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Hathras News: उड़नपरी मोनी सिखा रही हैं बेटियों को दौड़ के गुर
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जनपद में उड़नपरी के नाम से पहचान बना चुकीं मुरसान निवासी धाविका मोनी यादव अब छात्राओं को दौड़ के लिए प्रेरित कर रही हैं। कक्षा पांच से एथलेटिक्स की शुरुआत करने वाली मोनी ने प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हाथरस का नाम रोशन किया है।
मोनी यादव ने प्रदेश स्तरीय एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में 100 और 200 मीटर की दौड़ में शीर्ष तीन में स्थान हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। गाजियाबाद पुलिस लाइन में आयोजित प्रदेश स्तरीय क्रीड़ा महोत्सव में उन्होंने मशाल लेकर दौड़ लगाई थी। इसके बाद विश्वविद्यालय स्तर पर कई दौड़ प्रतियोगिताएं जीतते हुए उन्होंने राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी जनपद का प्रतिनिधित्व किया।
लगातार प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाली मोनी को कोरोना काल के दौरान प्रतियोगिताएं बंद होने के कारण ब्रेक लेना पड़ा, लेकिन खेल से उनका जुड़ाव कभी खत्म नहीं हुआ। वर्तमान में वह आरपीएम महाविद्यालय में शारीरिक शिक्षा अध्यापक हैं और छात्राओं को दौड़ सहित विभिन्न खेलों का प्रशिक्षण दे रही हैं।
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उनका कहना है कि खेल प्राधिकरण स्तर पर उन्हें भेदभाव का भी सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि कानपुर में आयोजित 400 मीटर दौड़ में प्रथम आने के बावजूद उन्हें विजेता घोषित नहीं किया गया, जिससे वह आहत हुईं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। आज वह खेल शिक्षक के रूप में छात्राओं को आगे बढ़ने की राह दिखा रही हैं।
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मोनी यादव ने प्रदेश स्तरीय एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में 100 और 200 मीटर की दौड़ में शीर्ष तीन में स्थान हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। गाजियाबाद पुलिस लाइन में आयोजित प्रदेश स्तरीय क्रीड़ा महोत्सव में उन्होंने मशाल लेकर दौड़ लगाई थी। इसके बाद विश्वविद्यालय स्तर पर कई दौड़ प्रतियोगिताएं जीतते हुए उन्होंने राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी जनपद का प्रतिनिधित्व किया।
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लगातार प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाली मोनी को कोरोना काल के दौरान प्रतियोगिताएं बंद होने के कारण ब्रेक लेना पड़ा, लेकिन खेल से उनका जुड़ाव कभी खत्म नहीं हुआ। वर्तमान में वह आरपीएम महाविद्यालय में शारीरिक शिक्षा अध्यापक हैं और छात्राओं को दौड़ सहित विभिन्न खेलों का प्रशिक्षण दे रही हैं।
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उनका कहना है कि खेल प्राधिकरण स्तर पर उन्हें भेदभाव का भी सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि कानपुर में आयोजित 400 मीटर दौड़ में प्रथम आने के बावजूद उन्हें विजेता घोषित नहीं किया गया, जिससे वह आहत हुईं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। आज वह खेल शिक्षक के रूप में छात्राओं को आगे बढ़ने की राह दिखा रही हैं।