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Hathras News: भ्रष्टाचार में फंसे जेई की जमानत याचिका खारिज
Sat, 05 Sep 2026 02:24 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Sat, 05 Sep 2026 02:24 AM IST
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प्रतीकात्मक चित्र।
- फोटो : Archive
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नगर पालिका परिषद हाथरस में जलकल विभाग के तत्कालीन जेई हर्षवर्धन की अग्रिम जमानत याचिका को अपर सत्र न्यायाधीश (कोर्ट संख्या 6) ने क्षेत्राधिकार के अभाव में निरस्त कर दिया है। मामला फर्जी दस्तावेज तैयार करने, धरोहर राशि की एफडीआर में धांधली और भ्रष्टाचार से जुड़ा है। वर्तमान में जेई चंदौली जिले की पं.दीनदयाल उपाध्याय नगर की नगर पालिका में तैनात हैं।
साकेत कॉलोनी निवासी प्रशांत कौशिक द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर 10 मार्च 2025 को मामले की गंभीरता को देखते हुए त्रिसदस्यीय समिति बनाई गई थी, जिसमें अपर जिलाधिकारी न्यायिक, उपजिलाधिकारी और वरिष्ठ कोषाधिकारी को शामिल किया गया था। जांच में सामने आया कि जेई हर्षवर्धन ने पद का दुरुपयोग करते हुए फर्जी एफडीआर बनाईं, बैंकों की नकली मोहरें लगाईं और सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना निविदादाताओं की धरोहर राशि वापस की।
इसके अलावा वर्ष 2023-24 में हैंडपंप स्थापना की माप पुस्तिकाओं में हेरफेर करके 5,30,586 रुपये का अधिक भुगतान कराने की अनियमितता पाई गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर कोतवाली हाथरस गेट में 31 मई 2025 को हर्षवर्धन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। विवेचना के दौरान पुलिस ने मामले में धारा 7/13 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की बढ़ोतरी की और चार जुलाई 2026 को चार्जशीट दाखिल कर दी। मुकदमे में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं शामिल हैं।
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कोर्ट ने कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से संबंधित मामलों की सुनवाई का क्षेत्राधिकार जनपद अलीगढ़ न्यायालय के पास है, न कि हाथरस न्यायालय के पास। क्षेत्राधिकार के अभाव के कारण कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर बिना कोई टिप्पणी किए अग्रिम जमानत याचिका को निरस्त कर दिया।
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साकेत कॉलोनी निवासी प्रशांत कौशिक द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर 10 मार्च 2025 को मामले की गंभीरता को देखते हुए त्रिसदस्यीय समिति बनाई गई थी, जिसमें अपर जिलाधिकारी न्यायिक, उपजिलाधिकारी और वरिष्ठ कोषाधिकारी को शामिल किया गया था। जांच में सामने आया कि जेई हर्षवर्धन ने पद का दुरुपयोग करते हुए फर्जी एफडीआर बनाईं, बैंकों की नकली मोहरें लगाईं और सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना निविदादाताओं की धरोहर राशि वापस की।
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इसके अलावा वर्ष 2023-24 में हैंडपंप स्थापना की माप पुस्तिकाओं में हेरफेर करके 5,30,586 रुपये का अधिक भुगतान कराने की अनियमितता पाई गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर कोतवाली हाथरस गेट में 31 मई 2025 को हर्षवर्धन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। विवेचना के दौरान पुलिस ने मामले में धारा 7/13 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की बढ़ोतरी की और चार जुलाई 2026 को चार्जशीट दाखिल कर दी। मुकदमे में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं शामिल हैं।
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कोर्ट ने कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से संबंधित मामलों की सुनवाई का क्षेत्राधिकार जनपद अलीगढ़ न्यायालय के पास है, न कि हाथरस न्यायालय के पास। क्षेत्राधिकार के अभाव के कारण कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर बिना कोई टिप्पणी किए अग्रिम जमानत याचिका को निरस्त कर दिया।