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ऑक्सीजन की कमी से निजी अस्पतालों में नहीं हो पा रहा गंभीर मरीजों का इलाज
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संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
प्रशासन व चिकित्सा विभाग भले ही ऑक्सीजन की किल्लत न होने का दावा करे लेकिन स्थिति कुछ अलग ही है। ऑक्सीजन की किल्लत के चलते प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों का उपचार नहीं हो पा रहा। रोजाना गंभीर मरीजों को वहां से वापस भेजा जा रहा है।
जिला अस्पताल की ओपीडी बंद है और कई नामचीन अस्पतालों ने भी ओपीडी बंद कर रखी है। कुछ नर्सिंग होम में मरीज देखे जा रहे हैं तो वहां ऑक्सीजन की किल्लत पैदा हो गई है। जिले के पूर्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रामवीर सिंह का जलेसर रोड पर नर्सिंग होम है। उनका कहना है कि उनके नर्सिंग होम पर करीब दस दिन से ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं है।
ऐसे में रोजाना दस से 15 तक गंभीर मरीजों को यहां से उपचार के लिए बाहर भेज दिया जाता है। जब मरीज की हालत नाजुक हो तो उसे ऑक्सीजन की जरूरत होती है। उनका कहना है कि सरकारी अस्पतालों की ओपीडी को चालू किया जाना चाहिए, जिससे कि अन्य मरीजों का भी वहां उपचार हो सके।
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उनका कहना है कि कोरोना के अलावा और भी बीमारियां हैं, जिनसे मरीज जूझ रहा है। इनका ज्यादातर नर्सिंग होमों पर उपचार भी उपलब्ध है लेकिन जब ऑक्सीजन ही उपलब्ध नहीं होगी तो फिर आखिर इन बीमारियों का उपचार कैसे होगा। इसलिए प्राइवेट अस्पतालों, जोकि कोविड अस्पताल नहीं है, वहां भी ऑक्सीजन की उपलब्धता होनी चाहिए।
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प्रशासन व चिकित्सा विभाग भले ही ऑक्सीजन की किल्लत न होने का दावा करे लेकिन स्थिति कुछ अलग ही है। ऑक्सीजन की किल्लत के चलते प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों का उपचार नहीं हो पा रहा। रोजाना गंभीर मरीजों को वहां से वापस भेजा जा रहा है।
जिला अस्पताल की ओपीडी बंद है और कई नामचीन अस्पतालों ने भी ओपीडी बंद कर रखी है। कुछ नर्सिंग होम में मरीज देखे जा रहे हैं तो वहां ऑक्सीजन की किल्लत पैदा हो गई है। जिले के पूर्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रामवीर सिंह का जलेसर रोड पर नर्सिंग होम है। उनका कहना है कि उनके नर्सिंग होम पर करीब दस दिन से ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं है।
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ऐसे में रोजाना दस से 15 तक गंभीर मरीजों को यहां से उपचार के लिए बाहर भेज दिया जाता है। जब मरीज की हालत नाजुक हो तो उसे ऑक्सीजन की जरूरत होती है। उनका कहना है कि सरकारी अस्पतालों की ओपीडी को चालू किया जाना चाहिए, जिससे कि अन्य मरीजों का भी वहां उपचार हो सके।
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उनका कहना है कि कोरोना के अलावा और भी बीमारियां हैं, जिनसे मरीज जूझ रहा है। इनका ज्यादातर नर्सिंग होमों पर उपचार भी उपलब्ध है लेकिन जब ऑक्सीजन ही उपलब्ध नहीं होगी तो फिर आखिर इन बीमारियों का उपचार कैसे होगा। इसलिए प्राइवेट अस्पतालों, जोकि कोविड अस्पताल नहीं है, वहां भी ऑक्सीजन की उपलब्धता होनी चाहिए।