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प्रसाद में पी गई शराब बनी काल, गांव में हाहाकार
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संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
सिंगी समाज के लोगों में कुलदेवता को खुश करने के लिए शराब की धार चढ़ाने का रिवाज है। इसी परंपरा के तहत दफनगाह में नगला सिंगी और नगला प्रहलाद के करीब डेढ़ दर्जन लोगों ने सैयद बाबा पीर की पूजा की, लेकिन प्रसाद के रूप में दी गई शराब को पीने के बाद सभी लोग बीमार पड़ गए और गांव में हाहाकार मच गया। देखते ही देखते छह लोगों की मौत हो गई, जबकि कुलदेवता की पूजा खुशहाली के लिए की गई थी, लेकिन यहां के लोगों की खुशी शराब पीने के बाद मातम में बदल गई।
कोतवाली हाथरस गेट क्षेत्र के नगला सिंगी के लोग करीब पांच पीढ़ियों से यहां पर रह रहे हैं। तभी से वह कुल देवता के रूप में सैयद बाबा पीर की पूजा भी दफनगाह में करते आ रहे हैं। यह पूजा महामारी के वक्त करते हैं या फिर परिवार में कोई खुशी हो, तब कुल देवता की पूजा की जाती है।
इसकी जानकारी देते हुए नगला प्रहलाद निवासी जयपाल सिंह ने बताया कि उनके पूर्वज पहले से सैयद बाबा को मनाते आ रहे हैं। शराब की धार चढ़ाने का चलन है, क्योंकि कोई देवता खीर-पूरी से मानते हैं तो किसी देवता को शराब से मनाया जाता है।
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कोई बच्चा अगर बीमार हो जाता है तो उसे हम देवता के नाम का प्रसाद बांट देते हैं तो घर में आई परेशानी दूर हो जाती है, लेकिन यहां तो सबकुछ उल्टा हो गया। कुल देवता की पूजा के बाद शराब पीने के बाद सभी बीमार हो गए और फिर छह लोगों की मौत हो गई।
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सिंगी समाज के लोगों में कुलदेवता को खुश करने के लिए शराब की धार चढ़ाने का रिवाज है। इसी परंपरा के तहत दफनगाह में नगला सिंगी और नगला प्रहलाद के करीब डेढ़ दर्जन लोगों ने सैयद बाबा पीर की पूजा की, लेकिन प्रसाद के रूप में दी गई शराब को पीने के बाद सभी लोग बीमार पड़ गए और गांव में हाहाकार मच गया। देखते ही देखते छह लोगों की मौत हो गई, जबकि कुलदेवता की पूजा खुशहाली के लिए की गई थी, लेकिन यहां के लोगों की खुशी शराब पीने के बाद मातम में बदल गई।
कोतवाली हाथरस गेट क्षेत्र के नगला सिंगी के लोग करीब पांच पीढ़ियों से यहां पर रह रहे हैं। तभी से वह कुल देवता के रूप में सैयद बाबा पीर की पूजा भी दफनगाह में करते आ रहे हैं। यह पूजा महामारी के वक्त करते हैं या फिर परिवार में कोई खुशी हो, तब कुल देवता की पूजा की जाती है।
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इसकी जानकारी देते हुए नगला प्रहलाद निवासी जयपाल सिंह ने बताया कि उनके पूर्वज पहले से सैयद बाबा को मनाते आ रहे हैं। शराब की धार चढ़ाने का चलन है, क्योंकि कोई देवता खीर-पूरी से मानते हैं तो किसी देवता को शराब से मनाया जाता है।
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कोई बच्चा अगर बीमार हो जाता है तो उसे हम देवता के नाम का प्रसाद बांट देते हैं तो घर में आई परेशानी दूर हो जाती है, लेकिन यहां तो सबकुछ उल्टा हो गया। कुल देवता की पूजा के बाद शराब पीने के बाद सभी बीमार हो गए और फिर छह लोगों की मौत हो गई।