खाली था ऑक्सीजन सिलेंडर, तड़पते रहे पौरुष
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हंगामे की आशंका पर तैनात रहा फोर्स
सांसद प्रतिनिधि मुकेश पौरुष की मौत के बाद परिजनों और भाजपा कार्यकर्ताओं में अस्पताल प्रशासन के विरुद्ध गहरा आक्रोश था। इसे लेकर अस्पताल पर हंगामे और तोडफ़ोड़ की आशंका को देखते हुए कई थानों का फोर्स बैनीगंज में सरस्वती हॉस्पिटल के बाहर और आसपास तैनात कर दिया गया। मुकेश पौरुष की मौत के बाद से ही नर्सिंग होम में सन्नाटा पसर गया था। स्टाफ के लोग ड्यूटी छोड़कर घर चले गए। आरोपी पिता-पुत्र के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद सदर कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तारी के लिए अस्पताल में दबिश भी दी, लेकिन उन्हें कोई मिला नहीं।
पोस्टमार्टम हाउस पर नेताओं का तांता
मुकेश पौरुष की मौत की खबर शहर में आग की तरह फैली। भाजपा के तमाम कार्यकर्ताओं के अलावा सांसद राजेश दिवाकर, विधायक हरीशंकर माहौर, विधायक सिकंदराराऊ वीरेंद्र सिंह राना, जिला पंचायत सदस्य रामेश्वर उपाध्याय, चेयरमैन आशीष शर्मा, अमर सिंह पांडेय, पूर्व विधायक राजवीर पहलवान, नगर अध्यक्ष भाजपा मूलचंद्र वार्ष्णेय के अलावा सैकड़ों लोग पोस्टमार्टम हाउस पहुंच गए। लोगों के जमावड़े को देखते हुए सदर कोतवाल, हाथरस गेट और चंदपा कोतवाल को पोस्टमार्टम हाउस बुला लिया गया। दोपहर 12 बजे से शाम साढ़े चार बजे तक लोग पोस्टमार्टम हाउस पर मौजूद रहे। इस दौरान पोस्टमार्टम हाउस पर मौजूद सांसद राजेश दिवाकर से लोगों ने आरोपी डॉक्टरों के विरुद्ध कार्रवाई कराने की मांग की। सांसद ने इस संबंध में सदर कोतवाल जसपाल सिंह पंवार से कार्रवाई के लिए कहा। पोस्टमार्टम हाउस पर मौजूद लोगों ने पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद के नारे भी लगाए। इसे लेकर पुलिसकर्मियों और लोगों के बीच नोक-झोंक भी हुई।
दादनपुर में भी पसरा मातम
मुकेश पौरुष मूल रूप से कोतवाली हाथरस गेट क्षेत्र के गांव दादनपुर के रहने वाले थे। बीते कुछ समय से वह शहर की अलीगढ़ रोड स्थित रावत नगर कॉलोनी में रह रहे हैं। वह कोचिंग भी चलाते थे। उनकी पत्नी भी शिक्षिका हैं। सांसद राजेश दिवाकर से उनकी पुरानी मित्रता है। मुकेश पौरुष की असमय मौत से जहां हर कोई दुखी नजर आया, वहीं परिजन गहरे सदमे में आ गए। गांव दादनपुर में भी मातमी सन्नाटा पसर गया। मुकेश पौरुष के दो बेटे हैं, जो अभी अध्ययनरत हैं।
सभी आरोप निराधार: डॉ गुप्ता
लापरवाही के आरोपों पर सरस्वती नर्सिंग होम के संचालक डॉ. महेश चंद्र गुप्ता ने बताया कि मुकेश पौरुष के जिस हाथ में फ्रैक्चर हुआ था, दस साल पहले उसी जगह फ्रैक्चर हो चुका था और एक प्लेट डाली गई थी। इस बार ऑपरेशन कर प्लेट बदली जानी थी। सौरभ ने मुकेश को गुरुवार शाम अस्पताल में एडमिट होने के लिए कहा था। इस पर उन्होंने कहा कि वह स्थानीय हैं। सुबह ऑपरेशन के समय ही अस्पताल पहुंच जाएंगे। सुबह ऑपरेशन से पहले अलीगढ़ से एनस्थेटिक बुलाकर दवा दिलाई गई। खुद दवा देने या एनस्थेटिक के नहीं आने के आरोप निराधार हैं। इसकी सच्चाई सीसीटीवी कैमरे के फुटेज से देखी जा सकती है। मुकेश पौरुष का वजन ज्यादा था। वह डायबिटीज और हाइपरटेंशन के भी मरीज थे। बेहोशी की दवा का इंजेक्शन लगाने के बाद उनकी हालत बिगड़ गई। उनकी पल्स तेजी से गिरने लगी और शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने लगी। सौरभ ने उन्हें फोन कर जानकारी दी तो वह घर से अस्पताल पहुंचे और जल्द ही मुकेश पौरुष को आगरा के लिए रेफर कर दिया। यही नहीं एंबुलेंस में भी एनस्थेटिक डॉक्टर को भी साथ भेजा गया था।
सासद बाेले...
मुकेश पौरुष का जाना मेरे लिए बड़ी और अपूर्णनीय क्षति है। परिजनों ने उन्हें बताया है कि इलाज में लापरवाही बरती गई है। इस मामले में मुकेश की पत्नी सुनीता देवी ने कोतवाली में मुकदमा दर्ज करा दिया है। हमने पुलिस-प्रशासन से इस मामले में कानून के अनुरूप कार्रवाई करने के लिए कहा है, ताकि इस तरह की पुनरावृत्ति फिर नहीं हो।
-राजेश दिवाकर, सांसद हाथरस