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अपहरण-दुष्कर्म में दो लोगों को सात-सात साल की कैद
अमर उजाला ब्यूरो हाथरस।
Updated Thu, 28 Sep 2017 11:30 PM IST
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कोर्ट
- फोटो : सांकेतिक चित्र
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अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम सुरेंद्र मोहन सहाय ने अपहरण और दुष्कर्म के एक मामले में दो लोगों को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने दोनों को सात-सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। दोनों पर 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड की आधी धनराशि प्रतिकर के रूप में पीड़िता को दी जाएगी। जुर्माना नहीं देने पर अभियुक्तों को अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।
थाना सिकंदराराऊ क्षेत्र के गांव निवासी व्यक्ति ने एक तहरीर दी, जिसमें कहा गया कि वह 20 अगस्त 2006 को अपने खेत पर भैंस लेकर गया था। खेत पर ही उसकी पत्नी मक्का नुकाने गई थी और उनके बेटे की पत्नी शौच करने चली गई थी। घर पर केवल पीड़िता और उसकी छोटी बहन रह गई थी। जब वह खेत से घर आए तो उनकी छोटी बेटी घर पर अकेली मिली। जब उससे पूछा गया कि उसकी बड़ी बहन कहां तो उसने कुछ नहीं बताया। उन्होंने अपनी बड़ी बेटी की तलाश शुरू कर दी।
लोगों से पूछताछ की तो उन्हें बताया गया कि उनकी बड़ी बेटी को दिनेश व हरपाल के साथ स्कूटर पर बैठकर जाते हुए देखा गया है। उसके बाद उनकी छोटी बेटी ने बताया कि उसकी बड़ी बहन घर में से बक्शे के अंदर रखे 15 हजार रुपये नकद, एक सोने का कॉलर, दो अंगूठी जनानी व एक मर्दानी, एक आधा किलो चांदी की कौधनी, तोड़िया आदि निकालकर दिनेश के साथ गई है। पीड़िता के पिता ने बताया कि दिनेश द्वारा उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर ले जाया गया। चार माह बाद बेटी घर लौटी तो उसने दुष्कर्म की बात बताई।
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15 दिसंबर 2008 को यह मामला अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के यहां सत्र न्यायालय के सुपुर्द किया गया। सिकंदराराऊ पुलिस ने विवेचना के बाद इस मामले में न्यायालय में चार्जशीट पेश की, जिस पर दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने सजा का फैसला सुनाया। न्यायालय ने दिनेश और हरपाल को धारा 366 में पांच-पांच वर्ष कैद व पांच हजार रुपये के अर्थदंड, धारा 363 के तहत पांच-पांच वर्ष कैद व पांच हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। जेल में बिताई गई अवधि भी सजा में समायोजित की जाएगी। इसकी पैरवी एडीजीसी साहब सिंह चौहान और प्रशान्त कमल पाराशर ने की।
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थाना सिकंदराराऊ क्षेत्र के गांव निवासी व्यक्ति ने एक तहरीर दी, जिसमें कहा गया कि वह 20 अगस्त 2006 को अपने खेत पर भैंस लेकर गया था। खेत पर ही उसकी पत्नी मक्का नुकाने गई थी और उनके बेटे की पत्नी शौच करने चली गई थी। घर पर केवल पीड़िता और उसकी छोटी बहन रह गई थी। जब वह खेत से घर आए तो उनकी छोटी बेटी घर पर अकेली मिली। जब उससे पूछा गया कि उसकी बड़ी बहन कहां तो उसने कुछ नहीं बताया। उन्होंने अपनी बड़ी बेटी की तलाश शुरू कर दी।
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लोगों से पूछताछ की तो उन्हें बताया गया कि उनकी बड़ी बेटी को दिनेश व हरपाल के साथ स्कूटर पर बैठकर जाते हुए देखा गया है। उसके बाद उनकी छोटी बेटी ने बताया कि उसकी बड़ी बहन घर में से बक्शे के अंदर रखे 15 हजार रुपये नकद, एक सोने का कॉलर, दो अंगूठी जनानी व एक मर्दानी, एक आधा किलो चांदी की कौधनी, तोड़िया आदि निकालकर दिनेश के साथ गई है। पीड़िता के पिता ने बताया कि दिनेश द्वारा उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर ले जाया गया। चार माह बाद बेटी घर लौटी तो उसने दुष्कर्म की बात बताई।
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15 दिसंबर 2008 को यह मामला अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के यहां सत्र न्यायालय के सुपुर्द किया गया। सिकंदराराऊ पुलिस ने विवेचना के बाद इस मामले में न्यायालय में चार्जशीट पेश की, जिस पर दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने सजा का फैसला सुनाया। न्यायालय ने दिनेश और हरपाल को धारा 366 में पांच-पांच वर्ष कैद व पांच हजार रुपये के अर्थदंड, धारा 363 के तहत पांच-पांच वर्ष कैद व पांच हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। जेल में बिताई गई अवधि भी सजा में समायोजित की जाएगी। इसकी पैरवी एडीजीसी साहब सिंह चौहान और प्रशान्त कमल पाराशर ने की।