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केरोसिन डालकर आत्महत्या का प्रयास
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, सासनी (हाथरस)।
Updated Tue, 21 Aug 2018 11:39 PM IST
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आत्माहत्या का प्रयास करने वाला व्यक्ति।
- फोटो : Amar Ujala
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बैनामा की भूमि पर अवैध कब्जा करने के बारे में लगातार की जा रही शिकायतों के बावजूद प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं किए जाने से आजिज व्यक्ति ने मंगलवार को तहसील दिवस में खुद पर केरोसिन डालकर आत्महत्या करने का प्रयास किया, जिससे प्रशासन में खलबली मच गई।
पीड़ित को तत्काल पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया गया। पीड़ित का कहना है कि शिकायतों के बावजूद प्रशासन उसे सत्यता से अवगत नहीं करा रहा।
पीड़ित सुरेश चंद्र पुत्र ज्वाला प्रसाद निवासी गढ़ी तमना (हाथरस) का आरोप है कि उसने वर्ष 1998 में एक भूमि बैनामा से खरीदी थी, लेकिन तहसील के लेखपालों ने कुछ लोगों से मिलकर उसकी भूमि पर कब्जा करा दिया है। प्रशासन से लगातार शिकायत की जा रही है, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। पीड़ित ने परिवार के साथ कई बार तहसील में धरना-प्रदर्शन भी किया है, लेकिन प्रशासन हरकत में नहीं आया है।
परेशान होकर पीड़ित ने यह कदम उठाया, जिससे प्रशासन में खलबली मच गई। मौके पर बैठे कोतवाल ने एसडीएम के आदेश पर उसे पकड़ लिया। एसडीएम इंद्रसेन यादव का कहना है कि यह भूमि पट्टे की है। पट्टा वर्ष 2001 में निरस्त होकर भूमि राज्य सरकार में निहित हो चुकी है।
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राजस्व अभिलेख में राज्य सरकार के नाम दर्ज होने के कारण भूमि का पुन: पट्टा हो चुका है। पीड़ित सुरेशचंद्र ने बैनामा बिना अनुमति के कराया था, जो नहीं हो सकता। लेखपाल जगन्नाथ प्रसाद का कहना है कि यह तहसील में उनकी तैनाती से पहले का मामला है। इस जमीन से उनका कोई लेना-देना नहीं है।
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पीड़ित को तत्काल पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया गया। पीड़ित का कहना है कि शिकायतों के बावजूद प्रशासन उसे सत्यता से अवगत नहीं करा रहा।
पीड़ित सुरेश चंद्र पुत्र ज्वाला प्रसाद निवासी गढ़ी तमना (हाथरस) का आरोप है कि उसने वर्ष 1998 में एक भूमि बैनामा से खरीदी थी, लेकिन तहसील के लेखपालों ने कुछ लोगों से मिलकर उसकी भूमि पर कब्जा करा दिया है। प्रशासन से लगातार शिकायत की जा रही है, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। पीड़ित ने परिवार के साथ कई बार तहसील में धरना-प्रदर्शन भी किया है, लेकिन प्रशासन हरकत में नहीं आया है।
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परेशान होकर पीड़ित ने यह कदम उठाया, जिससे प्रशासन में खलबली मच गई। मौके पर बैठे कोतवाल ने एसडीएम के आदेश पर उसे पकड़ लिया। एसडीएम इंद्रसेन यादव का कहना है कि यह भूमि पट्टे की है। पट्टा वर्ष 2001 में निरस्त होकर भूमि राज्य सरकार में निहित हो चुकी है।
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राजस्व अभिलेख में राज्य सरकार के नाम दर्ज होने के कारण भूमि का पुन: पट्टा हो चुका है। पीड़ित सुरेशचंद्र ने बैनामा बिना अनुमति के कराया था, जो नहीं हो सकता। लेखपाल जगन्नाथ प्रसाद का कहना है कि यह तहसील में उनकी तैनाती से पहले का मामला है। इस जमीन से उनका कोई लेना-देना नहीं है।