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दुष्कर्म के आरोपी को उम्रकैद की सजा
अमर उजाला ब्यूरो/ हाथरस।
Updated Thu, 20 Apr 2017 11:03 PM IST
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कोर्ट
- फोटो : Pintrest
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एडीजे तृतीय एसएन त्रिपाठी के न्यायालय ने किशोरी को बहला फुसलाकर भगा ले जाने एवं उसके साथ दुष्कर्म करने के एक आरोपी को दोष सिद्ध माना है। न्यायालय ने आरोपी को उम्रकैद की सजा एवं 1.30 लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई हैं। न्यायालय ने निर्णय में व्यवस्था दी है कि अर्थदंड अदा न करने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। जबकि अर्थदंड अदा किए जाने पर उक्त धनराशि का 70 प्रतिशत पीड़िता को दिया जाएगा।
पीड़िता के पिता ने कोतवाली मुरसान पुलिस को 7 अप्रैल 2011 को एक तहरीर दी। इसमें आरोप लगाया कि उसकी पुत्री को 4 अप्रैल 2011 सुबह 8 बजे उसकी सहेली और पुष्पेंद्र सिंह जाट निवासी रमचेला थाना सादाबाद यह कहकर घर से अपने साथ ले गए कि उसके हाईस्कूल के पेपरों का मिलान करना है। शाम को फिर उसे वह घर छोड़ जाएंगे। देर शाम तक उसकी पुत्री घर नहीं पहुंची तो वह उनके घर पहुंचा। पुत्री की सहेली ने जानकारी दी कि पुष्पेंद्र अभी अभी बाइक से उसे घर छोड़ने गया है। वह घर आ गया तो पता चला है कि पुष्पेंद्र उसकी पुत्री को घर छोड़ने नहीं आया है।
सुबह फिर वह अपने गांव के कुछ अन्य लोगों के साथ रमचेला पहुंचा तो पुष्पेंद्र के परिजनों ने उसके साथ इस बारे में जानकारी करना चाहा। तो पुष्पेंद्र के परिजनों ने गाली गलौज करते हुए धमकी दी कि भविष्य में वह आया तो उसके साथ अच्छा नहीं होगा। न्यायालय में हुई सुनवाई के दौरान आरोपी ने आरोपों से इंकार करते हुए परीक्षण चाहा। इसके बाद न्यायालय ने दोनों पक्षों के विद्वान अधिवक्ताओं को सुना। वादी की ओर से एडीजीसी राजेंद्र वार्ष्णेय ने आरोपी के खिलाफ प्रस्तुत किए गए साक्षों का आरोपी के विद्वान अधिवक्ता जवाब नहीं दे सके। इसके बाद न्यायालय ने आरोपी को आईपीसी की धारा 363 में सात वर्ष की कैद और 10 हजार रुपये अर्थदंड, धारा 366 में 10 वर्ष की कैद एवं 20 हजार रुपये अर्थदंड एवं धारा 376 व एससीएसटी एक्ट उम्रकैद एवं एक लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई हैं।
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पीड़िता के पिता ने कोतवाली मुरसान पुलिस को 7 अप्रैल 2011 को एक तहरीर दी। इसमें आरोप लगाया कि उसकी पुत्री को 4 अप्रैल 2011 सुबह 8 बजे उसकी सहेली और पुष्पेंद्र सिंह जाट निवासी रमचेला थाना सादाबाद यह कहकर घर से अपने साथ ले गए कि उसके हाईस्कूल के पेपरों का मिलान करना है। शाम को फिर उसे वह घर छोड़ जाएंगे। देर शाम तक उसकी पुत्री घर नहीं पहुंची तो वह उनके घर पहुंचा। पुत्री की सहेली ने जानकारी दी कि पुष्पेंद्र अभी अभी बाइक से उसे घर छोड़ने गया है। वह घर आ गया तो पता चला है कि पुष्पेंद्र उसकी पुत्री को घर छोड़ने नहीं आया है।
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सुबह फिर वह अपने गांव के कुछ अन्य लोगों के साथ रमचेला पहुंचा तो पुष्पेंद्र के परिजनों ने उसके साथ इस बारे में जानकारी करना चाहा। तो पुष्पेंद्र के परिजनों ने गाली गलौज करते हुए धमकी दी कि भविष्य में वह आया तो उसके साथ अच्छा नहीं होगा। न्यायालय में हुई सुनवाई के दौरान आरोपी ने आरोपों से इंकार करते हुए परीक्षण चाहा। इसके बाद न्यायालय ने दोनों पक्षों के विद्वान अधिवक्ताओं को सुना। वादी की ओर से एडीजीसी राजेंद्र वार्ष्णेय ने आरोपी के खिलाफ प्रस्तुत किए गए साक्षों का आरोपी के विद्वान अधिवक्ता जवाब नहीं दे सके। इसके बाद न्यायालय ने आरोपी को आईपीसी की धारा 363 में सात वर्ष की कैद और 10 हजार रुपये अर्थदंड, धारा 366 में 10 वर्ष की कैद एवं 20 हजार रुपये अर्थदंड एवं धारा 376 व एससीएसटी एक्ट उम्रकैद एवं एक लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई हैं।
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