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Hathras News: निराश्रित छुट्टा गौवंश का खौफ, घरों में कैद हो रहे लोग, कह रहे जिम्मेदार मौन है, तो हम कहां जाएं

Thu, 31 Aug 2023 05:43 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: चमन शर्मा Updated Thu, 31 Aug 2023 05:43 PM IST
सार

कुछ गोवंश बेकाबू हो गए हैं। कई परिजन डर के मारे बच्चों को घर से बाहर खेलने के लिए नहीं भेज रहे हैं। शाम को बुजुर्ग लोग सड़क पर टहलने से भी डरते हैं। लोगों ने बताया कि कई बार तो लावारिस गोवंश लड़ते-लड़ते बाहर खड़ी गाड़ियों में जाकर घुस जाते हैं, जिससे गाड़ी को नुकसान होता है। इतना ही नहीं कई बार पीछे से आकर लोगों को गिरा देते हैं।

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Fear of destitute cow dynasty, people being imprisoned in homes
बेकाबू निराश्रित गोवंश को पकड़ने की कोशिश करते गौ सेवा मिशन मीतई के गौसेवक - फोटो : संवाद

विस्तार

हाथरस के चंदपा में मीतई के लोगों के बीच निराश्रित गोवंश का खौफ बना हुआ है। अब तो आलम यह है कि लोग बेकाबू निराश्रित गोवंश के खौफ से, उसे देखते ही घरों में घुस जाते हैं। पता नहीं कब और कौन कहां दुर्घटना का शिकार बन जाए। लोगों का कहना है कि जिम्मेदार मौन है, तो हम कहां जाएं।

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चंदपा क्षेत्र के मीतई क्षेत्र में छुट्टा गोवंश का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले सप्ताह में कई लोगों को इनके द्वारा घायल किया जा चुका है। क्षेत्र के लोग ऐसे गोवंशों को लेकर बहुत परेशान हैं। इनमें से कुछ गोवंश बेकाबू हो गए हैं। कई परिजन डर के मारे बच्चों को घर से बाहर खेलने के लिए नहीं भेज रहे हैं। शाम को बुजुर्ग लोग सड़क पर टहलने से भी डरते हैं। 
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लोगों ने बताया कि कई बार तो लावारिस गोवंश लड़ते-लड़ते बाहर खड़ी गाड़ियों में जाकर घुस जाते हैं, जिससे गाड़ी को नुकसान होता है। इतना ही नहीं कई बार पीछे से आकर लोगों को गिरा देते हैं। कई बार तो घर के मुख्य गेट पर बैठ जाते हैं। जब लोग गोवंशों को हटाने का प्रयास करते हैं तो गोवंश उनको मारने के लिए दौड़ते हैं। 
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लोगों ने कहना कि प्रारंभ में प्रदेश सरकार ने ऐसे गोवंशों को पकड़कर गोशालाओं में डालने का अच्छा कार्य किया था। तब लग रहा था कि सरकार अच्छा काम रही है। अब वो गोवंश वापस खुले में घूम रहे हैं। उन्होंने लावारिस गोवंशों को पकड़ कर गोशालाओं में डाले जाने की मांग की। लावारिस गोवंश लोगों के लिए खतरा साबित हो रहे हैं। 

सरकार लाखों रुपए प्रति माह गौशालाओं पर खर्च कर रही है। साथ ही सरकार की मंशा थी कि निराश्रित घूम रहे गोवंशों को गौशालाओं में भेजा जाए। बावजूद इसके गोशालाएं लावारिस गोवंशों को नहीं रख रही। लेकिन सरकार के आदेश का ही जिम्मेदार पालन नहीं कर रहे हैं। - गोपाल शर्मा, क्षेत्रवासी
गांव में बच्चों घर से बाहर खेलने भेजने से डर सताने लगा है। अब कोई न कोई बेकाबू सांड का शिकार बन रहा है। इसलिए उसे देखते ही लोगों का आलम यह है कि लोग घर में घुसकर अपनी जान बचाते हैं। बच्चों का भी इनकी चपेट में आने का डर बना रहता है। प्रशासन से हम मांग करते हैं कि इन गोवंशों को गोशालाओं में डाला जाए ताकि लोग आराम से रह सकें। - अरविंद कटारा, क्षेत्रवासी


क्षेत्र में सांडों के झुंड के झुंड खड़े रहते हैं। सुबह शाम महिलाएं और बुजुर्ग बाहर घूमने के लिए जाते हैं। पीछे से आकर कभी भी वो मार देते हैं। कई बार तो वो लड़ाई करने लगते हैं जिससे अपने आप को भाग कर बचाना पड़ता है। कई बार लड़ते लड़ते वाहनों को ही छतिग्रस्त कर देते हैं। - वेदप्रकाश शर्मा उर्फ विक्कू, क्षेत्रवासी

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