ठंड में मौत से लड़ रहे बेसहारा परिवार
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हाथरस। सरकार ने बेशक खुले में रात बिताने वालों की सुरक्षा की जिम्मेदार जिला प्रशासन को दे रखी है, लेकिन जिले में ऐसे कई लोग और परिवार हैं, जोकि जानलेवा शीतलहर में भी खुले में रात बिताने को मजबूर हैं। इनकी हर रात मौत से जंग लड़ते हुए कट रही है, लेकिन कोई इनकी हालत पर तरस खाने वाला नहीं है। सरकारी मदद इनकी पहुंच से कोसों दूर है। न इनके पास सिर छिपाने को छत है और न हीं पेट भरने के लिए दो वक्त की रोटी। ऐसे में कब ठंड इन बेचारों की जिंदगी निगल जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। मुन्नालाल सरकारी तंत्र की उपेक्षा की ऐसी ही बानगी हैं। वह उन सरकारी योजनाओं की भी पोल खोल रहे हैं, जोकि उन जैसे लोगों की मदद के लिए बनी हैं।
मुसीबत के मारे मुन्नालाल बेचारे
हाथरस। कोलकाता से 20 साल पहले हाथरस काम की तलाश में आए मुन्नालाल को कोई ढंग का काम नहीं मिला। मजबूरन पल्लेदारी कर जीवन-यापन करने को मजबूर हैं। मुन्नालाल पिछले 20 साल से खुले आसमान के नीचे जिंदगी बसर कर रहे हैं। रोज की मजदूरी से वह केवल अपना पेट ही भर पाते हैं। इतने पैसे भी नहीं बचा सकते कि किराए पर मकान भी ले सकें। मधुगढ़ी के आसपास दुकानों के टिन शेड व रानी मिल कंपाउंड में उनका बसेरा होता है।
20 साल में भी नहीं मिली सरकारी मदद
लगभग 60 साल के मुन्ना लाल का अब शरीर भी जबाव दे गया है और मजदूरी भी नहीं कर पाते। आसपास के लोग ही उन्हें खाने-पीने का सामान उपलब्ध करा देते हैं। भीषण ठंड से बचने के लिए मुन्ना ने एक तख्त के ऊपर तिरपाल बांधकर अपना अस्थायी घर बना लिया है। दिन में मधुगढ़ी पंजाब बैंक मुख्य शाखा के सामने तो रात में बैंक के मुख्य द्वार पर अपने तिरपाल के नीचे सो जाते हैं। पिछले 20 साल से वह सरकारी इमदाद के मोहताज हैं, लेकिन अभी तक उन्हें कोई सरकारी इमदाद नहीं मिल सकी है। यदि आसपास के लोग उनकी सहायता नहीं करें तो भूख और ठंड उनकी जान ले सकती है।
कब काम आएंगे टाउनशिप के बंद घर
हाथरस। बसपा सरकार ने मुन्नालाल जैसे ही गरीब औ बेसहारा लोगों के लिए जलेसर रोड पर कांशीराम टाउनशिप का निर्माण कराया था। टाउनशिप के मकानों के आवंटन में खूब धांधली भी हुई। पात्रों को छोड़ कर अपात्रों को मकान आवंटित किए। इसी का नतीजा है कि आज वहां 1,500 मकानों में से लगभग 500 मकानों पर ताला लटका हुआ है और वहां कोई रहता भी नहीं है। प्रशासन यदि टाउनशिप में गंभीरता से चेकिंग अभियान चलाए तो सच्चाई भी सामने आ जाएगी।
ऐसे परिवारों और लोगों की मदद के लिए एसडीएम-तहसीलदारों को निर्देशित किया गया है। वह लोग जाकर इनके बारे में पता करें और उन्हें जरूरी राहत पहुंचाएं।
-शमीम अहमद, डीएम हाथरस