पूस की रात: एक हाथ में टॉर्च, दूसरे में लाठी... ठंड में फसल बचाएं या जान, मजबूर हैं किसान
किसानों ने खेतों के चारों ओर लोहे के तारों से तारबंदी की हुई है, कुछ ने तो अपने खेत की मेड़ों पर लोहे की टिनशेड भी लगा दी है, लेकिन पशुओं का झुंड इन्हें तोड़कर खेत में घुस जाता है और फसल नष्ट कर देता हैं। इसलिए जागकर पहरा देना पड़ा रहा है।
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हड्डियां कंपाकंपा देने वाली पूस की रात, सर्दी में एक हाथ में टार्च और दूसरे में लाठी लेकर निराश्रित पशुओं के झुंड से फसल बचाने के लिए रातभर किसान जागकर पहरा और हाका देते हैं। सर्दी में ठंड लगने और पशुओं के हमला करने का भी अंदेशा बना रहता है। किसानों का कहना है कि फसल बचाए या जान, यह चिंता रहती है, लेकिन क्या करें मजबूरी हैं।
सादाबाद क्षेत्र के बिसावर, कुरसंडा, भुर्रका, नौगांव, एदलपुर, मई, सरौठ, कजरौठी आदि गांव में इन दिनों निराश्रित पशुओं के झुंड से किसान परेशान हैं। किसानों ने खेतों के चारों ओर लोहे के तारों से तारबंदी की हुई है, कुछ ने तो अपने खेत की मेड़ों पर लोहे की टिनशेड भी लगा दी है, लेकिन पशुओं का झुंड इन्हें तोड़कर खेत में घुस जाता है और फसल नष्ट कर देता हैं। इसलिए जागकर पहरा देना पड़ा रहा है। परिवार के पुरुष सदस्य बारी-बारी से जागकर पहरा देते हैं।
जानवरों का पूरा झुंड है, एक तरफ से भगाया जाए तो दूसरी तरफ चला जाता है। यह सिलसिला 24 घंटे चलता है। फसल बचाना बड़ी चुनौती है।-कालू सिंह, गांव बिलारा।
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अलाव जलाकर रात में फसलों की रखवाली करनी पड़ रही है। कई बार जानवरों से सामना हो जाता है। खेती ही गुजारे का सहारा है, क्या उसे बचाना मजबूरी है।-निहाल सिंह, नगला गूलर।
खेती करना आसान नहीं है। प्रकृति की मार से बच भी जाए तो फसल पशुओं की भेंट चढ़ जाती है। परिवार के सभी सदस्य रखवाली में जुटे हुए हैं।-शिवराज सिंह, नगला गूलर।
निराश्रित गोवंश को गोशालाओं में संरक्षित किया जा रहा है, जहां कहीं भी गोवंश घूमते हुए दिखाई दे रहे हैं। वहां से उन्हें कैटल कैचर के जरिये पकड़कर गोशालाओं तक लाया जा रहा है।-सुरेश कुमार, बीडीओ सादाबाद।
चोरी की घटनाएं रोकने के लिए थाना प्रभारियों को सतर्क किया गया है। क्षेत्र में पेट्रोलिंग बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। एंटी थेफ्ट टीम व स्वाट टीम को इन घटनाओं के पर्दाफाश के लिए लगाया है।-चिरंजीवनाथ सिन्हा, एसपी
कोहरे में टॉर्च की रोशनी भी तोड़ रही दम
सुबह करीब 5:00 बजे गांव नगला मान सहाय में खेत की रखवाली कर रहे गोपाल ने बताया कि घने कोहरे के कारण टाॅर्च की रोशनी भी दम तोड़ रही है। इतनी कड़ाके की ठंड में पूरी रात जागकर फसलों की रक्षा करनी पड़ेगी। पशुओं का झुंड हमलावर हो जाए तो भागकर जान बचानी पड़ती है।
नहीं रुकी चोरी तो नलकूपों पर ही सोने लगे किसान
जानवर फसल चौपट कर रहे हैं तो चोर खेतों में लगे नलूकपों से कीमती सामान चोरी कर रहे हैं। लगातार घटनाओं से परेशान किसान नलकूप पर ही सोने लगे हैं। बुधवार की रात भी गांव रोहई में एक नलकूप से चोरी कर लिया गया। किसान महेश पाठक बृहस्पतिवार की सुबह अपने खेत पर पहुंचे तो नलकूप का गेट खुला देखा। ताला तोड़कर चोर नलकूप से इन्वर्टर, बैटरी, दो स्टार्टर, केबल और कमरे में रखा लोहे का कबाड़ की चोरी कर ले गए। काफी संख्या में ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए और मौके पर पहुंची पुलिस से रोष व्यक्त किया। करीब 15 दिन पहले भी गांव रोहई, चितावर, पाराशर व नगला मंशा किसानों ने थाने रोष व्यक्त किया था।
किसान महेश पाठक का कहना है कि वह रात में रोज ही नलकूप की रखवाली कर रहे हैं, बुधवार को तबीयत खराब होने के कारण खेत में नहीं आ सके, सुबह देखा तो चोरी हो गई। किसान छोटू पचौरी का कहना है कि पुलिस कुछ नहीं कर रही हैं, ऐसे में किसानों को खुद ही रखवाली करनी पड़ रही है। किसान नरेश रावत और भानू पचौरी का भी यही कहना है कि कई नलकूपों से स्टार्टर व केबल चोरी हो चुके हैं। मजबूरी में रात में नलकूप पर ही रहना पड़ रहा है।