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फर्जीवाड़े में फंसे पूर्व तहसीलदार, कानूनगो और लेखपाल
अमर उजाला, हाथरस
Updated Wed, 18 Oct 2017 01:52 AM IST
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कर्मियों
- फोटो : amar Ujala
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सादाबाद तहसील के लेखपाल एवं तत्कालीन तहसीलदार द्वारा अनुसूचित जाति के व्यक्ति की जमीन को नियम विरुद्ध ढंग से सामान्य जाति को बिक्री करने की परमीशन देने और फिर उसे निरस्त करने के मामले में सादाबाद के तत्कालीन तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और लेखपाल फंस गए हैं। शिकायत मिलने पर डीएम ने एडीएम से जांच कराई तो इस कारगुजारी की पोल खुल गई। एडीएम की जांच रिपोर्ट पर डीएम ने प्रभारी राजस्व निरीक्षक और लेखपाल को निलंबित कर दिया है, जबकि तत्कालीन तहसीलदार के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी गई है। इस खुलासे से राजस्व विभाग में खलबली मच गई है।
इस प्रकरण की शिकायत कमलेश देवी निवासी एफ-2 बालाजीपुरम थाना हाइवे तहसील और जिला मथुरा ने जिलाधिकारी को सौंपी थी। इसमें आरोप था कि एक भूमाफिया द्वारा भूमि स्वामी विमला देवी पत्नी ओमप्रकाश एवं लेखपाल, कानूनगो एवं तहसीलदार ने आपस में मिलकर षड्यंत्र रचा। इन लोगों ने शिकायतकर्ता को विश्वास में लेकर जानबूझकर जाटव जाति की महिला विमला देवी की जमीन को बेचने की फर्जी परमीशन प्रशासन से दिलाकर शिकायतकर्ता के नाम रजिस्ट्री करा दी। इसके बदले में उससे 41 लाख रुपये भी जमीन बेचने वालों ने ले लिए। इस जमीन की तहसीलदार ने एक मार्च 2014 को दाखिल-खारिज भी कर दी।
इसके कुछ दिनों के बाद फिर से इन लोगों ने इस जमीन की फर्जी परमीशन की शिकायत करते हुए तहसील दिवस में शिकायत की, जिसमें जांच के बाद तत्कालीन तहसीलदार सादाबाद ने इस जमीन की दाखिल-खारिज निरस्त कर दी और जमीन को फिर से विक्रेता महिला के नाम दर्ज कर दिया। जमीन खरीदने वाली महिला कमलेश देवी ने इसकी शिकायत डीएम से की तो डीएम ने एडीएम से इसकी जांच कराई। एडीएम ने जांच के बाद जो रिपोर्ट डीएम को सौंपी है, उसमें प्रथमदृष्टया लेखपाल गुलवीर सिंह, प्रभारी राजस्व निरीक्षक सतेंद्र सिंह और तत्कालीन तहसीलदार द्वारा 27 दिसंबर 2013 को पेश की गई जांच आख्या के आधार पर 30 दिसंबर 2013 को अनुमति जारी कराने और दोबारा 15 जनवरी 2015 को अनुमति निरस्त करने के लिए आख्या प्रस्तुत करने का जिम्मेदार माना गया है।
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एडीएम ने कहा है कि इन अधिकारी व कर्मियों द्वारा अपनी पदीय दायित्व के प्रति लापरवाही बरतने के कारण फर्जी अभिलेखों के आधार पर जारी कराई गई अनुमति में सही जांच नहीं की गई, जिसके लिए लेखपाल, प्रभारी राजस्व निरीक्षक और तत्कालीन तहसीलदार प्रथमदृष्टया दोषी हैं। डीएम अमित कुमार सिंह ने एसडीएम सादाबाद को लेखपाल व प्रभारी राजस्व निरीक्षक को दोषी पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए उन्हें अवगत कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने आयुक्त एवं सचिव राजस्व परिषद को भी तत्कालीन तहसीलदार रामजीवन वर्मा के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए रिपोर्ट भेजी है। डीएम के इस कदम से प्रशासनिक हलकों में खलबली मच गई है।
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इस प्रकरण की शिकायत कमलेश देवी निवासी एफ-2 बालाजीपुरम थाना हाइवे तहसील और जिला मथुरा ने जिलाधिकारी को सौंपी थी। इसमें आरोप था कि एक भूमाफिया द्वारा भूमि स्वामी विमला देवी पत्नी ओमप्रकाश एवं लेखपाल, कानूनगो एवं तहसीलदार ने आपस में मिलकर षड्यंत्र रचा। इन लोगों ने शिकायतकर्ता को विश्वास में लेकर जानबूझकर जाटव जाति की महिला विमला देवी की जमीन को बेचने की फर्जी परमीशन प्रशासन से दिलाकर शिकायतकर्ता के नाम रजिस्ट्री करा दी। इसके बदले में उससे 41 लाख रुपये भी जमीन बेचने वालों ने ले लिए। इस जमीन की तहसीलदार ने एक मार्च 2014 को दाखिल-खारिज भी कर दी।
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इसके कुछ दिनों के बाद फिर से इन लोगों ने इस जमीन की फर्जी परमीशन की शिकायत करते हुए तहसील दिवस में शिकायत की, जिसमें जांच के बाद तत्कालीन तहसीलदार सादाबाद ने इस जमीन की दाखिल-खारिज निरस्त कर दी और जमीन को फिर से विक्रेता महिला के नाम दर्ज कर दिया। जमीन खरीदने वाली महिला कमलेश देवी ने इसकी शिकायत डीएम से की तो डीएम ने एडीएम से इसकी जांच कराई। एडीएम ने जांच के बाद जो रिपोर्ट डीएम को सौंपी है, उसमें प्रथमदृष्टया लेखपाल गुलवीर सिंह, प्रभारी राजस्व निरीक्षक सतेंद्र सिंह और तत्कालीन तहसीलदार द्वारा 27 दिसंबर 2013 को पेश की गई जांच आख्या के आधार पर 30 दिसंबर 2013 को अनुमति जारी कराने और दोबारा 15 जनवरी 2015 को अनुमति निरस्त करने के लिए आख्या प्रस्तुत करने का जिम्मेदार माना गया है।
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एडीएम ने कहा है कि इन अधिकारी व कर्मियों द्वारा अपनी पदीय दायित्व के प्रति लापरवाही बरतने के कारण फर्जी अभिलेखों के आधार पर जारी कराई गई अनुमति में सही जांच नहीं की गई, जिसके लिए लेखपाल, प्रभारी राजस्व निरीक्षक और तत्कालीन तहसीलदार प्रथमदृष्टया दोषी हैं। डीएम अमित कुमार सिंह ने एसडीएम सादाबाद को लेखपाल व प्रभारी राजस्व निरीक्षक को दोषी पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए उन्हें अवगत कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने आयुक्त एवं सचिव राजस्व परिषद को भी तत्कालीन तहसीलदार रामजीवन वर्मा के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए रिपोर्ट भेजी है। डीएम के इस कदम से प्रशासनिक हलकों में खलबली मच गई है।