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Hathras News: अदालत में गवाहों के मुकरने से दोष मुक्त हुए पांच आरोपी
Thu, 15 Oct 2026 02:57 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Thu, 15 Oct 2026 02:57 AM IST
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प्रतीकात्मक चित्र।
- फोटो : Archive
एडीजे विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट कोर्ट ने सादाबाद के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने पर्याप्त साक्ष्य और गवाहों के मुकर जाने के कारण पांचों अभियुक्तों को एससी-एसटी एक्ट समेत अन्य धाराओं के आरोपों से दोषमुक्त कर दिया है।
शिवकुमार ने कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराते हुए कहा था कि 15 मार्च 2025 को वह अपने पड़ोसी कुनाल चौधरी के साथ मोटरसाइकिल से पेट्रोल डलवाने जा रहा था। आरोप था कि पथवारी मोड़ पर मुख्य रास्ते पर डीजे लगाकर प्रशांत, दीपक, मनोज, दिनेश और हेमंत निवासी बिसावर होली खेल रहे थे। रास्ता मांगने पर आरोपियों ने जातिसूचक शब्द कहकर अपमानित किया।
विरोध करने पर ईंट, पत्थर व सरिया से पीटा और बीच-बचाव करने आए अन्य लोगों को भी घायल कर दिया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ बीएनएस और एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया था। विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल चार गवाह कोर्ट में परीक्षित कराए गए। ये चारों मुख्य गवाह अपने बयानों से मुकर गए और उन्हें पक्षद्रोही घोषित किया गया। गवाहों ने न्यायालय को बताया कि घटना वाले दिन रास्ते में कीचड़ और मिट्टी होने के कारण उनकी मोटरसाइकिलें आपस में फिसलकर गिर गई थीं, जिससे उन्हें हल्की-फुल्की चोटें आई थीं।
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वादी ने यह भी स्वीकार किया कि वह पढ़ा-लिखा नहीं है और भीड़ में किसी ने तहरीर पर उसके हस्ताक्षर करा लिए थे। आरोपियों को दोष मुक्त करते हुए कोर्ट ने बीएनएसएस की धारा 383(1) के तहत पृथक प्रकीर्ण वाद पंजीकृत कर नोटिस जारी करने के आदेश दिए। साथ ही वादी को निर्देशित किया गया है कि यदि उसे एससी-एसटी एक्ट के प्रावधानों के तहत सरकार की ओर से कोई आर्थिक सहायता या अनुदान धनराशि प्राप्त हुई है, तो वह एक महीने के भीतर जिला समाज कल्याण विभाग में उसे वापस जमा कराए।
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शिवकुमार ने कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराते हुए कहा था कि 15 मार्च 2025 को वह अपने पड़ोसी कुनाल चौधरी के साथ मोटरसाइकिल से पेट्रोल डलवाने जा रहा था। आरोप था कि पथवारी मोड़ पर मुख्य रास्ते पर डीजे लगाकर प्रशांत, दीपक, मनोज, दिनेश और हेमंत निवासी बिसावर होली खेल रहे थे। रास्ता मांगने पर आरोपियों ने जातिसूचक शब्द कहकर अपमानित किया।
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विरोध करने पर ईंट, पत्थर व सरिया से पीटा और बीच-बचाव करने आए अन्य लोगों को भी घायल कर दिया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ बीएनएस और एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया था। विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल चार गवाह कोर्ट में परीक्षित कराए गए। ये चारों मुख्य गवाह अपने बयानों से मुकर गए और उन्हें पक्षद्रोही घोषित किया गया। गवाहों ने न्यायालय को बताया कि घटना वाले दिन रास्ते में कीचड़ और मिट्टी होने के कारण उनकी मोटरसाइकिलें आपस में फिसलकर गिर गई थीं, जिससे उन्हें हल्की-फुल्की चोटें आई थीं।
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वादी ने यह भी स्वीकार किया कि वह पढ़ा-लिखा नहीं है और भीड़ में किसी ने तहरीर पर उसके हस्ताक्षर करा लिए थे। आरोपियों को दोष मुक्त करते हुए कोर्ट ने बीएनएसएस की धारा 383(1) के तहत पृथक प्रकीर्ण वाद पंजीकृत कर नोटिस जारी करने के आदेश दिए। साथ ही वादी को निर्देशित किया गया है कि यदि उसे एससी-एसटी एक्ट के प्रावधानों के तहत सरकार की ओर से कोई आर्थिक सहायता या अनुदान धनराशि प्राप्त हुई है, तो वह एक महीने के भीतर जिला समाज कल्याण विभाग में उसे वापस जमा कराए।