विशेषकर हाथरस में सक्रिय अपराधियों के काम करने के तरीके में आए बड़े बदलाव को उजागर किया है।
गौरतलब है कि थार, स्कॉर्पियो और बुलेट सवार करीब 25 बदमाशों के बीच हुई 20 से 25 राउंड की ताबड़तोड़ फायरिंग ने नेशनल हाईवे (आगरा-अलीगढ़ हाईवे) पर कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ा दीं। राहगीरों ने गाड़ियां छोड़कर खेतों में भागकर जान बचाई। पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए हिस्ट्रीशीटर मोना ठाकुर सहित आठ नामजद और अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
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चौथ और रंगदारी का दौर हुआ पुराना
एक समय था, जब इसी गिरोह के सदस्य व्यापारियों, दुकानदारों या भट्ठा मालिकों से मासिक चौथ या रंगदारी वसूलते थे, लेकिन डिजिटल लेन-देन, सख्त पुलिसिंग और कानून के बढ़ते दायरे के कारण अब नकद रंगदारी वसूलना जोखिम भरा और कम मुनाफे वाला काम हो गया है, इसलिए गिरोह राजनीतिक संरक्षण में प्रॉपर्टी डीलिंग और लैंड ग्रैबिंग की ओर रुख कर चुके हैं।
जमीन के विवादों में बढ़ रहा बाहुबलियों का दखल
नए हाईवे बनने और जमीनों की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि के साथ ही पुराने शहर की विवादित संपत्तियों का मूल्य भी तेजी से बढ़ा है। इसका लाभ उठाने के लिए अपराधी अब सीधे जमीन संबंधी विवादों में हस्तक्षेप कर रहे हैं। वे विवादित जमीनों को डरा-धमकाकर औने-पौने दामों में खरीदते हैं और बाद में उन्हें ऊंचे दामों पर बेच देते हैं। इसके अलावा बड़े भूमाफिया के लिए बाहुबल के दम पर जमीनों पर कब्जा दिलाना भी उनका प्रमुख व्यवसाय बन गया है। हाल ही में हाईवे पर हुई गैंगवार के पीछे दबी जुबान में जिस प्रॉपर्टी विवाद और वर्चस्व की लड़ाई की चर्चा हो रही है, वह इसी नए अपराधी ट्रेंड की ओर संकेत करती है।
राजनीतिक-प्रशासनिक संरक्षण का खेल
इतने बड़े पैमाने पर हाईवे के किनारे जमीनों का अवैध खेल बिना किसी ऊंचे संरक्षण के संभव नहीं है। सूत्रों की मानें तो यह गिरोह राजनीतिक पैठ बना चुका है। समाज में अपना रसूख बनाए रखने के लिए गिरोह से जुड़े सदस्य राजनीतिक दलों के छोटे-बड़े नेताओं के साथ उठते-बैठते हैं। यही वजह है कि बिना झिझके दोनों ओर से कई राउंड फायरिंग हुई और पुलिस पर सिफारिशें पहुंचाना शुरू हो गईं।
शुरुआत में जमीन के विवाद की बात सामने आ रही थी, लेकिन अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है। दोनों गिरोह में पुरानी रंजिश चल रही है। पुलिस टीम लगातार दबिश दे रही हैं। जल्द ही अपराधी पुलिस की गिरफ्त में होंगे।
-हिमांशु माथुर, सीओ सिटी
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इधर, पुलिस अधीक्षक के कड़े रुख के बाद पुलिस की आधा दर्जन टीमें आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए रातभर दबिश देती रहीं, लेकिन कोई आरोपी हत्थे नहीं चढ़ा है। इस गैंगवार ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश और विशेषकर हाथरस में सक्रिय अपराधियों के काम करने के तरीके में आए बड़े बदलाव को उजागर किया है।
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गौरतलब है कि थार, स्कॉर्पियो और बुलेट सवार करीब 25 बदमाशों के बीच हुई 20 से 25 राउंड की ताबड़तोड़ फायरिंग ने नेशनल हाईवे (आगरा-अलीगढ़ हाईवे) पर कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ा दीं। राहगीरों ने गाड़ियां छोड़कर खेतों में भागकर जान बचाई। पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए हिस्ट्रीशीटर मोना ठाकुर सहित आठ नामजद और अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
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चौथ और रंगदारी का दौर हुआ पुराना
एक समय था, जब इसी गिरोह के सदस्य व्यापारियों, दुकानदारों या भट्ठा मालिकों से मासिक चौथ या रंगदारी वसूलते थे, लेकिन डिजिटल लेन-देन, सख्त पुलिसिंग और कानून के बढ़ते दायरे के कारण अब नकद रंगदारी वसूलना जोखिम भरा और कम मुनाफे वाला काम हो गया है, इसलिए गिरोह राजनीतिक संरक्षण में प्रॉपर्टी डीलिंग और लैंड ग्रैबिंग की ओर रुख कर चुके हैं।
जमीन के विवादों में बढ़ रहा बाहुबलियों का दखल
नए हाईवे बनने और जमीनों की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि के साथ ही पुराने शहर की विवादित संपत्तियों का मूल्य भी तेजी से बढ़ा है। इसका लाभ उठाने के लिए अपराधी अब सीधे जमीन संबंधी विवादों में हस्तक्षेप कर रहे हैं। वे विवादित जमीनों को डरा-धमकाकर औने-पौने दामों में खरीदते हैं और बाद में उन्हें ऊंचे दामों पर बेच देते हैं। इसके अलावा बड़े भूमाफिया के लिए बाहुबल के दम पर जमीनों पर कब्जा दिलाना भी उनका प्रमुख व्यवसाय बन गया है। हाल ही में हाईवे पर हुई गैंगवार के पीछे दबी जुबान में जिस प्रॉपर्टी विवाद और वर्चस्व की लड़ाई की चर्चा हो रही है, वह इसी नए अपराधी ट्रेंड की ओर संकेत करती है।
राजनीतिक-प्रशासनिक संरक्षण का खेल
इतने बड़े पैमाने पर हाईवे के किनारे जमीनों का अवैध खेल बिना किसी ऊंचे संरक्षण के संभव नहीं है। सूत्रों की मानें तो यह गिरोह राजनीतिक पैठ बना चुका है। समाज में अपना रसूख बनाए रखने के लिए गिरोह से जुड़े सदस्य राजनीतिक दलों के छोटे-बड़े नेताओं के साथ उठते-बैठते हैं। यही वजह है कि बिना झिझके दोनों ओर से कई राउंड फायरिंग हुई और पुलिस पर सिफारिशें पहुंचाना शुरू हो गईं।
शुरुआत में जमीन के विवाद की बात सामने आ रही थी, लेकिन अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है। दोनों गिरोह में पुरानी रंजिश चल रही है। पुलिस टीम लगातार दबिश दे रही हैं। जल्द ही अपराधी पुलिस की गिरफ्त में होंगे।
-हिमांशु माथुर, सीओ सिटी