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Hathras News: दहेज हत्या में पिता-पुत्र को सात साल की कैद
Sun, 29 Mar 2026 02:21 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Sun, 29 Mar 2026 02:21 AM IST
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प्रतीकात्मक चित्र।
- फोटो : Samvad
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश माधवी सिंह की कोर्ट ने दहेज हत्या के 15 साल पुराने मामले में जेठ व ससुर को दोष सिद्ध करते हुए सात-सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। महिला का अतिरिक्त दहेज के लिए महिला उत्पीड़न किया गया था, जिसके चलते उसकी मौत हुई।
आगरा के एत्मादपुर क्षेत्र के गांव मितावली निवासी सुरेशचंद्र ने 13 मई 2011 को कोतवाली हाथरस गेट में दहेज हत्या व दहेज उत्पीड़न की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सुरेश ने एफआईआर में बताया था कि उन्होंने अपनी बेटी किरन देवी की शादी 21 नवंबर 2007 को जितेंद्र उर्फ जीतम पुत्र प्रभुदयाल निवासी गढ़ी गिरधर से की थी। ससुराल वाले दहेज से संतुष्ट नहीं थे।
अतिरिक्त दहेज के लिए पति जितेंद्र, जेठ बहादुर सिंह, ससुर प्रभुदयाल, सास रामश्री व परिवार के अन्य लोग आए दिन उसका मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न करते थे, जिससे परेशान होकर वह 12 मई 2011 को बेटी को लेने पहुंचे थे, लेकिन ससुरालियों ने बेटी को नहीं भेजा। 13 मई की सुबह जानकारी मिली कि उनकी बेटी की मौत हो गई। मायके वालों को जिला अस्पताल में किरन का शव मिला था।
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प्रकरण में विवेचना करते हुए पुलिस ने जितेंद्र, बहादुर, प्रभुदयाल व रामश्री के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। प्रकरण विचारण के लिए एडीजी एफटीसी कोर्ट द्वितीय में पहुंचा। विचारण के दौरान ही रामश्री की मौत हो गई थी। पति जितेंद्र की भी मृत्यु की जानकारी न्यायालय को दी गई थी। अभियुक्त बहादुर सिंह ने मृत्यु प्रमाण पत्र की छाया प्रति भी लगाई थी, लेकिन उससे यह साबित नहीं हो सका कि जितेंद्र की मृत्यु हो चुकी है। इसलिए न्यायालय ने उसकी फाइल पृथक कर दी।
शनिवार को एडीजे माधवी सिंह ने बहादुर व प्रभुदयाल की फाइल पर सुनवाई करते हुए अंतिम निर्णय दिया। गवाह व सबूतों के आधार पर दोनों पर आरोप सिद्ध पाए गए। न्यायालय ने मृतका के जेठ बहादुर व ससुर प्रभुदयाल को दहेज हत्या में सात-सात साल कठोर कारावास की सजा सुनाई। दहेज उत्पीड़न में दो साल की कैद व एक-एक हजार रुपये जुर्माना तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम में दो साल की कैद व एक-एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
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आगरा के एत्मादपुर क्षेत्र के गांव मितावली निवासी सुरेशचंद्र ने 13 मई 2011 को कोतवाली हाथरस गेट में दहेज हत्या व दहेज उत्पीड़न की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सुरेश ने एफआईआर में बताया था कि उन्होंने अपनी बेटी किरन देवी की शादी 21 नवंबर 2007 को जितेंद्र उर्फ जीतम पुत्र प्रभुदयाल निवासी गढ़ी गिरधर से की थी। ससुराल वाले दहेज से संतुष्ट नहीं थे।
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अतिरिक्त दहेज के लिए पति जितेंद्र, जेठ बहादुर सिंह, ससुर प्रभुदयाल, सास रामश्री व परिवार के अन्य लोग आए दिन उसका मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न करते थे, जिससे परेशान होकर वह 12 मई 2011 को बेटी को लेने पहुंचे थे, लेकिन ससुरालियों ने बेटी को नहीं भेजा। 13 मई की सुबह जानकारी मिली कि उनकी बेटी की मौत हो गई। मायके वालों को जिला अस्पताल में किरन का शव मिला था।
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प्रकरण में विवेचना करते हुए पुलिस ने जितेंद्र, बहादुर, प्रभुदयाल व रामश्री के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। प्रकरण विचारण के लिए एडीजी एफटीसी कोर्ट द्वितीय में पहुंचा। विचारण के दौरान ही रामश्री की मौत हो गई थी। पति जितेंद्र की भी मृत्यु की जानकारी न्यायालय को दी गई थी। अभियुक्त बहादुर सिंह ने मृत्यु प्रमाण पत्र की छाया प्रति भी लगाई थी, लेकिन उससे यह साबित नहीं हो सका कि जितेंद्र की मृत्यु हो चुकी है। इसलिए न्यायालय ने उसकी फाइल पृथक कर दी।
शनिवार को एडीजे माधवी सिंह ने बहादुर व प्रभुदयाल की फाइल पर सुनवाई करते हुए अंतिम निर्णय दिया। गवाह व सबूतों के आधार पर दोनों पर आरोप सिद्ध पाए गए। न्यायालय ने मृतका के जेठ बहादुर व ससुर प्रभुदयाल को दहेज हत्या में सात-सात साल कठोर कारावास की सजा सुनाई। दहेज उत्पीड़न में दो साल की कैद व एक-एक हजार रुपये जुर्माना तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम में दो साल की कैद व एक-एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।