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अपहरण में पांच को आजीवन कारावास
hathras
Updated Tue, 09 Feb 2016 07:33 PM IST
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हाथरस। कोतवाली सासनी क्षेत्र से हुए अपहरण के एक मामले में अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय एसएन त्रिपाठी के न्यायालय ने पांच आरोपियों को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने पांचों को सश्रम आजीवन कारावास एवं 40-40 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। न्यायालय ने अर्थदंड नहीं देने की स्थिति में 10-10 माह के अतिरिक्त कारावास एवं अर्थदंड की राशि का 70 प्रतिशत वादी को प्रतिकर के रूप में देने का निर्णय भी दिया है।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक कोतवाली सासनी में देवेंद्र सिंह निवासी हड़ौली ने 11 अगस्त, 2008 को पुलिस को तहरीर दी। इसमें उन्होंने अपने भतीजे सुशील उर्फ अनिल पुत्र ओमवीर निवासी हड़ौली और उसके साले मोनू पुत्र शिवराज सिंह शाह निवासी सिबरामऊ कोतवाली जलेसर एटा पर अपने 10 वर्षीय पुत्र कुलदीप को तीन अगस्त, 2008 को अपहरण कर ले जाने का आरोप लगाया था। तहरीर में यह भी बताया गया कि उसका भतीजा सुशील उर्फ अनिल उससे लगातार फोन पर पांच लाख रुपये की फिरौती की मांग रहा था। नहीं देने पर उसके पुत्र की हत्या करने की धमकी दे रहा था।
पुलिस ने इस दौरान कार्रवाई करते हुए सिबरामऊ जलेसर एटा से कुलदीप को अपहरणकर्ताओं से मुक्त कराया था। घटना में पुलिस ने सुशील उर्फ अनिल, मोनू, अतुल चौहान, महीपाल एवं जिस घर में बच्चे को रखा गया था, उसकी मालकिन नीमा देवी के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। न्यायालय ने इस मामले में दोनों पक्षों के विद्वान अधिवक्ताओं को सुना और अभियोजन पक्ष की दलीलों को सही मानते हुए सजा का फैसला सुनाया।
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अभियोजन पक्ष के मुताबिक कोतवाली सासनी में देवेंद्र सिंह निवासी हड़ौली ने 11 अगस्त, 2008 को पुलिस को तहरीर दी। इसमें उन्होंने अपने भतीजे सुशील उर्फ अनिल पुत्र ओमवीर निवासी हड़ौली और उसके साले मोनू पुत्र शिवराज सिंह शाह निवासी सिबरामऊ कोतवाली जलेसर एटा पर अपने 10 वर्षीय पुत्र कुलदीप को तीन अगस्त, 2008 को अपहरण कर ले जाने का आरोप लगाया था। तहरीर में यह भी बताया गया कि उसका भतीजा सुशील उर्फ अनिल उससे लगातार फोन पर पांच लाख रुपये की फिरौती की मांग रहा था। नहीं देने पर उसके पुत्र की हत्या करने की धमकी दे रहा था।
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पुलिस ने इस दौरान कार्रवाई करते हुए सिबरामऊ जलेसर एटा से कुलदीप को अपहरणकर्ताओं से मुक्त कराया था। घटना में पुलिस ने सुशील उर्फ अनिल, मोनू, अतुल चौहान, महीपाल एवं जिस घर में बच्चे को रखा गया था, उसकी मालकिन नीमा देवी के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। न्यायालय ने इस मामले में दोनों पक्षों के विद्वान अधिवक्ताओं को सुना और अभियोजन पक्ष की दलीलों को सही मानते हुए सजा का फैसला सुनाया।
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